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मध्य प्रदेशः मालवा में सांप्रदायिक लावा

जब तक प्रशासन निष्पक्ष नहीं दिखता और एक समूह के इशारे पर कार्रवाई करना बंद नहीं करता, मालवा एक अनजानी आशंका से भरा रहेगा

माहौल गर्म इंदौर क्षेत्र के हिंदू संगठन विरोध प्रदर्शन करते हुए माहौल गर्म इंदौर क्षेत्र के हिंदू संगठन विरोध प्रदर्शन करते हुए

एक के बाद एक कई सांप्रदायिक घटनाओं ने मध्य प्रदेश के समृद्ध पश्चिमी भाग मालवा को हिलाकर रख दिया है. लोग आशंकित हैं कि न जाने कब क्या हो जाए?

सांप्रदायिक घटनाओं का हालिया दौर इंदौर के बॉम्बे बाजार की एक घटना के साथ शुरू हुआ, जो मुस्लिम बहुल क्षेत्र है. मुस्लिम लड़कियों के लिबास में दो लड़कियां बॉम्बे बाजार में एक आदमी के साथ देखी गईं. कुछ लोगों ने उन्हें रोका और उनसे पहचान पत्र दिखाने की मांग की. पहचान पत्र देखने पर पता चला कि वे लड़कियां हिंदू थीं, उनके साथ का पुरुष भी हिंदू था. इस बात को लेकर हंगामा हो गया. पुलिस सूत्रों ने कहा कि घटना एक और घटना से जुड़ी है जो हाल के दिनों में हुई थी. एक मुस्लिम लड़की एक हिंदू लड़के के साथ भाग गई थी और इस घटना को सोशल मीडिया पर बड़े जोरदार ढंग से शेयर किया गया था. मुस्लिम समुदाय को यह बहुत नागवार गुजरा.

इसके पहले एक चूड़ी बेचने वाले को लेकर विवाद भड़क उठा था. यह सिलसिला इधर लंबे समय से चल रहा है. सितंबर 2020 से अब तक मालवा क्षेत्र के जिलों में कुल 12 सांप्रदायिक घटनाएं दर्ज की गई हैं.

प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव तथा पत्रकार विनीत तिवारी कहते हैं, ''दिसंबर 2020 और जनवरी 2021 में, मालवा में सांप्रदायिक घटनाओं में तेजी आई. अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर के लिए चंदा जुटाने के दौरान कई जगहों पर मुसलमानों को उकसाया गया था. उस समय मध्य प्रदेश में पंचायत और शहरी निकाय के चुनाव होने थे.'' दिसंबर और जनवरी में सांप्रदायिक हिंसा के कारणों का पता लगाने के लिए बने तथ्यान्वेषी दल का हिस्सा रहे तिवारी कहते हैं कि वैसे तो सांप्रदायिक मुद्दे बड़े पैमाने पर शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित हुआ करते थे लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सांप्रदायिक तनाव गांवों और कस्बों में समान रूप से फैल गया है. तिवारी कहते हैं, ''लॉकडाउन हटने के बाद से लोगों ने छोटे आंदोलनों या विरोध के माध्यम से सरकार की विफलताओं पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. सांप्रदायिक घटनाएं लोगों को उलझाए रखने का एक अच्छा तरीका हैं, ताकि वे सरकार की चूक पर सवाल ही न उठा सकें.''

कुछ लोग इन घटनाओं के पीछे 2023 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में मालवा क्षेत्र में फिर झंडा गाड़ने के लिए भाजपा की आतुरता को देखते हैं. 2018 के चुनावों में भाजपा को मालवा क्षेत्र की 66 में से 28 सीटें ही मिलीं, जो 2013 में पार्टी को मिली 65 सीटों से बहुत कम थी. हालांकि नवंबर 2020 में हुए उपचुनाव के बाद भाजपा की सीटें बढ़कर 34 हो गईं लेकिन उसे अभी अपनी स्थिति को और मजबूत करने की जरूरत है. अभी जोबट सीट के लिए विधानसभा उपचुनाव और खंडवा के लिए लोकसभा उपचुनाव होने शेष हैं. दोनों ही मालवा क्षेत्र में आते हैं.

कुछ लोग इन घटनाओं पीछे राजनैतिक कारणों के अलावा, आर्थिक कारण भी देखते हैं. इंदौर के देपालपुर में एक चाट विक्रेता को अपनी दुकान का हिंदू नाम रखने के खिलाफ चेतावनी दी गई थी. इंदौर में स्थानीय निवासी राजवाड़ा के पास अटाला मार्केट क्षेत्र में चल रहे एक विवाद की ओर इशारा करते हैं. अटाला मार्केट में मुख्य रूप से मुसलमानों की दुकानें हैं जो कपड़े और कृत्रिम गहने बेचते हैं. इसे ज्यादा खर्च करने में असमर्थ लोगों के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है. हिंदुओं के वर्चस्व वाले अन्य व्यापारिक संघ बाजार को बंद कराने की मांग कर रहे हैं.

ऐसी ही कुछ शंका उज्जैन में भी जाहिर की जा रही है. प्रसिद्ध महाकाल मंदिर के करीब स्थित बेगम बाग क्षेत्र में अधिकांश व्यवसाय मुसलमानों के स्वामित्व में हैं, लेकिन चाहे रेस्तरां हों या मेडिकल स्टोर, सभी महाकाल के नाम पर हैं. इस क्षेत्र को भी स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत नए सिरे से बसाने के लिए चुना गया है और इस क्षेत्र को खाली कराने की बातें भी चल रही हैं.

सरकारी सूत्रों को सांप्रदायिक माहौल में तेजी की कुछ और वजहें लगती हैं. एक शीर्ष पुलिस अधिकारी कहते हैं, ''अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे से मुस्लिम समुदाय के कट्टरपंथी तत्वों में जोश है.'' उज्जैन में तालिबान समर्थक नारे लगाने के आरोप लग रहे हैं और पुलिस इसे पाकिस्तान समर्थक बता रही है, जबकि कुछ इसे 'काजी साहब' के समर्थन का नारा बता रहे हैं.

पिछले कुछ वर्षों में उभरे हिंदू दक्षिणपंथी संगठन बहुत मुखर हो गए हैं और सांप्रदायिक घटनाओं में जांच और कार्रवाई को प्रभावित करने के प्रयास कर रहे हैं. चूड़ी विक्रेता से जुड़ी इंदौर की घटना में, उसकी पिटाई करने वाले आरोपी ने यह भी तय किया कि चूड़ी विक्रेता पर गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाए. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ''जब भी कोई सांप्रदायिक घटना होती है, तो पुलिस पर हिंदू दक्षिणपंथी संगठनों की राय पर विचार करने का दबाव होता है.''

जब तक प्रशासन निष्पक्ष नहीं दिखता और एक समूह के इशारे पर कार्रवाई करना बंद नहीं करता, मालवा एक अनजानी आशंका से भरा रहेगा. फिलहाल तो सांप्रदायिक सद्भाव की दिशा में कोई पहल नहीं दिखती.

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