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उत्तर प्रदेशः सहारनपुर से हिंदुत्व का संदेश

सहारनपुर और उसके आसपास के जिलों में जातिगत समीकरण साधना भाजपा के लिए काफी मुश्किल है. ऐसे में मुख्यमंत्री योगी हिंदुत्व का दांव खेलकर एक बार फिर हिंदू मतों के ध्रुवीकरण की कोशिशों में जुटे

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सहारनपुर के दारूल उलूम देवबंद परिसर में स्थित मस्जि‍द रशीद सहारनपुर के दारूल उलूम देवबंद परिसर में स्थित मस्जि‍द रशीद

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले सहारनपुर में देवबंद रेलवे स्टेशन के पास जिला उद्योग केंद्र की 2,000 वर्ग मीटर जमीन पर पुरानी इमारतों को जमीदोंज करने के काम ने तेजी पकड़ी है. देवबंद में इसी जमीन पर 50 करोड़ रुपए की लागत से 'ऐंटी टेररिस्ट स्क्वायड' (एटीएस) ट्रेनिंग सेंटर का निर्माण होगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4 जनवरी को पहली बार देवबंद पहुंचकर एटीएस सेंटर का शिलान्यास किया. दो वर्ष के भीतर बनकर तैयार होने वाले पश्चिमी यूपी के इस पहले एटीएस ट्रेनिंग सेंटर में 56 कमांडों हर वक्त तैनात रहेंगे और एक बार में 150 कमांडों को ट्रेनिंग दी जा सकेगी. पिछले वर्ष योगी सरकार ने सहारनपुर, मेरठ, अलीगढ़, बहराइच, कानपुर, मिर्जापुर समेत प्रदेश के 12 जिलों में एटीएस सेंटर खोलने की घोषणा की थी. सरकार की यह योजना सबसे पहले सहारनपुर के देवबंद में साकार होती दिखी. 

देवबंद के जड़ौदा जट इलाके में आयोजित शिलान्यास समारोह में योगी ने कहा, ''पूर्व की सरकारें आतंवादियों के मुकदमे वापस लेकर उन्हे आश्रय देती थी, अब प्रदेश की भाजपा सरकार आतंकवादियों को ठोकने के लिए देवबंद में कमांडो ट्रेनिंग सेंटर बना रही है.'' अपने 15 मिनट के भाषण में योगी ने पश्चिमी यूपी में अपराध, अपराधियों के खौफ से होने वाला पलायन और सांप्रदायिक दंगों के लिए पूर्व की सरकारों को जिम्मेदार ठहराया. वहीं, देवबंद की जमीन पर आतंकवाद पनपने का आरोप लगाकर योगी ने एटीएस सेंटर की स्थापना को तार्किक बताने की कोशि‍श की. 

देवबंद की पहचान यहां मुस्लिम शि‍क्षा के केंद्र दारुल उलूम, देवबंद से है जहां देश-विदेश के 20 हजार से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं. मुख्यमंत्री योगी ने एटीएस सेंटर के शिलान्यास के दौरान एक बार भी दारुल उलूम का नाम नहीं लिया, पर मंच के पीछे लगे बैनर पर लिखा नारा 'काम भी, लगाम भी' ने कई अटकलों को भी जन्म दिया. देवबंद में मजलिस-इत्तेहाद-ए-मिल्लत नाम से सामाजिक संस्था चलाने वाले मुफ्ती तारिक काजमी बताते हैं, ''देवबंद में एटीएस सेंटर की स्थापना कर योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा के लिए महशूर इस इलाके को आतंकवाद से जोडऩे की कोशि‍श की है. देवबंद का मुस्लि‍म समाज योगी की मंशा को समझ रहा है इसलिए वह इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं कर रहा. मंच पर लिखे नारे 'काम भी, लगाम भी' के जरिए योगी ने अपरोक्ष रूप से यह बताने की कोशिश की है कि उन्होंने मुस्लिमों पर लगाम लगाई है.

