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धड़ाधड़ गिरती क्रिप्टो करेंसी

भौतिक संपत्तियों का सहारा न होने से क्रिप्टो करेंसी वित्तीय दुनिया के उतार-चढ़ावों के आगे बेहद लाचार होती हैं

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क्रिप्टो करेंसीः आखिर ऐसा क्यों हुआ क्रिप्टो करेंसीः आखिर ऐसा क्यों हुआ

जब यूक्रेन युद्ध लंबा खिंच रहा है और कच्चे तेल के ऊंचे दाम के साथ महंगाई का प्रेत देशों की नाक में दम किए है, तो क्रिप्टो मुद्राएं भी दुनिया भर में धड़ाधड़ गिर रही हैं. छह हफ्तों से कुछ ज्यादा वक्त में वैश्विक क्रिप्टो बाजार करीब 830 अरब डॉलर से हाथ धो बैठा जिसकी मार निवेशकों पर पड़ी जबकि दुनिया भर के शेयर बाजारों में तीव्र उतार-चढ़ाव आ रहे हैं. क्रिप्टो का वैश्विक बाजार पूंजीकरण (एम-कैप) 16 मई को 1.27 ट्रिलियन (खरब) डॉलर था, जो पिछले साल नवंबर के 2.83 ट्रिलियन डॉलर के आधे से भी कम था. सबसे महंगी क्रिप्टो मुद्रा बिटकॉइन की ट्रेडिंग नवंबर के 64,862 डॉलर (करीब 50.5 लाख रुपए) के मुकाबले प्रति कॉइन 29,504.9 डॉलर (करीब 23 लाख रुपए) पर हो रही थी.

बड़ी गिरावट मई के दूसरे हफ्ते में ''स्टैबलकॉइन'' टेरायूएसडी (कोड नाम यूएसटी) के अचानक धराशायी होने से आई, जिसका एम-कैप एक महीने पहले के मुकाबले 63 फीसद गिरकर 6.16 अरब डॉलर (47,934 करोड़ रुपए) पर आ गया. टेरायूएसडी सरीखा स्टैबलकॉइन जटिल कोड से नए कॉइन बनाता या पुराने कॉइन नष्ट करता है, ताकि मूल्य में स्थिरता बनी रहे. मगर बड़े निवेशकों ने ज्यों ही इससे हाथ खींचा, यह गिरकर 1 डॉलर से नीचे और फिर 11 मई को और नीचे 0.30 डॉलर पर आ गया. इसका भ्राता कॉइन टेरा (लूना) भी धड़ाधड़ गिरकर निवेशकों की अरबों की संपदा लील चुका है. भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों ने तो टेरा (लूना) को ट्रेडिंग से डिलिस्ट कर दिया क्योंकि इसकी कीमत 13 मई को शून्य से नीचे आ गई.

भारत के निवेशकों के लिए क्रिप्टो मुद्राओं में यह गिरावट इससे बदतर वक्त पर नहीं आई हो सकती थी. फरवरी में केंद्रीय बजट में लगाए गए 30 फीसद कर से पहले ही कराह रहे लाखों निवेशकों को क्रिप्टो करेंसी में इस लगातार गिरावट ने अधर में छोड़ दिया. इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, पिछले साल नवंबर में 1.5-2 करोड़ जितनी बड़ी तादाद में भारतीयों ने डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर क्रिप्टो मुद्राओं में करीब 6 अरब डॉलर (46,695 करोड़ रुपए) का निवेश कर रखा था.

क्रिप्टो में तेज गिरावट की वजहें जगजाहिर हैं. शेयर बाजारों में शेयर की कीमतों को सूचीबद्ध कंपनियों की अंतर्निहित परिसंपत्तियों और राजस्वों का सहारा मिलता है, पर क्रिप्टो के पास ऐसा कोई सहारा नहीं है. लोग 7,000 से ज्यादा क्रिप्टो करेंसी की ट्रेडिंग करते हैं, प्रचलन में इनकी संख्या कहीं ज्यादा होगी. उनके अनियंत्रित और विकेंद्रीकृत होने का अर्थ यह है कि इनकी टेक्नोलॉजी का जानकार कोई भी शख्स क्रिप्टो लॉन्च कर सकता है. भौतिक संपत्तियों का बहुत कम समर्थन हासिल होने से क्रिप्टो मुद्राएं वित्तीय दुनिया के उतार-चढ़ावों के आगे बेहद लाचार होती हैं.

