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राज्यों की दशा-दिशा 2014 : सुशासन के मामले में अव्वल है दिल्ली

एनसीआरबी के अनुसार प्रति लाख जनसंख्या पर 398 पुलिस कर्मियों के साथ दिल्ली 2012 में प्रति लाख जनसंख्या पर 138 पुलिसकर्मियों के राष्ट्रीय औसत से करीब तीन गुना बेहतर पुलिस कवरेज है.

हाल में पुलिसकर्मियों पर हमले और शहर के एक हिस्से में सांप्रदायिक तनाव को परे रख दें तो दिल्ली भारत का सर्वश्रेष्ठ सुशासन वाला छोटा राज्य है. इसने सुशासन के हर पैमाने पर बेहतर प्रदर्शन किया है.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार प्रति लाख जनसंख्या पर 398 पुलिस कर्मियों के साथ दिल्ली 2012 में प्रति लाख जनसंख्या पर 138 पुलिसकर्मियों के राष्ट्रीय औसत से करीब तीन गुना बेहतर पुलिस कवरेज है. तथ्य तो यह है कि पड़ोसी हरियाणा (प्रति लाख जनसंख्या पर 174 पुलिसकर्मी) और उत्तर प्रदेश (89) जैसे राज्यों की स्थिति दिल्ली के मुकाबले काफी बदतर है.
सुशासन के मामले में अव्वल दिल्ली
दूसरे शब्दों में कहें तो दिल्ली में पुलिस घनत्व, प्रति 100 वर्ग किलोमीटर में पुलिसकर्मियों की संख्या, देश में सबसे ज्यादा 5,147 है. दूसरे स्थान पर आने वाले पुडुचेरी में इसके मुकाबले बहुत कम महज 461 का ही पुलिस घनत्व है.

राज्य में ‘‘क्राइम अगेन्स्ट बॉडी’’ 2011 के 7,881 के मुकाबले 2012 में घटकर 7,672 ही रह गए. इसी दौरान, राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे अपराध 5,25,798 से बढ़कर 5,60,699 तक पहुंच गए. खासकर हत्या के मामलों में चार फीसदी की गिरावट आई है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर हत्या के मामलों में मामूली बढ़त दर्ज की गई है.

इस तरह अपराध कम होने के क्षेत्र में देश की राजधानी अच्छा प्रदर्शन करने का काम किया है. लेकिन दिल्ली के अपने नागरिकों पर शासन के मामले में सबसे तसल्ली वाली बात यह है कि यहां अदालतों में लंबित मामलों में भारी गिरावट (14 फीसदी) आई है. यह न्याय देने की व्यवस्था में सुधार की झंकी पेश करता है.

अगर पुलिस के सामने जांच के लिए आने वाले मामलों को शासन में सुधार का पैमाना मानें तो एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार इसमें भारी सुधार हुआ है. जांच के लंबित मामले 2011 के 43.8 फीसदी के मुकाबले 2012 में 28.8 फीसदी ही रह गए हैं.

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