यह देवबंद का माहौल खराब करने की कोशि‍श भी है.'' असल में वक्त-वक्त पर देश में पकड़े गए आतंकियों के देवबंद और सहारनपुर से जुड़ाव निकलता रहा है. 2019 में एटीएस ने देवबंद के छात्रावास से कश्मीर के दो युवकों को आतंकी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया था. 2013 में नेपाल बार्डर से पकड़े गए आतंकी यासीन भटकल का भी सहारनपुर से कनेक्शन निकला था. देवबंद में इस्लामिया इंटर कॉलेज के पूर्व प्राचार्य शमीम मुर्तजा फारूखी कहते हैं, ''सरकार यह साबित नहीं कर पाई है कि देवबंद की जमीन का उपयोग आतंकी गतिविधियों के लिए हो रहा है. विधानसभा चुनाव से पहले एटीएस सेंटर की स्थापना करके योगी आदित्यनाथ ने हिंदुत्व एजेंडे को ही मजबूत करने की कोशि‍श की है क्योंकि सरकार के पास जनता को बताने के लिए कोई कार्य नहीं है.''

देवबंद की चुनौती

आजादी के बाद पहली बार 2017 में भाजपा ने देवबंद विधानसभा सीट जीती थी. यहां से बृजेश सिंह चुनाव जीते थे. यहां मुस्लिम और दलित मतदाताओं की अच्छी संख्या है, लेकिन ठाकुर समाज के लोगों का ही वर्चस्व रहा है. आजादी के बाद से यहां पर 12 बार ठाकुर जाति के विधायक चुने जा चुके हैं. फारूखी बताते हैं, ''देवबंद विधानसभा सीट पर मुस्लिम आबादी अधिक होने के कारण चुनाव में कई मुस्लिम उम्मीदवार खड़े हो जाते हैं. मुस्लिम मत बंटने के कारण दूसरी जाति के उम्मीदवार जीत जाते हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में मुस्लि‍म मत बसपा उम्मीदवार माजिद अली और सपा उम्मीदवार माविया अली के बीच बंट गया, भाजपा उम्मीदवार बृजेश सिंह की जीत का यह बड़ा कारण था.''

विधायक बनने के बाद बृजेश सिंह ने 2017 में विधानसभा सत्र के दौरान देवबंद का नाम बदलकर देववृंद रखने की मांग की थी. वे लगातार यह मांग उठा रहे हैं. वे कहते हैं, ''देवबंद का नाम बदलने की मेरी मांग निराधार नहीं है. महाभारतकालीन ग्रंथों में इस इलाके का नाम देववृंद ही मिलता है.'' इस मांग के जरिये वे हिंदुत्व का एजेंडा ही सेट कर रहे हैं. उन्हें योगी का पूरा समर्थन मिला है. 4 जनवरी को देवबंद आने वाले योगी ने जड़ौदा गांव जाकर बृजेश के घर भोजन करने का कार्यक्रम तय किया था, पर खराब मौसम के कारण ऐसा न हो सका. वैसे, बृजेश विकास को ही चुनावी मुद्दा बनाने की बात कह रहे है.

वह कहते हैं, ''देवबंद में 170 करोड़ रूपये की लागत से पॉवर हाउस का निर्माण हो रहा है. यहां के गांव जड़ौदा पांडा को 40 वर्ष बाद गंग नहर से सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था की गई है. देवबंद को सीधे उत्तराखंड और दिल्ली मार्ग से जोड़ने के लिए 60 करोड़ रुपये की लागत से सड़क का निर्माण कराया जा रहा है. जनता विकास के नाम पर फिर भाजपा को वोट करेगी.'' 2017 के विधानसभा चुनाव में देवबंद सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारने वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इस बार गुर्जर समाज के राजेंद्र चौधरी को उम्मीदवार बनाया है. सपा इस बार भी यहां से माविया अली को उम्मीदवार बना सकती है. ऐसे में इस सीट पर मुस्लिम वोट न बंटने और गुर्जर वोटों में सेंध लगने से भाजपा को जीतने के लिए काफी पसीना बहाना पड़ेगा. 

सहारनपुर को नई पहचान

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सहारनपुर की सात में चार सीट ही जीत सकी थी. मार्च 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी को पहली बड़ी चुनौती सहारनपुर से ही मिली. मई, 2017 में सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में दलित और ठाकुर जाति के लोगों के बीच जातीय संघर्ष हो गया था. इससे निबटने के लिए प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार की मदद लेनी पड़ी थी. दलित और ठाकुरों के बीच बनी दीवार को पाटने के लिए योगी ने लगातार सहारनपुर का दौरा शुरू किया. बीते पांच वर्ष में वे यहां 12 बार आ चुके हैं. इस दौरान उन्होंने यहां पर कुल 3,000 करोड़ रुपये की विकास योजनाएं शुरू की हैं. देवबंद में एटीएस की स्थापना ही नहीं बल्कि‍ सहारनपुर में शाकंभरी देवी के नाम पर राज्य विश्वविद्यालय का शि‍लान्यास करके भी योगी ने पश्चिमी यूपी में हिंदुत्व का एजेंडा सेट करने और सहारनपुर को नई पहचान देने की कोशिश की है. बीते 2 दिसंबर को सहारनपुर के पुवांरका इलाके में मां शाकंभरी देवी राज्य विश्वविद्यालय के शिलान्यास कार्यक्रम में योगी के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मौजूद थे.

सहारनपुर से 40 किलोमीटर दूर जसमोर गांव में हिंदुओं का प्रमुख तीर्थस्थल शक्तिपीठ शाकंभरीदेवी है. सामान्य दिनों में यहां 8 से 10 हजार श्रद्धालु आते हैं. किसान आंदोलन के खत्म होने के बाद पहली बार 2 दिसंबर को सहारनपुर में शाकंभरी देवी राज्य विश्वविद्यालय के शिलान्यास के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में 'जय श्रीराम' के साथ 'मां शाकंभरी की जय' के भी नारे लगाए गए. इस तरह सहारनपुर समेत पश्चिमी यूपी में हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण के लिए जमीन भी तैयार की गई. सहारनपुर के जे.वी. जैन पीजी कालेज में राजनीतिक शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रवेंद्र मलिक कहते हैं, ''देश-विदेश में सहारनपुर की पहचान इस्लामिक शिक्षा के बड़े केंद्र दारुल उलूम देवबंद से है. दारुल उलूम देवबंद खुद को राजनीति से अलग रखता है, पर सहारनपुर में मुस्लिम समाज की अपेक्षाकृत अधिक जनसंख्या होने के कारण पश्चिमी यूपी की राजनीति में इस जिले का काफी प्रभाव है. शाकंभरी देवी के नाम पर राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना के पीछे योगी की रणनीति इस इलाके के हिंदू मतदाताओं को एक सकारात्मक संदेश देने की है. इसके जरिए सहारनपुर और पश्चिमी यूपी के जिलों में अपरोक्ष रूप से हिंदुत्व के एजेंडे को ही धार देने की कोशिश की है.''

एक वर्ष के भीतर बनकर तैयार होने वाले इस राज्य विश्वविद्यालय में 25 हजार से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे. योगी ने इस विश्वविद्यालय से विद्यार्थियों को मिलने वाली डिग्रियों पर शाकंभरी देवी की फोटो लगे होने की भी घोषणा की है. 

जातिगत समीकरण पर ध्यान

हिंदू मतों के ध्रुवीकरण के साथ ही भाजपा ने सहारनपुर में जातिगत समीकरणों को साधने में ध्यान लगाया है. जिले के कुल 400 बूथ में 20 फीसद से अधिक पर दलित जाति से नेता को पार्टी ने बूथ अध्यक्ष बनाया है. इन दलित बूथ अध्यक्षों में से 60 फीसद वाल्मीकि समाज से आते हैं. सहारनपुर की प्रमुख पिछड़ी जाति सैनी की आबादी जिले की कुल जनसंख्या के करीब सात फीसद है. सहारनपुर के दिग्गज नेता जसवंत सैनी का कद बढ़ाते हुए योगी सरकार ने उन्हें राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बना दिया है. इसके अलावा, भाजपा ने महेंद्र सैनी को सहारनपुर का जिला अध्यक्ष बनाकर सैनी समाज को लुभाने की पूरी कोशिश की है. जाट समाज के चौधरी मांगे राम को भाजपा ने सहारनपुर जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया है. साथ ही रामपुर और मुजफ्फरनगर जिले के भाजपा प्रभारी रहे युवा फायर ब्रांड नेता चंद्रमोहन को सहारनपुर शहर का प्रभारी बनाया गया है. 

