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पर्यटनः फिर जमने लगे कदम

कोविड से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में से एक रहा है पर्यटन. लेकिन यह एक बार फिर पटरी पर आने लगा है. इंडिया टुडे टुरिज्म सर्वे ऐंड अवार्ड्स 2021 ने इस उद्योग को नए सिरे से खड़ा करने के लिए राज्यों की भूमिका को सराहा

कामयाब: इंडिया टुडे टुरिज्म सर्वे ऐंड अवार्ड्स 2021 के विजेता कामयाब: इंडिया टुडे टुरिज्म सर्वे ऐंड अवार्ड्स 2021 के विजेता

शैली आनंद

सफर न केवल आदमी का दिल-दिमाग खोल देता है बल्कि जगह और गति में बदलाव से उसकी जिंदगी में एक नई ऊर्जा, नई ताकत भरी जा सकती है. महामारी, लॉकडाउन और प्रतिबंधों की बात कुछ हद तक पुरानी पड़ने और बड़े पैमाने पर टीकाकरण मुहिम चलाए जाने की वजह से पर्यटन क्षेत्र धीरे-धीरे खुल रहा है. लोगों में नई चीजों और जगहों का अनुभव लेने के प्रति उम्मीदें फिर बढऩे लगी हैं.

भारत की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका है—दोनों का उद्धार एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है. यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें चार करोड़ से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रोजगार पाते हैं. यह राजस्व में 200 अरब डॉलर (14.87 लाख करोड़ रु.) का योगदान करता है और हमारे जीडीपी को बढ़ाता है. इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (आइबीईएफ) के मुताबिक, भारत में पर्यटन क्षेत्र 2029 तक 6.7 फीसद की दर से बढ़ने वाला है, जो कुल अर्थव्यवस्था का 9.2 है; और 2028 तक अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का आगमन 3.05 करोड़ तक पहुंच जाने की संभावना है. लेकिन महामारी के लंबे चले दौर के बाद घरेलू पर्यटक ही इस वृद्धि में इजाफा करेंगे.

इसी सकारात्मक नजरिए के मद्देनजर और देश के विभिन्न पहलुओं, संस्कृति, इतिहास और इलाकों की पहचान कर उनका गुणगान करने के लिए नई दिल्ली में 12 नवंबर को इंडिया टुडे टुरिज्म ऐंड अवार्ड्स 2021 का आयोजन किया गया. इसमें विशेषज्ञों और भागीदारों ने यात्रा और पर्यटन क्षेत्र के विकास पर बहस और परिचर्चा की. उन्होंने इस पर भी बात की कि मांग बढ़ाने के लिए आखिर किस तरह के बदलाव किए जाने की जरूरत है. इस कार्यक्रम के पैनल में शामिल विशेषज्ञों ने बताया कि आने वाले समय में यात्रा किस तरह की होगी; महामारी के बाद अब सैलानी के पास किस तरह पहले से ज्यादा जानकारी है और वह किस तरह ज्यादा परिष्कृत है. इस कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री जी. किशन रेड्डी ने पुरस्कार भी वितरित किए

पर्यटनः फिर जमने लगे कदम
पर्यटनः फिर जमने लगे कदम

इंडिया टुडे के ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर (पब्लिशिंग) राज चेंगप्पा ने अपने उद्घाटन भाषण में इस तथ्य पर विचार पेश किया कि यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब पर्यटन लंबी और बेहद काली रात से उबर रहा है, जो करीब डेढ़ साल तक रही. उन्होंने कहा कि छुट्टियों के दौरान सैर करने का रुझान अब तेजी से बढ़ रहा है और 2022 इस उद्योग के लिए एक तरह से उफान का वर्ष हो सकता है, खासकर घरेलू पर्यटन के लिए, जो इस क्षेत्र की कमाई में 90 फीसद का योगदान करता है. लिहाजा, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है, यह समय, ''वोकल फॉर लोकल'' के लिए आगे बढ़ने का है और 'देखो अपना देश' कार्यक्रम का हिस्सा बनने का है, जिसे उन्होंने महामारी से ऐन पहले शुरू किया था.

