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राहत पर मची ऐसी रार!

अंफन तूफान के राहत कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोपों से ममता बनर्जी और तृणमूल सांसत में, भाजपा को मिला घेरने का मौका

धुंधलाती उम्मीदें बैनारा गांव की फूलमती रप्तान का घर तूफान में तबाह हो गया धुंधलाती उम्मीदें बैनारा गांव की फूलमती रप्तान का घर तूफान में तबाह हो गया

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले की इच्छामती नदी के किनारे 5 किमी लंबा संकरा पुश्ता कोई 2,000 विस्थापित लोगों का घर बन गया है. ये लोग दो महीने पहले हिंगलाजगंज के पड़ोसी गांव बैनारा से यहां आए. 20 मई को अंफन तूफान की दस्तक के बाद से ही ये परिवार अस्थायी तंबुओं में डेरा डाले हैं जो बांस के खंभों के ढांचे पर प्लास्टिक की चादरें, साड़ियां और लुंगियां डालकर बनाए गए हैं. कुछ के साथ मवेशी भी हैं. कड़कड़ाती धूप हो या बारिश, उनके पास यहीं रहने के अलावा कोई चारा नहीं.

अंफन तूफान के दौरान तेज रफ्तार हवाओं और बारिश ने 16 में से छह जिलों में जबरदस्त तबाही मचाई. 100 से ज्यादा जानें गईं, 1 लाख हेक्टेयर फसल पानी में समा गई और कम से कम 10 लाख घर तहस-नहस हो गए. तृणमूल कांग्रेस सरकार 1 लाख करोड़ रुपए का नुक्सान बता रही है. केंद्र ने 1,000 करोड़ रुपए की सहायता दी, तो राज्य सरकार ने करीब 6.5 करोड़ लोगों के राहत और पुनर्वास के लिए 6,250 करोड़ रु. की रकम मुकर्रर की.

आधिकारिक तौर पर इस रकम का एक हिस्सा मुआवजे के तौर पर बांटा गया और सीधे लोगों के बैंक खातों में गया. मगर बैनारा गांव के कई लोग कहते हैं कि उन्हें फूटी कौड़ी न मिली. दक्षिण 24 परगना जिले से भी जरूरतमंदों तक राहत न पहुंचने की ऐसी ही खबरें आईं. मगराहाट में उत्तर मोहनपुर पंचायत के महादेव मंडल ऐसे ही लोगों में से हैं. उन्होंने घर की टूटी छत की मरम्मत के लिए पत्नी के गहने गिरवी रखकर साहूकार से 14,000 रुपए कर्ज लिए. वे कहते हैं कि मुआवजे के लिए पंचायत दफ्तर के चक्कर लगाने के बाद भी कोई नतीजा न निकला.

उत्तर मोहनपुर के कोई 60 परिवारों का आरोप है कि उन्हें राहत से इसलिए इनकार कर दिया गया क्योंकि तृणमूल के कब्जे वाली पंचायत ने उन्हें विरोधी पार्टी का समर्थक कहकर ब्लैकलिस्ट कर दिया. एक ग्रामीण आनंद सरदार कहते हैं, ''खंड विकास अधिकारी के दफ्तर के सामने हमने तीन बार प्रदर्शन किए, तभी से स्थानीय तृणमूल कार्यकर्ता झूठे मामले दर्ज करने की धमकी दे रहे हैं.''

राहत पर रार

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अंफन क्षतिपूर्ति पैकेज का ब्योरा देते हुए 29 मई को ऐलान किया था कि अपना घर गंवा चुके 10 लाख परिवारों में से हरेक को 20,000 रुपए और अपनी फसलों/पान की बेलों से हाथ धो बैठे 40,000 किसानों को 1,500-5,000 रुपए दिए जाएंगे. राज्य सरकार का कहना है कि घर बनाने के लिए 2,400 करोड़ रु. और इसके अलावा किसानों को 500 करोड़ रु. बांटे गए हैं.

ये आरोप चौतरफा और बड़े पैमाने पर लगे हैं कि तृणमूल के जमीनी कार्यकर्ताओं और ओहदेदारों ने पक्षपात करके धोखाधड़ी से रकम हड़प ली. महादेव कहते हैं, ''हमारे प्रदर्शन के बाद हमें आंशिक टूटे घरों को बनवाने के लिए तय रकम 5,000 रुपए से तसल्ली करने को कहा गया. हम इसे क्यों स्वीकार करें जबकि हमारे घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं?'' उत्तर मोहनपुर के एक और बाशिंदे तारापद हलदर आरोप लगाते हैं कि तृणमूल के 140 नेताओं/पंचायत सदस्यों ने घर साबुत होने के बावजूद मुआवजा ले लिया.

