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छत्तीसगढ़ः राज्य के विलुप्तप्राय जंगली भैंसे को बचाने की जागी उम्मीद

राज्य के वन्यजीव अधिकारी उदंती-सीतानदी और साथ ही हिंदुस्तान में जीवित जंगली भैंसों की आबादी वाले दूसरे इकलौते वासस्थान असम के बचे हुए भैंसों के साथ इस मादा क्लोन के संकरण के जरिए इनकी वंश वृद्धि की संभावना से खासे रोमांचित हैं.

वापसी की कोशिश  नया रायपुर में क्लोन से तैयार जंगली भैंस वापसी की कोशिश नया रायपुर में क्लोन से तैयार जंगली भैंस

यह एक किस्म की घर वापसी है. विलुप्तप्राय एशियाई जंगली भैंस (बुबैलस अर्नी) का दुनिया भर में पहला क्लोन छत्तीसगढ़ लाया गया है. यह इस प्रजाति को यहां नई जिंदगी देने के कार्यक्रम का हिस्सा है. उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के एक जंगली भैंसे से तैयार इस क्लोन दीपाशा का जन्म 2015 में करनाल (हरियाणा) के राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में हुआ. नया रायपुर की जंगल सफारी के संरक्षण-ब्रीडिंग केंद्र में अब इसे नया घर दिया गया है.

जंगली भैंसे को छत्तीसगढ़ के राज्य पशु का दर्जा हासिल है. इसके बावजूद राज्य के जंगलों से कुछेक को छोड़कर जंगली भैंसे गायब हो गए. उदंती वन्यजीव अभयारण्य में की गई प्रजातियों की आखिरी गणना से पता चला कि वहां सिर्फ 12 जंगली भैंस से बचे हैं. राज्य के वन्यजीव अधिकारी उदंती-सीतानदी और साथ ही हिंदुस्तान में जीवित जंगली भैंसों की आबादी वाले दूसरे इकलौते वासस्थान असम के बचे हुए भैंसों के साथ इस मादा क्लोन के संकरण के जरिए इनकी वंश वृद्धि की संभावना से खासे रोमांचित हैं. चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन आर.के. सिंह ने कहा, ''इसकी शुरुआत करने के लिए हम सीतानदी के वासस्थल से एक भैंसे को रायपुर के ब्रीडिंग केंद्र में लाने की योजना बना रहे हैं.''

वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय प्रमुख राजेंद्र मिश्रा कहते हैं कि असम से भी एक भैंसा लाने की योजना है ताकि इसकी संततियों में आनुवंशिक विविधता लाई जा सके. उन्होंने कहा, ''हमने विज्ञान का सहारा लिया है. अब चुनौती यह है कि इस क्लोन से पक्के तौर पर बछड़े पैदा हों.'' मध्य भारत में छत्तीसगढ़ अकेला भूभाग है जहां जंगली भैंस हैं. 2006 में ये बिल्कुल खत्म होने के कगार पर थे. तब उदंती-सीतानदी में पांच बचे हुए पशुओं—दो मादा और एक नर—के बीच कैप्टिविटी में प्रजनन करवाया गया. इसके नतीजतन ब्रीडिंग केंद्र में जन्मे तीन बछड़ों को उसके बाद जंगल में छोड़ दिया गया. राज्य भर में 50 से ज्यादा जंगली भैंस-भैंसे नहीं हैं.

प्रजाति बहाली प्रोग्राम के तहत वन्यजीव अफसरों ने जंगली भैंसों के इलाकों में 3,500 पालतू पशुओं को टीके लगाए हैं ताकि उनसे होने वाली बीमारियों को फैलने से रोका जा सके. यह पक्का करने के लिए कि उनमें आपस में कोई ब्रीडिंग न हो, वन विभाग ने जंगली भैंसों वाले जंगलों के नजदीकी गांवों से दर्जनों पालतू भैंसे भी लाकर रखे हैं.

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