घरेलू पर्यटन को प्रोत्साहन

केंद्रीय मंत्री रेड्डी ने ''घरेलू पर्यटन और महामारी के बाद की दुनिया में विकास के लिए अगले बड़े कदम'' पर अपने बीज भाषण में कहा कि पर्यटन उन क्षेत्रों में शामिल है जिन्हें महामारी के दौरा सबसे ज्यादा झटका लगा. उन्होंने पर्यटन को प्रोत्साहन देने और इस तरह के गंभीर और चुनौतीपूर्ण समय में राज्यों की ओर से किए गए काम की पहचान करने के लिए इंडिया टुडे ग्रुप को धन्यवाद दिया. उन्होंने टीकाकरण—100 करोड़ वैक्सीन शॉट लगने—के क्षेत्र में भारत की शानदार उपलब्धि के बारे में भी बताया और यह भी कि किस तरह इसने लोगों में अपने घरों से बाहर निकलकर एक बार फिर पर्यटन स्थलों की सैर करने के लिए भरोसा जगाया है. उन्होंने कहा, ''यह भारतीय लोकतंत्र और सहकारी संघीय व्यवस्था की बड़ी जीत है.''

उन्होंने बताया कि 2022 भारत के लिए पर्यटन वर्ष होगा. उन्होंने करीब 30 संग्रहालयों को खोलने की सरकार की योजना के बारे में बताया; यह भी कि किस तरह विभिन्न सरकरी विभाग अगले साल पर्यटन क्षेत्र की मदद करेंगे. उन्होंने कहा, ''हमने इस बात पर चर्चा की है कि विस्तृत पर्यटन नीति होनी चाहिए. हमने भागीदारों, टुअर ऑपरेटरों और होटलों से बात की है, और विभिन्न राज्य सरकारों से उनकी सलाह मांगी.''

केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि महामारी के मद्देनजर उन्होंने कर्ज के जरिए टुअर ऑपरेटरों को वित्तीय मदद मुहैया कराने के लिए काम शुरू कर दिया है. उन्होंने जानकारी दी कि सरकार ने फैसला किया है, भारत आने वाले पहले पांच लाख अंतरराष्ट्रीय सैलानियों से कोई पर्यटन शुल्क नहीं लिया जाएगा. रेड्डी ने बताया, ''हमने 70 देशों से आने वाले सैलानियों के लिए भी ई-वीजा प्रोग्राम शुरू कर दिया है.''

पर्यटनः फिर जमने लगे कदम
पर्यटनः फिर जमने लगे कदम

वोकल फॉर लोकल

'देखो अपना देश—राज्य किस तरह पर्यटन के पुनरुद्धार का नेतृत्व कर रहे हैं', शीर्षक वाले सत्र में इस बात का जिक्र किया गया कि राज्यों ने कोरोना वायरस से लड़ने में अहम भूमिका निभाई है और वे पर्यटन उद्योग को अपने पैरों पर खड़ा करने की दिशा में काम कर रहे हैं. इस पैनल में तीन वक्ता थे—मिलिंद बोरीकर, निदेशक, पर्यटन निदेशालय, महाराष्ट्र पर्यटन; संजय कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव (पर्यटन), पंजाब पर्यटन; और संतोष कुमार मल्ल, पर्यटन सचिव, बिहार पर्यटन.

तीनों वक्ताओं ने ईको-फ्रेंड्ली या जिम्मेदार पर्यटन की जरूरत के बारे में बातचीत की और इस बात पर सहमति जताई कि लंबे अरसे में इस क्षेत्र के स्वास्थ्य के लिए पर्यावरण के अनुकूल रवैए के साथ ही नई जगहों की संभावनाओं का दोहन करने की जरूरत है. इसके लिए संजय कुमार ने सुझाव दिया कि राज्यों को ईको टूरिज्म को प्रोत्साहन देने के लिए सूखे कचरे और वाहनों की आवाजाही के मुद्दों पर ध्यान देना होगा. बोरीकर ने बताया कि नीति में बदलाव से महाराष्ट्र को कैसे मदद मिली है. मिसाल के तौर पर, होटल खोलने के लिए 100 अनुमतियों की संख्या घटाकर 70 कर दी गई हैं.

