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सुर्खियांः पीढ़ीगत छलांग

अंबानी परिवार की नई पीढ़ी के सदस्यों को समूह के नए जमाने के कारोबारों के लिहाज से तैयार किए गया है—खुदरा, डिजिटल, टेलिकॉम और स्वच्छ ऊर्जा. आरआइएल अंबानी परिवार के बाहर भी लीडरशिप आधार तैयार कर रहा है

उत्तराधिकार अंबानी परिवार की नई पीढ़ी मोर्चा संभाल चुकी है उत्तराधिकार अंबानी परिवार की नई पीढ़ी मोर्चा संभाल चुकी है
रिलायंसः पीढ़ीगत छलांग
रिलायंसः पीढ़ीगत छलांग

हाल में रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआइएल) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा था कि कंपनी में नेतृत्व परिवर्तन का वक्त आ चुका है. यह 2020-21 में 5.39 लाख करोड़ रुपए वार्षिक राजस्व वाली निजी क्षेत्र की भारत की सबसे बड़ी कंपनी है. 64 वर्षीय अंबानी 1981 से आरआइएल के साथ हैं, जब उनके पिता धीरूभाई अंबानी ने उन्हें महाराष्ट्र के पातालगंगा में पेट्रोकेमिकल्स प्लांट बनाने में मदद करने के लिए स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एमबीए प्रोग्राम से बीच में ही बुला लिया था. तब मुकेश महज 24 साल के थे. दो दशक बाद, उन्होंने 2002 में धीरूभाई के निधन के बाद आरआइएल की बागडोर संभाली.

पिछले कुछ वर्षों से, अंबानी अपने तीन बच्चों—30 साल के जुड़वां ईशा और आकाश तथा 26 वर्षीय अनंत को कंपनी में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार कर रहे हैं. लेकिन उन्होंने परिवार के बाहर भी भविष्य के अगुआ तैयार करने का ढांचा तैयार किया है, जिन्हें उचित समय पर नेतृत्व वाले पदों पर लाया जाएगा. धीरूभाई के जन्मदिन पर आयोजित सालाना समारोह रिलायंस फैमिली डे (28 दिसंबर) पर अंबानी ने कहा, ''रिलायंस ऐतिहासिक नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया में है—इसमें मेरी पीढ़ी के वरिष्ठों की जगह युवा नेतृत्व लेने वाला है.'' यह साफ था कि वह चाहते हैं कि उनके बच्चे आरआइएल साम्राज्य के सिंहासन पर बैठ जाएं और इसमें उन्हें पेशेवर और परिवार के वफादारों का सहयोग मिले. उन्होंने कहा, ''मुझे इस बात पर कोई संदेह नहीं है कि अगली पीढ़ी के अगुआ के तौर पर आकाश, ईशा और अनंत रिलायंस को और अधिक ऊंचाई पर ले जाएंगे.''

रिलायंसः पीढ़ीगत छलांग
रिलायंसः पीढ़ीगत छलांग

अंबानी शायद अपने बच्चों को कारोबार के गुर सीखने के लिए अधिक समय देना चाहते थे. लेकिन बाजार नियामक सेबी की तय की गई समय सीमा आन पड़ी थी, जिसके तहत कंपनियों को अपने अध्यक्ष और प्रबंध निदेशकों के पदों को अप्रैल, 2022 तक अलग करना था ताकि अधिक पारदर्शिता और जिम्मेवारी लाई जा सके. अभी तक यह साफ नहीं है कि नेतृत्व के पदों का बंटवारा कैसे होगा, पर आरआइएल के सूत्र बताते हैं कि अंबानी, इस नेतृत्व परिवर्तन के बाद रिलायंस फाउंडेशन के काम पर ध्यान देंगे. 

