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खुशी की तलाशः शिक्षक बना डिजिटल सेतु

एक गणित शिक्षक ने 10,000 वीडियो लेक्चर बनाने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी—ये वीडियो राजस्थान के 35 लाख स्कूली छात्रों को मुफ्त में उपलब्ध.

रोल मॉडल जिनेंदर सोनी जयपुर में बच्चों को पढ़ाते हुए खुशी का मंत्र रोल मॉडल जिनेंदर सोनी जयपुर में बच्चों को पढ़ाते हुए खुशी का मंत्र

जिनेंदर सोनी, 35 वर्ष संस्थापक, मिशन ज्ञान

जयपुर

जिससे मिलती है मुझे खुशी

अमित मिश्र, गायक

‘‘बाइक की सवारी, संगीत, जैम सेशन और स्टुडियो में टीम के दूसरे साथियों के साथ काम करना—यही सब वे चीजें हैं जो मुझे खुशी देती हैं’’

राजस्थान के झुंझुनूं जिले में सरकारी स्कूल के छात्रों को मुफ्त में वीडियो लेक्चर की सुविधा देने के लिए एक लोकप्रिय ऑनलाइन कोचिंग अकादमी में गणित शिक्षक रहे जिनेंदर सोनी ने 2019 में अपनी पांच लाख रुपए की नौकरी छोड़ दी.

उनकी इस कोशिश में जिले के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर लैब की बेहतर उपलब्धता मददगार बनी. पिछले साल कोविड लॉकडाउन ने राजस्थान सरकार को छात्रों के लिए डिजिटल शिक्षा का तत्काल विस्तार करने के लिए प्रेरित किया और इसमें सोनी का ऑनलाइन शिक्षा का उपक्रम बहुत काम आया.

सोनी ने खुद के पैसों के अलावा सीएम मूंदड़ा मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट, केयर्न फाउंडेशन और पदम इंटीरियर्स तथा कलर्स स्विचेज जैसे कॉर्पोरेट के अलावा क्राउड-फंडिंग की मदद से इन लेक्चरों को तैयार करने में आए लगभग आठ लाख रुपए का मासिक खर्च उठाते हुए 40 शिक्षकों की टीम के साथ राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की उच्चतर कक्षाओं के पाठ्यक्रम पर आधारित पहला सेट तैयार किया.

सोनी के काम से प्रभावित मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में राज्य सरकार ने तुरंत फैसला किया कि सरकारी अध्यापकों को ऑनलाइन शिक्षण का प्रशिक्षण मुहैया किया जाए. सरकार का ध्यान ऐसे शिक्षकों को खोजने पर था जो सरकारी स्कूल की कक्षाओं की जरूरतों को समझते थे और जरूरत पड़ने पर छात्रों को घरेलू माहौल देने के लिए स्थानीय बोलियों का उपयोग कर सकते थे. राज्य सरकार की अपील पर 2,000 से ज्यादा शिक्षकों ने अपने वीडियो क्लिप भेजे, जिनमें से 100 को पाठ्यक्रम पर आधारित व्याख्यान आयोजित करने के लिए चुना गया.

शुरुआत में कक्षा 6 से 12 के लिए हिंदी माध्यम में और फिर कक्षा 3 से 8 तक के लिए अंग्रेजी माध्यम में व्याख्यान तैयार किए गए. अब शेष कक्षाओं के पाठ्यक्रम का काम अंतिम चरण में है. इस अभियान में संस्कृत, उर्दू और सिंधी आदि वैकल्पिक भाषाओं सहित सभी विषयों को शामिल किया गया है. इन व्याख्यानों को विभिन्न तरीकों से हासिल किया जा सकता है:

यूट्यूब, गूगल प्लेस्टोर पर उपलब्ध सोनी के 'मिशन ज्ञान’ के मोबाइल ऐप और मिशन ज्ञान कार्यालयों में उपलब्ध वेबलिंक के माध्यम से इन्हें देखा जा सकता है. कोई भी व्यक्ति कार्यालय से हार्ड डिस्क पर संपूर्ण पाठ्यक्रम प्राप्त कर सकता है. राज्य सरकार ने ऑनलाइन नामांकित लगभग 80 लाख छात्रों में से 35 लाख को ये वीडियो पाठ्यक्रम वितरित करने के अलावा राज्य के 1,000 स्कूलों में ऑफलाइन सामग्री भेजी है.

इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले सरकारी स्कूलों के शिक्षक शुरू में कैमरे के सामने झिझकते थे. सोनी ने उन्हें हस्तलिखित नोट्स तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया, जिन्हें स्लाइड में बदल दिया गया ताकि शिक्षकों को नोट्स देखे बिना व्याख्यान देने का अभ्यास कराया जा सके. सोनी ने उन्हें वास्तविक कक्षा जैसा वातावरण बनाकर व्याख्यान देने के लिए कहा. वे कहते हैं, ''शिक्षकों को पता है कि छात्र किस तरह के प्रश्न पूछते हैं. इसलिए वे इस काम को अच्छी तरह से कर लेते हैं.’’ 

पहले अपनी अकादमी चला चुके सोनी कहते हैं कि वे सरकारी स्कूल के शिक्षकों की क्षमता और कड़ी मेहनत से प्रभावित हैं. सोनी उनकी तारीफ करते हुए बताते हैं, ''उनमें से कुछ शुरू में झिझक रहे थे लेकिन हमारी प्रेरणा ने मदद की. अब उन्हें राज्य भर में इतना वीडियो प्रचार मिल गया है कि निजी कोचिंगों में भी उनकी मांग हो रही है.’’

इस पहल से राजस्थान की शिक्षा प्रणाली को खासा लाभ हुआ है. क्लासरूम में पढ़ाई को मानकीकृत करने के अलावा, यह सुविधा उन मामलों में विशेष रूप से सहायक रही है जहां किसी विशेष विषय के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं. कुछ स्कूलों ने उन विषयों में व्याख्यान चलाने के लिए एलईडी स्क्रीन खरीदी हैं जिनके शिक्षक उनके पास नहीं हैं.

सोनी के व्याख्यान चलाने के लिए ज्यादातर स्कूल एलईडी स्क्रीन का विकल्प चुन रहे हैं क्योंकि ये प्रोजेक्टर की तुलना में अधिक किफायती हैं. डिजिटल शिक्षा के परिणामों से उत्साहित राजस्थान सरकार अब राज्य के हर स्कूल में 'स्मार्ट क्लासरूम’ बनाने की योजना बना रही है.

राजस्थान में प्राथमिक शिक्षा के पूर्व निदेशक सौरभ स्वामी का कहना है कि वीडियो सामग्री ने बार-बार हुए कोविड लॉकडाउन के दौरान सरकारी स्कूल के शिक्षकों को अपने छात्रों से जुड़े रहने में मदद की है. इस प्रयास में छात्रों के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए छोटे-छोटे समूह भी बनाए जाते थे.

उनके मुताबिक, सरकार ने शिक्षकों को यह भी निर्देश दिया है कि वे स्कूलों के बंद रहने के दौरान छात्रों के पास व्यक्तिगत रूप से जाकर उनकी प्रगति की निगरानी करें ताकि सीखने की प्रक्रिया बाधित न हो. लैपटॉप और स्मार्टफोन से लैस शिक्षकों ने गांवों और कस्बों में जाकर छात्रों के छोटे-छोटे समूहों से मुलाकात की. जून से अब तक, मिशन ज्ञान की साप्ताहिक क्विज में 22 लाख छात्रों ने भाग लिया है.

सोनी और उनकी टीम को हाल ही में प्रायोगिक कक्षाओं के लिए भी वीडियो सामग्री तैयार करने का काम सौंपा गया है. राज्य सरकार ने इन वीडियो लेक्चरों को सुरक्षित रखने के लिए अपने सर्वर पर 20 टीबी स्पेस उपलब्ध कराया है. सोनी के प्रयासों से राजस्थान में स्कूली शिक्षा में क्रांति की शुरुआत हो चुकी है.ठ्ठ
 
खुशी की तलाश: इंडिया टुडे तथा आरपीजी समूह का संयुक्त उद्यम है जो प्रसन्नता फैलाने वाली अनुकरणीय पहलकदमियों को रेखांकित करता है

'इन वंचित बच्चों के लिए काम करके मुझे बहुत अच्छा लगता है. मुझे पता चला कि हिंदी के बच्चों को मुफ्त ऑनलाइन शिक्षा नहीं मिल पा रही तो मैं उनके लिए वीडियो लेक्चर बनाने बैठ गया. एक समय तो हफ्ते भर के पैसे बचे थे पर तभी मदद आ पहुंची’’.

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