यूक्रेन पर रूसी आक्रमण से जुड़ी अनिश्चितताओं से वैश्विक शेयर बाजारों को खासा झटका लगा और उनमें भारी गिरावट आई. कच्चे तेल की कीमतें (ब्रेंट) 110 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं. साथ ही युद्ध से पैदा आपूर्ति की मुश्किलों ने महंगाई की आग भड़का दी, जिसकी वजह से यूएस फेडरल रिजर्व इस महीने की शुरुआत में ब्याज दरें 50 आधार अंक (बीपीएस) बढ़ाने को मजबूर हो गया. भारत में महंगाई लगातार चौथे महीने भारतीय रिजर्व बैंक की 6 फीसद की ऊपरी सीमा को पार कर अप्रैल में 7.79 फीसद पर पहुंच गई. आरबीआइ ने 4 मई को रेपो दर 40 बीपीएस बढ़ाई, जो महामारी के बाद इसमें पहली बढ़ोतरी थी.

इस तेज गिरावट के पहले महामारी के दौरान दुनिया भर में भारी-भरकम प्रोत्साहन उपायों के कारण क्रिप्टो मुद्राओं में निवेश तेजी से बढ़ा था. महामारी के पहले दो महीनों के दौरान ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में 10 ट्रिलियन डॉलर की प्रोत्साहन राशि झोंकी गई. यू-ट्रेड सॉल्यूशंस के सह-संस्थापक और सीईओ कुणाल नंदवाणी कहते हैं, ''प्रोत्साहन राशियों का एक हिस्सा क्रिप्टो, शेयर बाजारों, रियल एस्टेट और स्टार्ट-अप सरीखी निवेश योग्य परिसंपत्तियों में गया.

अब जब बैंक बॉन्ड खरीदकर और ब्याज दरें बढ़ाकर अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं से नकदी बाहर खींच रहे हैं, अचानक तरलता संकट पैदा हो गया है.'' डरे निवेशकों ने क्रिप्टो सहित अपने निवेश बेचने शुरू कर दिए, जिससे मौजूदा संकट जल्द आ धमका. दूसरों ने अपने निवेश तो रोक रखे हैं, लेकिन फिलहाल वे और पैसा नहीं लगा रहे हैं. नई दिल्ली के विज्ञापन से जुड़े पेशेवर आनंद महेश ने इथेरियम, पोलकाडॉट, सोलाना और डॉजीकॉइन सरीखी क्रिप्टो मुद्राओं में 2 लाख रुपए निवेश किए थे. वे कहते हैं, ''मेरे पास जो पोर्टफोलियो पहले से है, उसे मैंने रोक रखा है. मुझे पैसा निकालने की जल्दी नहीं है, मैंने इसे जोखिम निवेश की तरह लगाया था. यह चक्रीय है. बिटकॉइन में भी पहले गिरावट आई थी पर यह फिर उछाल के साथ लौट आया.'' क्रिप्टो उन्हें अब भी आकर्षक लगता है तो इसके तरल स्वभाव की वजह से, जिसमें निवेशकों को बेचने के बाद रकम तत्काल मिल जाती है.

नंदवाणी क्रिप्टो का भविष्य अंधकारमय बताते हैं. वे कहते हैं, ''इनमें और बेतहाशा गिरावट आ सकती है, हो सकता है वापसी भी न हो.'' वे यह भी कहते हैं कि अपनी उंगली जला चुके खुदरा निवेशक हमेशा के लिए अपने पोर्टफोलियो छोड़ सकते हैं. यह बहुत कठोर लग सकता है, पर क्रिप्टो मुद्राओं के प्रति उत्साह लौटने में अभी खासा वक्त लगेगा.

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