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तेलंगानाः रेड्डी परिवार में छिड़ी रार

तेलंगाना में शर्मिला के राजनैतिक अभियान को उनकी मां विजयम्मा का आशीर्वाद प्राप्त, मगर उनके भाई, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी सख्त खिलाफ

पिता की दुलारी हैदराबाद में वाइएसआरटीपी की पत्रकार वार्ता के दौरान दिवंगत वाइएसआर को श्रद्घांजलि देतीं वाइ.एस. शर्मिला पिता की दुलारी हैदराबाद में वाइएसआरटीपी की पत्रकार वार्ता के दौरान दिवंगत वाइएसआर को श्रद्घांजलि देतीं वाइ.एस. शर्मिला

अविभाजित आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाइ.एस. राजशेखर रेड्डी की 2 सितंबर को 12वीं पुण्यतिथि पर उनकी पत्नी विजयम्मा ने हैदराबाद में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया, जो अब तेलंगाना की राजधानी है. हालांकि वाइएसआर के बेटे तथा आंध्र प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री वाइ.एस. जगनमोहन रेड्डी उससे दूर रहे, जिससे रेड्डी परिवार में कलह की अटकलों की पुष्टि हो गई. दरअसल, जगन बहन वाइ.एस. शर्मिला के तेलंगाना में अपने पिता से 'प्रेरित' नई राजनैतिक पार्टी शुरू करने के फैसले के खिलाफ हैं, क्योंकि यह उनकी युवजन श्रमिक रायतु कांग्रेस (वाइएसआरसी) को टक्कर दे सकती है, जिसका बगल के तेलुगु भाषी राज्य में राज है.

विजयम्मा ने बेटी के साथ एकजुटता दिखाई है, शायद इसलिए कि उन्हें एहसास है कि दिवंगत वाइएसआर के प्रति अब भी उनके लोकलुभावन कल्याणकारी कार्यक्रमों के कारण तेलुगु भाषी लोगों के बड़े वर्ग में सहानुभूति है. शर्मिला की वाइएसआर तेलंगाना पार्टी (वाइएसआरटीपी) का उद्घाटन 8 जुलाई को वाइएसआर की जयंती पर किया गया था. जगन का मानना है कि तेलंगाना में शर्मिला की पार्टी के लिए उनकी मां का समर्थन जुटाना उनके लिए नुक्सानदेह होगा, खासकर जब दोनों राज्य कृष्णा और गोदावरी नदी के जल बंटवारे को लेकर आमने-सामने हैं.

उद्घाटन की धूमधाम और शर्मिला की कुछ रैलियों के अलावा, नई-नवेली वाइएसआरटीपी को ज्यादा तवज्जो नहीं मिली. उद्घाटन के अवसर पर मौजूद रहीं विजयम्मा वाइएसआरटीपी की जमीन तैयार करने के लिए अपने पति के पूर्व कैबिनेट सहयोगियों और अन्य शुभचिंतकों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही हैं, हालांकि श्रद्धांजलि सभा में कोई प्रभावशाली नेता नहीं आया.

लेकिन शर्मिला का हौसला बुलंद है. उन्होंने कहा, ''मैं तेलंगाना के लिए लड़ूंगी... मैं वाइएसआर की सच्ची अनुयायी बनूंगी और 'राजन्न राज्यम्' (वाइएसआर के स्वर्णिम शासन) को वापस लाऊंगी.'' दिवंगत वाइएसआर की 'संतुष्टि' रणनीति (कल्याणकारी कार्यक्रमों का समूह, जिसमें राज्य के हर परिवार को किसी न किसी योजना के तहत कवर किया गया था) ने तब लोगों को मोह लिया था. लोग उनके समर्थन में खड़े थे, बावजूद इसके कि वे जानते थे कि वाइएसआर अलग तेलंगाना राज्य के खिलाफ थे.

अब अपने पिता के लिए श्रद्धांजलि सभा आयोजित करके शर्मिला उनकी राजनैतिक विरासत का एक हिस्सा हथियाने की कोशिश कर रही हैं. वे कहती हैं कि मैं राज्य में मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के 'अत्याचार' से लड़ने के लिए दृढ़ हूं. जानकारों को इसमें संदेह है. राजनैतिक टिप्पणीकार के. नागेश्वर कहते हैं, ''वाइएसआर की कल्याणकारी नीतियों से उनके समर्थकों की तादाद बढ़ी थी. लेकिन राज्य के पुनर्गठन के बाद बदले हुए राजनैतिक संदर्भ में, शर्मिला का 'राजन्ना राज्यम्' का आख्यान तेलंगाना के नए राजनैतिक मुहावरे में असंगत हो सकता है. ऐसा मुख्य रूप से इसलिए है, क्योंकि वाइएसआर अलग तेलंगाना राज्य के खिलाफ थे.'' वे यह भी बताते हैं कि तेलंगाना में पहले ही राजनैतिक क्षेत्र में नेताओं का जमावड़ा है.

इस बीच, कांग्रेस भी घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुई है. पार्टी ने राज्य के नेताओं को श्रद्धांजलि बैठक में शामिल होने को लेकर आगाह कर दिया था. 2014 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए-दो सरकार के आंध्र प्रदेश को तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के रूप में पुनर्गठन के फैसले के बाद पार्टी को अपना अस्तित्व बचाने के लिए गंभीर संकट का सामना करना पड़ा, और बड़े पैमाने पर पार्टी के लोग जगन रेड्डी के वाइएसआरसी में चले गए. तेलंगाना में कई लोग सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति में चले गए. तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रचार समिति के अध्यक्ष, पूर्व कांग्रेस सांसद मधु यास्की बताते हैं, ''जगन और उनका परिवार कांग्रेस की डाल काटने की कोशिश कर रहा है, जिसने उन्हें राजनैतिक जीवन दिया.''

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