राहत का पैसा हड़पने को लेकर विरोध प्रदर्शन की खबरें दक्षिण 24 परगना के सागर से और मुर्शिदाबाद, हावड़ा और पूर्वी मिदनापुर जिलों से भी आई हैं. पंचायत सदस्यों को भीड़ ने घेरा—उन पर हमले तक हुए. तृणमूल कार्यकर्ताओं को काले झंडे दिखाए गए. मुर्शिदाबाद के एक जिला अफसर नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं, ''हमारे जिले में घरों को नुक्सान नहीं पहुंचा था पर हमने एक छोटी सूची (लाभार्थियों की) इस डर से भेज दी थी कि अधिकारी फटकार लगाएंगे. थोड़े-से बेघर परिवारों को मदद पहुंचाने की कोशिश में हमने दूसरे लोगों की नाराजगी मोल ले ली.''

दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप में प्रताप आदित्यनगर के उपप्रधान देवब्रत मैती और उनके कुछ रिश्तेदारों को कथित तौर पर मुआवजा मिला, बावजूद इसके कि उनके दोमंजिला मकान को कोई नुक्सान नहीं पहुंचा है. काकद्वीप के एक तृणमूल नेता सोमेन दास, उनकी पत्नी और रिश्तेदार भी लाभार्थियों में थे. सुंदरबन और कुलताली में पंचायत सदस्यों ने तूफान प्रभावित लोगों से लाभार्थी बनाने के लिए 5,000 रुपए 'एडवांस' मांगे. 8,000 लोगों—काकद्वीप की आधी आबादी—ने शिकायत की है कि सूचियां सुधारी जाएं.

हुगली जिले में चांदीतला की गरलगाचा ग्राम पंचायत ने 94 लाभार्थियों की सूची तैयार की, उसमें कथित तौर पर 75 पंचायत सदस्यों के परिजन, दोस्त, रिश्तेदार निकले. नामों के साथ संपर्क के ब्योरे में एक ही मोबाइल नंबर है—जो कथित तौर पर पंचायत प्रधान मनोज सिंह का नंबर है. एक असल लाभार्थी दावा करते हैं, ''यह मुआवजा जमा होने पर प्रधान को अलर्ट करने के लिए किया गया ताकि वह कमिशन मांग सके.''

बदनामी से डरकर लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा और राज्य के वन मंत्री राजीव बनर्जी सरीखे तृणमूल नेताओं ने पार्टी पदाधिकारियों के हाथों हो रहे भ्रष्टाचार की सार्वजनिक भर्त्सना की. परिवहन मंत्री सुवेंदु अधिकारी ने ईस्ट मिदनापुर में 200 कार्यकर्ताओं को भ्रष्टाचार के लिए नोटिस भेजे और 18 को मुअत्तल कर दिया. वामपंथी नेता कार्रवाइयों को खारिज करते हुए जिले में दर्ज 7,500 पुलिस शिकायतों की तरफ इशारा करते हैं.

राज्य के एक आपदा प्रबंधन अधिकारी बताते हैं कि पुलिस की ओर से दी गई 40,000 में से 34,000 शिकायतें सच पाई गईं. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष सवाल करते हैं, ''ये वे लोग हैं जो पुलिस में शिकायत दर्ज करवा पाए. उन लोगों का क्या जिन्हें पुलिस उल्टे पांव लौटा रही है?'' विपक्षी नेताओं की गहमागहमी और दबाव बढ़ा तो ममता ने 24 जून को सर्वदलीय बैठक बुलाई और उन्हें तूफान राहत में गड़बडिय़ों को दुरुस्त करने के लिए तूफान निगरानी समिति में शामिल होने का न्यौता दिया. तृणमूल प्रवक्ता पार्थ चटर्जी बताते हैं, ''हमने 76 लोगों को नोटिस दिए और जमीनी स्तर के कई भ्रष्ट नेताओं को निलंबित कर दिया. भ्रष्टाचार में ममता बनर्जी किसी को नहीं बक्चशतीं.''

ममता ने 16 जुलाई को दावा किया कि लाभार्थियों की सूची में हड़बड़ी की वजह से भी गलतियां हुईं और 50 फीसद से ज्यादा शिकायतें सुधार ली गई हैं. यह बात पुश्ते पर रह रहे बैनारा गांव के उन 2,000 ग्रामीणों को बताने का जतन कीजिए, जिनके घर लौट पाने की उम्मीद न के बराबर है. तृणमूल पंचायत सदस्य संतू सरदार स्वीकारते हैं कि पंचायत के मातहत 11 में से सात ग्रामसभाओं में मुआवजा बंट चुका है और जो छूट गए हैं उन्हें जल्द कुछ मिलता नहीं दिखता. वे कहते हैं: ''हमारे जिले में राहत की रकम खत्म हो चुकी है—मैं यही सुन रहा हूं.''

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