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उत्तर प्रदेशः चुनाव लड़कर बनाएंगे माहौल

साल 2022 में रणनीति के तहत वरिष्ठ मंत्रियों समेत खुद मुख्यमंत्री योगी के चुनाव लड़ने को लेकर भाजपा में चल रहा मंथन. अयोध्या और मथुरा पर भी योगी की नजर

मोर्चे पर एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मोर्चे पर एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

पहली जनवरी को नववर्ष के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर बार की तरह इस बार भी शाम के वक्त लखनऊ के 5 कालीदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर पत्रकारों से अनौपचारिक मुलाकात कर रहे थे. कुछ ही देर में यह मुलाकात इस वर्ष होने वाले उत्तर प्रदेश (यूपी) विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी चर्चा में तब्दील हो गई. यह पूछे जाने पर कि ''क्या आप विधानसभा चुनाव लड़ेंगे?'' योगी आदित्यनाथ का चेहरा खिल जाता है. वह मुस्कुराते हुए जवाब देते हैं, ''हां, मैं विधानसभा चुनाव अवश्य लडूंगा. पर कहां से लडूंगा, इसका फैसला पार्टी करेगी.'' इससे पहले भी 6 नवंबर को गोरखपुर में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में योगी साल 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं. 

साल 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ने संबंधी योगी के बयान के बाद से राजनीतिक हल्कों में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. इन अटकलों को हवा देते हुए अयोध्या सदर सीट से भाजपा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता कहते हैं, ''मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या से चुनाव लड़ें तो यह रामलला की नगरी का सौभाग्य होगा.'' अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी की सक्रियता भी कुछ संकेत दे रही है. मार्च 2017 में यूपी का मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ 33 बार अयोध्या आ चुके हैं. मार्च 2017 से नवंबर, 2019 तक योगी 12 बार अयोध्या आए थे. 9 नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद योगी 21 बार अयोध्या आ चुके हैं.

इस दौरान 6 मौकों पर योगी अयोध्या में सर्किट हाउस में न रुककर रामजन्म भूमि के अपेक्षाकृत समीप पर्यटन विभाग के होटल साकेत में ठहरे थे. अयोध्या के साकेत कालेज के पूर्व प्राचार्य वी.एन.अरोड़ा बताते हैं, ''मुख्यमंत्री योगी को अयोध्या से विधानसभा चुनाव का उम्मीदवार बनाकर भाजपा कुछ उसी तरह की रणनीति बना सकती है जैसा कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को वाराणसी से उम्मीदवार बनाकर बनाई गई थी. योगी आदित्यनाथ के उम्मीदवार बनते ही अयोध्या विधानसभा सीट हाइप्रोफाइल हो जाएगी. इस वजह से यहां हो रहा राममंदिर का निर्माण न केवल सुर्खियों में आ जाएगा बल्कि यह चुनावी मुद्दा भी बन जाएगा.'' योगी के अयोध्या से चुनाव लड़ने का असर जिले की पांच विधानसभा सीटों पर पड़ेगा. साल 1991 और 2017 में जब भाजपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई है तब पार्टी ने अयोध्या की सभी विधानसभा सीटें भी जीती हैं.

अयोध्या ही नहीं कृष्ण नगरी मथुरा से भी योगी आदित्यनाथ को चुनाव लड़ाने की मांग जोर पकड़ रही है. भाजपा के राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर योगी को मथुरा से चुनाव लड़ाने की मांग की है. नड्डा को भेजे गए पत्र में यादव ने लिखा है, ''मेरे सपने में भगवान श्रीकृष्ण आए थे, उन्होंने कहा कि योगी से कहो कि वो मेरी जन्मभूमि से चुनाव लड़ें.'' इससे पहले मथुरा से भाजपा सांसद हेमामालिनी ने भी 22 दिसंबर को मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था, ''मैं चाहती हूं कि योगी आदित्यनाथ हमारे मथुरा से चुनाव लड़ें. अयोध्या और काशी में भव्य मंदिर का निर्माण चल रहा है तो अब मथुरा में भी कृष्ण का भव्य मंदिर बनना चाहिए.'' 

मार्च, 2017 में यूपी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद योगी आदित्यनाथ ने मथुरा पर खास ध्यान दिया. योगी ने अगर अयोध्या में दीपावली पर दीपोत्सव की शुरुआत की तो होली के मौके पर ब्रज में जाकर साधुओं के साथ रंग खेला. यूपी में भाजपा सरकार बनने के चार महीने के भीतर 11 जुलाई, 2017 को योगी कैबिनेट ने श्रीकृष्ण की जन्मस्थली के आध्यात्मिक स्वरूप को संरक्षित करने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले 'ब्रज तीर्थ विकास परिषद' के गठन का प्रस्ताव पारित किया था. परिषद का उपाध्यक्ष सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी शैलजाकांत मिश्र को बनाया गया था. यूपी का मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी नियमित तौर पर मथुरा जाते रहे हैं. पिछले 19 दिसंबर को योगी ने मथुरा पहुंचकर भाजपा की जनविश्वास यात्रा का शुभारंभ किया था. यह पिछले 56 महीनों में योगी का 19वां मथुरा दौरा था. 

लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एस.के. द्विवेदी कहते हैं, ''योगी ने विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा करके विपक्षी पार्टियों के नेताओं पर दबाव बनाने की कोशिश की है. चुनाव लड़कर योगी यह साबित करने की कोशि‍श करेंगे कि उन्हें जनता का समर्थन प्राप्त है और इसके लिए वह जनता के बीच जाने में गुरेज नहीं कर रहे.'' बीते तीन दशक में मुलायम सिंह और कल्याण सिंह के बाद योगी तीसरे सत्तासीन नेता होंगे जो मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगे. एस.के. द्विवेदी बताते हैं, ''योगी ने कभी 'बैकडोर' की राजनीति नहीं की. वह गोरखपुर से साल 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 का लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचते रहे हैं. विधान परिषद सदस्य होना उनके मिजाज से मेल नहीं खाता है.'' साल 2022 के विधानसभा चुनाव में योगी की लोकप्रियता का भरपूर लाभ लेने के लिए भाजपा नेताओं का एक खेमा इन्हें पश्चिमी यूपी की किसी सीट से चुनाव लड़ने की वकालत कर रहा है. 

वहीं, योगी के विधानसभा चुनाव लड़ने के मसले पर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव कहते हैं, ''सीएम योगी आदित्यनाथ को इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहिए क्योंकि वह हारने जा रहे हैं.'' भाजपा के भीतर योगी ही नहीं वरिष्ठ मंत्रियों को भी चुनाव मैदान में उतारने पर मंथन चल रहा है. इनमें ज्यादातर वे लोग हैं जो विधान परिषद सदस्य हैं और जल्द ही उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है. (देखें बॉक्स) हालांकि पार्टी आधिकारिक तौर पर इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से बच रही है. यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह कहते हैं, ''भाजपा में चुनाव संबंधी सारे निर्णय संसदीय बोर्ड लेता है. संसदीय बोर्ड की अभी कोई बैठक भी नहीं हुई है. ऐसे में कौन चुनाव लड़ेगा कौन नहीं, इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है.''

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