उन्होंने बताया कि युवाओं को आकर्षित करने के लिए राज्य एडवेंचर टुरिज्म, शहरी सैलानियों के लिए कृषि पर्यटन पर ध्यान दे रहा है, और महामारी के बाद पर्यटन का स्वरूप बदलने के लिए अपने 400 किलों, समुद्रतटों और वन्यजीव वाले इलाकों को प्रोत्साहन देने पर खास ध्यान दे रहा है.

बड़ा बदलाव

डिजिटल क्रांति ने जीवन के सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया है और पर्यटन कोई अपवाद नहीं है. 'डिजिटल लैंडस्केप में घरेलू पर्यटन' नाम के सत्र के दौरान वक्ताओं ने बताया कि ऑफलाइन से ऑनलाइन के बीच कैसे बड़ा परिवर्तन हुआ है. डिजिटल सैलानी महामारी की देन हैं और अब पर्यटन में भौतिक और वर्चुअल अनुभव शामिल होंगे. पैनल में ध्रुव शृंगी, सीईओ, यात्रा.कॉम; रोहित कपूर, सीईओ, ओयो इंडिया और साउथ एशिया; और बाबू पणिक्कर, मैनेजिंग डायरेक्टर, पणिक्कर्स ट्रैवल शामिल थे. शृंगी ने इस क्षेत्र के उद्धार की चर्चा करते हुए कहा कि सामान्य यात्रा में पिछले तीन महीने में 30-40 फीसदी इजाफा हुआ है, जिससे यह महामारी से पहले के स्तर के करीब पहुंच गई है. घरेलू यात्रा लगभग पटरी पर आ चुकी है, और हालांकि बिजनेस ट्रैवल फिलहाल कुछ शांत है लेकिन अगले साल के शुरू में इसमें तेजी आनी चाहिए.

कपूर ने कहा कि महामारी के बाद का सैलानी साफ-सफाई और आरोग्य व्यवस्था को लेकर खासा फिक्रमंद है और होटलों को कॉन्टैक्टलेस चेक-इन व्यवस्था कायम करने की जरूरत है. उन्होंने उत्सर्जन कम करने और पर्यटन केंद्रों को खुद बदलने की जरूरत के बारे में भी बात की. उन्होंने यह भी कहा कि महामारी के बाद 'कहीं से भी काम' करने की अवधारणा के जोर पकड़ने से लोग अक्सर कम समय की छुट्टी लेंगे, एक साल में शायद मुश्किल से आठ या 10 बार. पणिक्कर के मुताबिक, भूतल परिवहन के कारोबार में होने की वजह से पिछले 18 महीनों में महामारी से वे प्रभावित हुए हैं और उन्हें अब भी यह देखना है कि वे इस नुक्सान की भरपाई आखिर कैसे करेंगे.

पुरस्कार और प्रशंसा

इस सम्मेलन का समापन केंद्रीय मंत्री रेड्डी के हाथों विजेता राज्यों के प्रतिनिधियों को इंडिया टुडे टुरिज्म अवार्ड्स देने के साथ हुआ. विजेताओं का चयन करने के लिए देशव्यापी सर्वेक्षण किया गया था. विभिन्न श्रेणियों के पर्यटन केंद्रों को एक मल्टीमीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रचारित किया गया और पाठकों से अपना वोट डालने के लिए कहा गया. उसके बाद आइपीएसओएस ने नतीजों को जमा किया, और आखिरकार उसी ने अंतिम नतीजा निकालने के लिए ऑन-ग्राउंड सर्वेक्षण भी‌ किया.

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