scorecardresearch
 

महंगाईः कमरतोड़ कीमतों से खस्ताहाली

चिंता की बात यह है कि महंगाई के मामले में बदतरीन स्थिति अभी गुजरी नहीं है. मसलन, विशेषज्ञों का पूर्वानुमान है कि अगले कुछ महीनों में थोक महंगाई 10 फीसद से ऊपर पहुंच सकती है

खर्च बढ़ा नई दिल्ली में फिरोज शाह कोटला स्टेडियम के पास पेट्रोल पंप पर दोपहिया वाहन खर्च बढ़ा नई दिल्ली में फिरोज शाह कोटला स्टेडियम के पास पेट्रोल पंप पर दोपहिया वाहन

बढ़ती महंगाई कई मुश्किलें पैदा करती है. खाने-पीने की चीजों और ईंधन की कीमतों में एक निश्चित सीमा से ज्यादा बढ़ोतरी से जनता में हाहाकार मच जाता है और सरकारें बैकफूट पर आ जाती हैं. स्टील और सीमेंट जैसी चीजों की महंगाई इनपुट के तौर पर इनका इस्तेमाल करने वाले उद्योगों को झटका देती है, मगर उनके निर्माता फायदे में रहते हैं.

मौजूदा संदर्भ में किसानों को खाने-पीने की चीजों के ऊंचे दामों का फायदा मिलना चाहिए था, पर वे खेती में लगने वाले सामान की तेज बढ़ती कीमतों से परेशान हैं. महंगाई की दर कहीं तय सीमा 6 फीसद से ऊपर न चली जाए, इस डर से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने ब्याज दरों में कटौती नहीं करने का फैसला करके उनकी तकलीफ और बढ़ा दी, क्योंकि इसका असर मूल्य वृद्धि पर पड़ता.

ईंधन की ऊंची लागत और निर्मित सामान की बढ़ती कीमतों ने थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआइ) पर आधारित महंगाई को मई में सालाना आधार पर 12.94 फीसद की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा दिया. (डब्ल्यूपीआइ से खुदरा बाजार में जाने से पहले चीजों के दामों में आए बदलाव का पता चलता है). यह ऊंचा आंकड़ा कुछ तो पिछले साल के 'निचले आधार प्रभाव' (पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में महंगाई के कमतर आंकड़े) के कारण है. पिछले साल मई में थोक महंगाई -3.37 फीसद थी.

कमरतोड़ कीमतो से खस्ताहाली
कमरतोड़ कीमतो से खस्ताहाली

खुदरा महंगाई दर या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआइ) अप्रैल के 4.28 फीसद के मुकाबले मई में बढ़कर 6.3 फीसद पर पहुंच गया. केयर रेटिंग्ज के एक नोट के मुताबिक, गौर करने वाली बात यह है कि थोक महंगाई की रफ्तार खुदरा महंगाई से ज्यादा है; मतलब कि अंतरराष्ट्रीय जिंसों के दामों में बढ़ोतरी का असर दिखाई दे रहा है.

खाद्य वस्तुओं की खुदरा महंगाई पिछले साल मई के 8.3 फीसद के मुकाबले इस मई में छह माह की रिकॉर्ड ऊंचाई 5.2 फीसद पर पहुंच गई. मांस, अंडे, दलहन और खाद्य तेल खास तौर पर महंगे हुए. खाद्य तेलों में मई में 30.8 फीसद की रिकॉर्ड महंगाई दर्ज की गई. यह अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के साथ हुई है, क्योंकि खाद्य तेलों के मामले में देश आयात पर निर्भर है. दिल्ली में एक लीटर सनफ्लावर तेल की कीमत 195 रु. है, जो पिछले साल मई में 128 रु. थी. फिर, दालें ज्यादा महंगी हुईं, सबसे ज्यादा दाम अरहर दाल के बढ़े, जो पिछले साल इसी अवधि के मुकाबले 15 फीसद ऊंचे हैं. इसकी वजह लॉकडाउन से आपूर्ति की रुकावटें और जमाखोरी मानी गई. मांस की कीमतें पिछले साल के मुकाबले 9 फीसद बढ़ीं, जबकि अंडों के दाम 15 फीसद बढ़े.

कमरतोड़ कीमतो से खस्ताहाली
कमरतोड़ कीमतो से खस्ताहाली

एक्यूट रेटिंग्ज ऐंड रिसर्च के चीफ एनैलिटिक अफसर सुमन चौधरी कहते हैं, ''खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी का सिलसिला अगले कुछ महीनों में लॉकडाउन में ढील और आपूर्ति की बाधाएं हटने से थम सकता है. महंगाई के मद में हम आरबीआइ से तत्काल कोई कदम उठाने की उम्मीद नहीं करते, क्योंकि जोर आर्थिक बहाली पर है.'' हालांकि वे यह भी कहते हैं कि सरकार को दीर्घावधिक जोखिम कम करने के लिए खाद्य वस्तुओं और ईंधन की महंगाई पर नियंत्रण के उपाय करने पड़ सकते हैं.

मई में पेट्रोल-डीजल के दाम 11.6 फीसद बढ़े, जो करीब नौ साल का ऊंचा स्तर है. 21 जून को मुंबई में पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमश: 103.36 रु. और 95.44 रु. प्रति लीटर थे, जबकि दिल्ली में इनके दाम क्रमश: 97.22 रु. और 87.97 रु. थे. पेट्रोल की खुदरा कीमत में केंद्र और राज्य के करों का हिस्सा 60 फीसद और डीजल में 54 फीसद से ज्यादा है. यह बढ़ोतरी भी कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी के साथ हुई, जो फिलहाल 70 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है. ईंधन के ऊंचे दामों की वजह से ढुलाई खर्च बढ़ा, जिससे महंगाई में इजाफा हुआ.

मैन्यूफैक्चर्ड सामान की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई. इनकी मुद्रास्फीति मई में छलांग लगाकर 10.8 फीसद पर जा पहुंची, जो अप्रैल में 9 फीसद थी और मई 2020 में इसमें 0.3 फीसद की कमी आई थी. स्टील सरीखे सामान बनाने वाली फर्मों को इससे मदद मिली, वहीं कच्चे माल के लिए उन पर निर्भर छोटी इकाइयों के लिए यह अच्छी खबर नहीं है. थोक मूल्य सूचकांक में 9.65 फीसद का भारांश रखने वाली बुनियादी धातुओं में इस महीने 27.6 फीसद की महंगाई दर्ज की गई.

चिंता की बात यह है कि महंगाई के मामले में बदतरीन स्थिति अभी गुजरी नहीं है. मसलन, विशेषज्ञों का पूर्वानुमान है कि अगले कुछ महीनों में थोक महंगाई 10 फीसद से ऊपर पहुंच सकती है. देश के लोगों के लिए यह अच्छी खबर नहीं है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें