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गाढ़े वक्त की योजना

बीमा हर हाल में होना ही चाहिए ताकि आपके आश्रित अचानक आन पड़े मुश्किल वक्त में रुपए-पैसे की तंगी का सामना न करें

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बीमाः संकट से घिरने पर वित्तीय लक्ष्य हासिल बीमाः संकट से घिरने पर वित्तीय लक्ष्य हासिल

हममें से ज्यादातर लोग जानते हैं कि बीमा होना चाहिए, पर पॉलिसी खरीदना हमारी शीर्ष प्राथमिकता नहीं होता. हादसा, कार को नुक्सान, बीमारी या मौत, इन सबके बारे में सोचना कतई अच्छा नहीं लगता और इसीलिए इनसे निपटने के लिए सही किस्म का बीमा लेने का काम टलता रहता है. मगर बीमा लेने के बारे में टाल-मटोल का नतीजा यह निकलता है कि अचानक मुश्किल आन पड़ने पर भारी वित्तीय और भावनात्मक उथल-पुथल से गुजरना पड़ सकता है.

यही नहीं, यह आपातस्थितियों या घर के डाउन पेमेंट या गर्मियों में परिवार को छुट्टियों पर ले जाने सरीखे दूसरे मकसदों से भी, जिनकी योजना बनाना कहीं ज्यादा दिलचस्प लगता है, बिल्कुल अलग है. जहां जीवन बीमा की पैठ 4 फीसद से भी कम और स्वास्थ्य, दुर्घटना तथा संपत्तियों के बीमे की पैठ उससे भी कम है, ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने बीमा नहीं करवाया है. यहां तक कि जिन्होंने किसी न किसी किस्म बीमा करवाया भी है, वे उसमें भी कंजूसी या किफायत बरतते हैं. होता यह है कि लोग बहुत कम रकम का बीमा करवाते हैं, जिससे उनके वित्तीय मनसूबे कभी भी धराशायी हो सकते हैं.

बीमा कहां जरूरी है?
बीमे के मतलब अप्रत्याशित स्थितियों के लिए तैयार रहना है. इसकी बदौलत आप संकट से घिरने पर भी अपने वित्तीय लक्ष्य हासिल कर सकते हैं. बीमे की प्राथमिक भूमिका यह पक्का करना है कि संकट आने पर आपकी सारी बचत जेब से न निकल जाए या रुपए-पैसे से पूरी होने वाली इच्छाओं को तिलांजलि न देना पड़े. आप दुर्घटना में घायल हो जाएं, बीमार पड़ जाएं या कोई अंग खो बैठें, या जान चली जाए, तो बीमा आपके प्रियजनों महफूज रख सकता है. फिर जिन्होंने बीमा नहीं करवा रखा है, उनके लिए कुछ निश्चित हालात के भारी वित्तीय नतीजे हो सकते हैं. लिहाजा अपनी माली हालत को ध्यान में रखकर कोई न कोई बीमा लेना बेहद जरूरी है इसीलिए निवेश के बारे में गंभीरता से सोचने से पहले बीमा करवाने की सिफारिश की जाती है.

कोई भी योजना बनाने के लिए निश्चित वक्त में हासिल किए जाने वाले मकसद तय किए जाते हैं. मगर हर वित्तीय योजना के साथ कुछ जोखिम जुड़े होते हैं, जो पूरी योजना को पटरी से उतार सकते हैं. बीमा यहीं काम आता है. बीमा रुपए-पैसे की मुश्किलों के बीच रास्ता निकालना आसान बना देता है. हर जरूरत के हिसाब से कई किस्म के बीमे होते हैं, पर आपको बाजार में मौजूद हर तरह के बीमे की जरूरत नहीं होती. मसलन, स्वास्थ्य बीमा सभी को लेना चाहिए पर कार इंश्योरेंस केवल उन्हें ही लेना चाहिए जिनके पास कार है (देखें: 5 अनिवार्य किस्म के बीमे).

बीमा जोखिम को संभालने का तरीका है. मसलन, जब आप बीमा लेते हैं तो संभावित नुक्सान की कीमत एक शुल्क के बदले बीमा कंपनी को सौंप देते हैं. इस शुल्क को प्रीमियम कहते हैं. अगर आपको लगता है कि आपको बीमा की जरूरत नहीं है तो खुद से पूछिए कि क्या आप अपनी हिफाजत के लिए रुपए-पैसे से सक्षम और तैयार हैं. अगर नहीं हैं या पूरी तरह नहीं हैं तो बीमा करवाइए. आपको पता है कि कितनी रकम का बीमा करवाना है और किन-किन चीजों की हिफाजत के लिए करवाना है, तो कोई भी पॉलिसी अच्छी है, फिर उसका इस्तेमाल कभी हो या न हो.

दरअसल बीमा ऐसा दांव है जिसे आप जिंदगी में हारना चाहेंगे, भले ही प्रीमियम के तौर पर अदा की गई रकम गंवानी पड़े. मगर अपने वित्तीय सहारे के लिए एक न एक पॉलिसी लेकर आप अपने वित्तीय लक्ष्यों की हिफाजत कर सकते हैं.