पश्चिम यूपी में ध्रुवीकरण

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले सहारनपुर और उसके आसपास के जिले शामली, मुजफ्फरनगर, बगापत और मुजफ्फनगर के जातिगत समीकरण साधना योगी के लिए काफी चुनौतीपूर्ण है. मेरठ के डी. एन. पीजी कालेज में राजनीतिक शास्त्र विभाग के प्रमुख स्नेहवीर पुंडीर कहते हैं, ''इन जिलों में किसान आंदोलन का काफी प्रभाव था. इनमें मुस्लिम आबादी 25 फीसद से अधिक, तो जाट बिरादरी भी 20 फीसद से अधि‍क है. ये दोनों समुदाय भाजपा के विरोध में खड़े हैं. इसकी प्रतिक्रिया के तौर पर ही योगी आदित्यनाथ ने धु्रवीकरण की रणनीति अपनाई है.'' योगी ने 3 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मेरठ में बनने वाले खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास कराया. मोदी ने मेरठ के प्रसिद्ध औघड़नाथ मंदिर में पूजा करके अपने दौरे की शुरुआत की और हिंदू धार्मिक सरोकारों को साधने का प्रयास किया. यही वह मंदिर है जहां शिवरात्रि पर लाखों कांवड़िये जलाभिषेक करते हैं. योगी सरकार ने पश्चिमी यूपी में इन्हीं कांवड़ियों की यात्रा के दौरान उनपर हेलीकाप्टर से पुष्प वर्षा करने की परंपरा शुरू की थी.

सहारनपुर में देवबंद से 75 किलोमीटर दूर शामली जिले के कैराना में 250 करोड़ रुपए की लागत से पीएसी बटालियन कैंप और फायरिंग रेंज का निर्माण भी योगी सरकार ने शुरू कराया है. 2017 के विधानसभा चुनाव में कैराना से हिंदू परिवारों के पलायन को भाजपा ने मुद्दा बनाया था. पीएसी बटालियन कैंप की स्थापना से सुरक्षा का बोध कराकर भी योगी ने हिंदू परिवारों को लुभाने की कोशि‍श की है. सहारनपुर कोतवाली के बाहर बने बरामदे में बीते 48 साल से लोगों को कानूनी मदद देने वाले ब्रह्मपाल सिंह अब वकील बेटे अरुण कुमार को अपनी विरासत सौंपने की तैयारी कर रहे हैं. कश्यप जाति से आने वाले ब्रह्मपाल बताते हैं, ''योगी सरकार के दौरान सहारनपुर में अपराध कम हुए हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह एक प्रमुख मुद्दा होगा.'' योगी ने यहां अपराध नियंत्रण पर खास ध्यान दिया. बीते साढ़े चार साल में पश्चिमी यूपी में 80 से ज्यादा अपराधी एनकाउंटर में मारे गए हैं. 200 से ज्यादा अपराधियों पर गैंगस्टर ऐक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए उनकी 1,000 करोड़ रूपये से ज्यादा की संपत्ति जब्त की जा चुकी है.

वहीं, विपक्षी नेता पश्चिमी यूपी में भाजपा के हिंदुत्व कार्ड का 2022 के विधानसभा चुनाव में कोई भी प्रभाव न पड़ने की बात कहते हैं. सहारनपुर के प्रमुख मुस्लिम नेता और कांग्रेस छोड़कर सपा में जाने वाले इमरान मसूद कहते हैं, ''भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों से हिंदू- मुसलमान सभी परेशान हैं. इससे ध्यान हटाने के लिए ही योगी आदित्यनाथ हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की कोशि‍श कर रहे हैं. सहारनपुर ही नहीं पूरे पश्चिमी यूपी में उनका हिंदुत्व का एजेंडा बुरी तरह फ्लॉप साबित होगा.''

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