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पश्चिम बंगालः दीदी मतलब अब कारोबार

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआइआइटी) के व्यापार सुगमता सूचकांक में, बंगाल अब गुजरात से भी आगे नौवें स्थान पर पहुंच गया है

नई मंजिल पानागढ़ में 10 सितंबर को पॉलीफिल्म फैक्ट्री परियोजना के उद्घाटन के दौरान ममता बनर्जी नई मंजिल पानागढ़ में 10 सितंबर को पॉलीफिल्म फैक्ट्री परियोजना के उद्घाटन के दौरान ममता बनर्जी

ममता बनर्जी सरकार को टाटा के लिए फिर से रेड कार्पेट बिछाने में एक दशक और तीन विधानसभा चुनावों में जीत का समय लगा. ममता नंदीग्राम-सिंगूर में टाटा नैनो फैक्ट्री (2006-08) के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों के आंदोलन के दम पर सत्ता में आई थीं और उनकी सरकार लंबे समय तक अपनी उद्योग विरोधी छवि से मुक्त नहीं हो पाई.

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी कहते हैं कि बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट (2015-19) के पांच संस्करणों से 12 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों की चर्चा के बावजूद वास्तविक निवेश ''पिछले दशक में लगभग 50,000 से 60,000 करोड़ रुपए का ही था.'' वे बताते हैं, ''इसमें से, केंद्र का योगदान लगभग 10,000 से 12,000 करोड़ रुपए था. जहां तक नौकरियों का सवाल है, शायद बड़े उद्योगों में 1,00,000 और अन्य 3,00,000 एमएसएमई में सृजित किए गए.'' हालांकि पूर्व उद्योग मंत्री और वर्तमान वित्त मंत्री अमित मित्रा दावा करते हैं कि 40 प्रतिशत निवेश प्रस्ताव कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं.

तीसरे और निर्णायक जीत के साथ ममता बनर्जी को लगता है कि अब उद्योग को राज्य में लाने के लिए ठोस पहल करने का समय आ गया है. यह नए उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी के इस बयान में दिख जाता है कि टाटा ''देश के सबसे सम्मानित व्यापारिक घरानों में से है और बंगाल आने और निवेश करने के लिए उसका स्वागत है.'' कोलकाता के पास राजारहाट में टाटा एक आइटी हब खोलने आ रहा है, और सरकार एसएसकेएम अस्पताल और मेडिकल कॉलेज को उन्नत बनाने के लिए टाटा मेमोरियल अस्पताल, मुंबई के साथ गठजोड़ कर रही है.

उम्मीद का गलियारा
उम्मीद का गलियारा

युवाओं के पलायन को रोकने के लिए ममता आइटी और आइटीईएस के दायरे का विस्तार कर रही हैं. सरकारी दावों के अनुसार, इनमें पांच गुना वृद्धि हुई है और इन इकाइयों की संख्या 500 से बढ़कर 2,600 हो गई है तथा निर्यात भी दोगुना (2018-19 में 29,000 करोड़ रुपए) हो गया है, जबकि पिछले दस वर्षों में रोजगार सृजन (90,000 से 2,10,000 नौकरियां) में भी बढ़ोतरी हुई है.

ममता अपने नए कार्यकाल में कुछ बड़े निवेश के साथ औद्योगीकरण अभियान शुरू करने की उम्मीद कर रही थीं, लेकिन उन्हें पश्चिम बर्दवान के पानागढ़ में कोलकाता स्थित धनसेरी समूह के 1,250 करोड़ रुपए के पॉलीमर फिल्म निर्माण कारखाने के लिए समझौता करना पड़ा. यह 38 एकड़ में बनेगा, जो पानागढ़ औद्योगिक पार्क के 1,458 एकड़ भूमि बैंक से लिया गया है.

भूमि अधिग्रहण राज्य में अब भी एक प्रमुख बाधा है. टीएमसी सरकार ने 2015 में, निजी खिलाड़ियों की ओर से मालिकों/रैयतों से जमीन की सीधी खरीद की नीति अपनाई. राज्य की हस्तक्षेप न करने की नीति औद्योगिक घरानों के लिए उत्साहजनक नहीं है, लेकिन अधिकारी उन्हें 12 औद्योगिक पार्कों के रूप में पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम के पास पड़ी 6,000 एकड़ जमीन की ओर जाने की बात कह रहे हैं. निजी निवेशकों के लिए अपनी जमीन पर औद्योगिक पार्क स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने की स्वीकृत औद्योगिक पार्क (एसएआइपी) योजना भी है, जिन्हें करों, बिजली आदि में छूट दी जाएगी.

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक निलांजन घोष कहते हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं हो सकता है. वे कहते हैं, ''मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा निवेश तब तक नहीं आएगा, जब तक कि राज्य भूमि अधिग्रहण सुविधा के लिए सहमत नहीं हो जाता है.''