एक बार का काम नहीं
बीमे की जरूरत तेजी से बदलती रहती है. कम से कम जिंदगी के अलग-अलग पड़ावों पर या भिन्न-भिन्न हालात में तो बदल ही जाती है. किसी एक बीमा प्लान पर टिके रहना वित्तीय योजना का बेहद जरूरी हिस्सा है, पर मौजूदा बीमा कवर की हर साल समीक्षा करके उसमें जरूरी हेर-फेर करते रहना चाहिए. मसलन, अगर आपका कर्ज कम हो रहा है तो ऊंची रकम का जीवन बीमा लेने की जरूरत नहीं है. इसी तरह अगर आपने कार बेच दी है तो कार की पॉलिसी बंद कर सकते हैं.

ऐसा भी वक्त आ सकता है जब किसी एक पॉलिसी का आपका बुनियादी इरादा मौजूदा लक्ष्यों को देखते हुए वाजिब न रह गया हो. मसलन, आपने होम लोन चुका दिया, तो कर्ज को कवर करने वाली जीवन बीमा पॉलिसी बेकार हो जाएगी. नई पॉलिसियां काफी अभिनव तरीकों से बनाई जा रही हैं जो आपको कुछ मौजूदा पॉलिसियों के विकल्प देती हैं.

शादी, परिवार में नए सदस्य का आना, नियोक्ता की तरफ से दिए गए बीमे में बदलाव, सेवानिवृत्ति और वित्तीय योजनाओं पर असर डालने वाले दूसरे अहम घटनाक्रमों सरीखी जिंदगी को बदल देने वाली घटनाओं की रोशनी में भी बीमे की जरूरतों पर पुनर्विचार करना होता है. 

बीमा एक और अहम काम यह करता है कि आपको मन की शांति देता है. कोई भी रकम आपकी जिंदगी और मौत की जगह नहीं ले सकती, पर आप यह सोचकर निश्चिंत रह सकते हैं कि अगर आपको कुछ हुआ तो बीमा आपके परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगा.

दुखद यह है कि बीमे को अक्सर गलत समझा जाता है. जब बीमा लें तो कुछ वक्त उसके नियम और शर्तों, पॉलिसी से मिलने वाले कवरेज पर गौर करने में लगाएं. पॉलिसी की खास बातों को समझें और यह भी कि वे कब अमल में आएंगी. अच्छी तरह सोच-समझकर लिया गया बीमा ठोस वित्तीय योजना का प्रमुख स्तंभ होता है. 

5 अनिवार्य किस्म के बीमे
पांच प्रकार के बेहद जरूरी बीमे हैं—स्वास्थ्य, जीवन, मोटर, घर और असमर्थता

स्वास्थ्य बीमा: स्वास्थ्य बीमा अक्सर नियोक्ता करवाते हैं और यह आपको अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आने पर प्रत्याशित और अप्रत्याशित चिकित्सा खर्चों से महफूज रखता है. नियोक्ता के स्वास्थ्य बीमे पर निर्भर रहने के बजाय अपना निजी स्वास्थ्य बीमा करवाने के सलाह दी जाती है. पॉलिसी पर लिया जाने वाला प्रीमियम कवरेज, उम्र और मौजूदा सेहत पर निर्भर करता है.

जीवन बीमा: इसका भुगतान मृत्यु होने पर मिलता है और यह लाभार्थियों यानी जीवित जीवनसाथी, आश्रितों या बच्चों को जीवन के खर्चों के इंतजाम के लिए धन मुहैया करता है. इससे बकाया कर्ज भी निपटाए जा सकते हैं और मृत्यु से प्रभावित होने वाले वित्तीय मकसदों को भी पूरा किया जा सकता है. जीवन बीमा की लागत अलग-अलग हैं, जो उम्र, सेहत, पुरुष या स्त्री और कवरेज के प्रकार पर निर्भर करती हैं.

मोटर बीमा: आपके पास कार या बाइक हो तो मोटर बीमा करवाना अनिवार्य है. इसमें तीसरे पक्ष की जिम्मेदारी से जुड़ा दुर्घटना जोखिम भी शामिल होता है. पॉलिसी आपके और बीमा कंपनी के बीच अनुबंध समझौता होती है, जो चोरी या दुर्घटना के कारण हुए नुक्सान से उत्पन्न वित्तीय हानि से सुरक्षा देती है. मोटर बीमा की लागत, वाहन की कीमत और उस स्थान पर निर्भर करती है जहां ज्यादातर वह वाहन चलाया जाता है.

घर बीमा: घर मालिक का बीमा घर को आग, तोड़-फोड़ या चोरी सरीखे नुक्सान से जुड़ी आपदा से महफूज रखता है. पॉलिसी में भूकंप या बाढ़ सरीखी आफतों से पैदा नुक्सान अपने आप शामिल नहीं होता, पर अगर आपका घर संवेदनशील इलाके में है, तो आप इसकी संभावनाएं तलाश सकते हैं. घर बीमे की लागत अलग-अलग होती हैं, जो घर की कीमत और उसके भीतर रखी चीजों के मूल्य पर निर्भर करती है.

असमर्थता बीमा: अगर आप लंबी समयावधि तक काम नहीं कर पाते हैं, तो उस स्थिति में असमर्थता या अपंगता बीमा आपकी गंवाई गई आमदनी की कुछ फीसद भरपाई करता है. अपंगता या असमर्थता बीमा की लागतें अलग-अलग होती हैं, जो उम्र, स्वास्थ्य और बीमित पेशे सरीखे कारकों पर निर्भर करती हैं.

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