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पश्चिम बंगालः नेताओं की होड़

बाबुल सुप्रियो को राज्य भाजपा के सीएए-समर्थक अभियान के नेता के रूप में पेश किया जा रहा

समीर जन/गेट्टी इमेजेज समीर जन/गेट्टी इमेजेज

केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो पश्चिम बंगाल में सुर्खियों में बने रहते हैं. दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में सुप्रियो ने इस विवाद को तब और हवा दे दी जब जादवपुर विश्वविद्यालय की एक स्नातक छात्रा ने दीक्षांत समारोह में मंच से नागरिकता (संशोधन) कानून (सीएए) की एक प्रति फाड़कर अपना विरोध जताया. सुप्रियो ने सोशल मीडिया पर उस छात्रा की आलोचना की; उसके बाद छात्रों ने सुप्रियो पर सवालों की बौछार कर दी. मुस्तफिजुर रहमान नाम के एक व्यक्ति को जवाब देते हुए, सुप्रियो ने लिखा कि वे रहमान के सवालों का जवाब रहमान को वापस 'उनके देश भेजे जाने के बाद देंगे.'

सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य में पार्टी के सीएए समर्थक अभियान का नेतृत्व करने के लिए सुप्रियो को चुना है. भाजपा के एक नेता ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए कहा, ''हमें यह बताने की जरूरत है कि हम सीएए को लागू कराने के लिए आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहे हैं और इसे लागू कराके रहेंगे. बाबुल हिंदी और बाग्ला, दोनों बोलने में निपुण हैं और उनके साथ स्टार अपील भी है. फिर इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उनसे बेहतर चेहरा कौन हो सकता है?'' अभियान के तहत शाह सहित छह केंद्रीय मंत्री घर-घर जाकर इस मुद्दे पर लोगों से बात करेंगे. हालांकि, सुप्रियो और राज्य भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष के बीच के आपसी मतभेद को देखते हुए दबी जुबान ऐसा कहा जा रहा है कि सुप्रियो के सुॢखयों में रहने से भाजपा की राज्य इकाई चौकन्नी हो गई है.

घोष स्वयं अपनी आक्रामकता के कारण विवादों में रहते हैं. 13 जनवरी को राणाघाट में एक रैली को संबोधित करते हुए सीएए विरोधी प्रदर्शनों में सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करने की कोशिशों पर प्रतिक्रिया देते हुए घोष ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भाजपाशासित कुछ राज्य सरकारों की कार्रवाई की प्रशंसा की. घोष ने कहा, ''असम, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक को देख लें. हमारी सरकारों ने उन शैतानों को गोली मार दी. वे कुत्तों की तरह मारे गए.''

उन्होंने कहा कि राज्य में सार्वजनिक संपत्ति को नुक्सान पहुंचाने वालों को भी ''उसी तरह गोली मारी जाएगी.'' इसकी वजह से सुप्रियो ने घोष की टिप्पणियों को भाजपा की राय मानने से इनकार करते हुए उस बयान से दूरी बना ली. ट्विटर पर सुप्रियो ने लिखा कि ''दिलीप दा ने अगर ऐसा कहा है तो यह बहुत गैरजिम्मेदाराना बात है.'' इस पर प्रतिक्रिया देते हुए घोष कहते हैं, ''इस तरह के मतभेद और व्यक्तिगत राय हर पार्टी में आम हैं और इसमें कोई हर्ज भी नहीं है.''

राज्य के नेता इस बात पर भी जोर देते हैं कि भाजपा की असली ताकत उसके कार्यकर्ताओं में है. भाजपा नेता दिप्तिमान सेनगुप्ता कहते हैं, ''80,000 से अधिक कार्यशालाएं आयोजित कर भाजपा कार्यकर्ताओं और संबद्ध समूहों को प्रशिक्षित किया गया है कि वे कैसे घरों से संपर्क करें और सीएए के लिए पंजीकरण सुनिश्चित कराएं.'' राज्य के एक भाजपा महासचिव बताते हैं कि जहां हिंदुओं को बताया जाएगा कि यह उनके अस्तित्व की लड़ाई है, वहीं मुसलमानों को बताया जाएगा, ''यह साबित करना उनकी जिम्मेदारी है कि वे भारत के ही नागरिक हैं.

अगर वे हमें अपने घरों के गेट पर ही रोक देते हैं, तो इसका मतलब है कि कुछ तो ऐसा है जिसे वे छिपा रहे हैं.'' पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजूमदार कहते हैं, ''हम इस गलतफहमी को भी दूर करने की कोशिश करेंगे कि सीएए भेदभावपूर्ण है और यह हिंदुओं तथा मुसलमानों के बीच अंतर करता है. मुस्लिम नागरिकों को चिंता करने की कोई बात नहीं है. प्रधानमंत्री ने कहा है कि सीएए किसी को भी बाहर नहीं कर रहा है. सरकार तब तक किसी के भी प्रति कोई भेदभाव नहीं करेगी जब तक वे देश के नागरिक हैं.''

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