कोलकाता और उत्तर व दक्षिण 24 परगना के उपनगरीय जिलों में भूमि संकट को हल करने के लिए, राज्य निवेशकों की ओर से 5 एकड़ के छोटे भूखंडों पर स्थापित इकाइयों को भी औद्योगिक पार्क का दर्जा दे रहा है. इसमें निवेशकों को जमीन पर स्टाम्प शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति, बिजली सबस्टेशन बनाने के लिए ऋण, मुख्य सड़क से जुड़ने के लिए 1.5 किमी का संपर्क मार्ग और 2 करोड़ रुपए के कैशबैक जैसे प्रोत्साहन मिलते हैं. इससे पांच एकड़ के कोल्ड चेन, मछली/पोल्ट्री फार्म और गोदामों को औद्योगिक पार्क का दर्जा और प्रोत्साहन मिल सकेगा. मुख्य सचिव एच.के. द्विवेदी का कहना है कि राज्य की योजना 100 नए औद्योगिक पार्क स्थापित करने की है.

ममता ने सभी बाधाओं को दूर करने और मामलों में तेजी लाने के लिए पश्चिम बंगाल औद्योगिक संवर्धन बोर्ड नामक 16 सदस्यीय समिति का गठन किया है. और इसका असर दिख रहा है. उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआइआइटी) के व्यापार सुगमता सूचकांक में, बंगाल अब गुजरात से आगे नौवें स्थान पर है. घोष आतिथ्य, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन और पर्यटन के ''सेवा क्षेत्रों में काफी संभावनाएं'' देख रहे हैं.

सेवा क्षेत्र पहले से ही एनएसडीपी (शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद) में 53-55 फीसद का योगदान कर रहा है. पिछले दशक में, यह 6.5-7 फीसद बढ़ा है, जो बताता है कि मैन्युफैक्चरिंग से सेवाओं की ओर ध्यान केंद्रित हो रहा है. आइटीईएस ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई. राजारहाट में सिलिकॉन वैली टेक हब के 200 एकड़ में से 160 एकड़ पर इसका कब्जा है. पार्थ चटर्जी कहते हैं, ''न्यू टाउन में बंगाल सिलिकॉन वैली तेजी से एक सैटेलाइट शहर बन रहा है.'' इन्फोसिस ने यहां अपने कार्यालयों में काम शुरू कर दिया है, विप्रो एक दूसरे परिसर में अपना विस्तार कर रहा है और दोनों परिसर 10,000 नौकरियों का वादा कर रहे हैं. बंगाल की योजना वर्ष 2030 तक देश के आइटी निर्यात में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 25 फीसद करने की है.

ममता ने पुरुलिया के रघुनाथपुर में एक औद्योगिक टाउनशिप—जंगल सुंदरी कर्मनगरी (जेएसके) शुरू किया है; यह अमृतसर और डानकुनी के बीच फ्रेट कॉरिडोर से ओवरलैप होगा. जेएसके रघुनाथपुर में 2,483 एकड़ जमीन को एक एकीकृत मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के रूप में विकसित करेगा. राज्य सरकार और राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम बंगाल को पंजाब से जोड़ने वाले 1,856 किलोमीटर के फ्रेट कॉरिडोर का लाभ लेने के लिए 50:50 एसपीवी बनाएंगे. 1 सितंबर को पानागढ़ में लॉन्च के मौके पर ममता ने कहा, ''औद्योगिक गलियारा 72,000 करोड़ रुपए का निवेश लाएगा और लाखों नौकरियां पैदा करेगा.''

सरकार की उम्मीदें दुनिया के 'सबसे बड़े कोयला ब्लॉक' पर भी टिकी हैं—देवचा पचमी ओपन कास्ट खदान, जिसमें बीरभूम जिले के मुहम्मद बाजार में अनुमानित 2.1 अरब टन कोयले का भंडार है. इसको विकसित करने के लिए 15,000 करोड़ रुपए की एक योजना भी तैयार है. पर इस खदान से कोयला निकालना एक चुनौती होगी, क्योंकि भंडार बेसाल्ट चट्टान की एक मोटी परत के 200-300 मीटर नीचे है. यही वजह है कि अन्य राज्यों को संयुक्त रूप से ब्लॉक की पेशकश की गई थी.

व्यवसाय विशेषज्ञ प्रतिम रंजन बोस को लगता है कि राज्य के औद्योगिक विकास में एक बड़ी बाधा ममता और केंद्र सरकार के बीच खराब रिश्ते हैं. वे कहते हैं, ''जब वित्त मंत्री ने 2021-22 के बजट में कोलकाता-सिलीगुड़ी राजमार्ग की घोषणा की, तो राज्य में हड़कंप मच गया. इसका इसलिए विरोध किया गया कि यह उत्तर बंगाल के विकास को रोक देगा. इसलिए, सिलीगुड़ी के एक लॉजिस्टिक हब बनने के बजाए, पूरे पूर्वोत्तर और पड़ोसी बांग्लादेश, नेपाल और भूटान का ध्यान धीरे-धीरे गुवाहाटी में स्थानांतरित हो रहा है, जो तेजी से एक व्यापार और पारगमन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है.

यहां तक कि त्रिपुरा भी अब अपनी आपूर्ति शृंखला के लिए बंगाल के बजाए गुवाहाटी पर निर्भर है.'' बांग्लादेश, नेपाल और भूटान को भारत के 16 अरब डॉलर (1.18 लाख करोड़ रुपए) के निर्यात में पश्चिम बंगाल का योगदान बहुत कम है (चावल में 15 फीसद और इस्पात में करीब 10 फीसद). जाहिर है, बंगाल को अभी लंबा सफर तय करना है.

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