जब अंबानी ने सीएमडी के रूप में पदभार संभाला था तो आरआइएल का सकल टर्नओवर 65,061 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 4,104 करोड़ रुपए था. तब से बहुत कुछ बदल गया है. बीते वर्षों में आरआइएल कारोबार में तीन बड़ी विविधता लेकर आया—तेल और गैस, खुदरा और सबसे हाल में टेलिकॉम. मोटे तौर पर पेट्रोरसायन और बाद में तेल और गैस पर निर्भर रहने वाले औद्योगिक दिग्गज से आरआइएल ने उपभोक्ता-आधारित कारोबारों पर ध्यान दिया, मसलन खुदरा और टेलिकॉम और इसकी वजह से इसके राजस्व में आठ गुणा वृद्धि हुई और 2020-21 में इसका शुद्ध लाभ 53,739 करोड़ रुपए हो गया.

रिलायंसः पीढ़ीगत छलांग
रिलायंसः पीढ़ीगत छलांग

29 दिसंबर, 2021 तक आरआइएल का बाजार पूंजीकरण 16.25 लाख करोड़ रुपए था, जो भारतीय कंपनियों में सबसे अधिक था. इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, हैदराबाद के प्रोफेसर कविल रामचंद्रन कहते हैं, ''आरआइएल में ढांचागत और व्यवस्थित उत्तराधिकार के लिहाज से मुकेश अंबानी सही कदम उठा रहे हैं. हर व्यक्ति आगे बढ़ना चाहता है. आप अपने हितधारकों के प्रति जिम्मेवार हैं, अपने परिवार या शेयरधारकों के प्रति नहीं.'' वह यह भी कहते हैं कि अंबानी के वारिसों को अपना पद खुद कमाना चाहिए.

अंबानी की नई पीढ़ी, समूह के नए जमाने के कारोबारों के लिहाज से तैयार की गई है—खुदरा, डिजिटल, टेलिकॉम और स्वच्छ ऊर्जा. आकाश और ईशा रिलायंस जिओ इन्फोकॉम और रिलायंस रिटेल वेंचर्स में निदेशक के तौर पर 24 साल की उम्र में शामिल हो चुके हैं. ईशा ने येल विश्वविद्यालय से 2013 में मनोविज्ञान और दक्षिण एशियाई अध्ययन में स्नातक की उपाधि ली है और उनका कुछ समय अमेरिका में मॅकिन्से में भी गुजरा है. वहीं, ब्राउन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में स्नातक आकाश ने आरआइएल के 4जी टेलिकॉम वेंचर के साथ नजदीकी से काम किया है और उसके बाद ही वह समूह के फर्मों में निदेशक के रूप में शामिल हुए हैं. आकाश और ईशा आरआइएल के डिजिटल जिओ प्लेटफॉर्म्स के उस डील में मुख्य सौदेबाज थे जिससे यह गूगल, फेसबुक और इंटेल के साथ आया और इसने समूह को भविष्योन्मुखी उद्यम में बदल दिया. ये दोनों डेन नेटवर्क्स, हाथवे केबल और डेटाकॉम समेत जिओ प्लेटफॉर्म्स के सभी बड़े अधिग्रहणों में शामिल थे.

 

रिलायंस जिओ में, आकाश उत्पादों और डिजिटल सेवाओं के ऐप्लिकेशन्स के विकास में शामिल हैं. वह खेल कारोबार भी संभालते हैं और इंडियन प्रीमियर लीग की टीम मुंबई इंडियंस चलाते हैं. ईशा कंज्यूमर एक्सपीरियंस, ब्रान्डिंग-मार्केटिंग देखती हैं और रिलायंस फाउंडेशन में नीता अंबानी की मदद करती हैं.

अनंत ब्राउन यूनिवर्सिटी से स्नातक हैं और रिलायंस न्यू एनर्जी सोलर लिमिटेड के बोर्ड में हैं. वह ऊर्जा व्यवसाय का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं और जामनगर रिफाइनरी परिसर से जुड़े रहे हैं. आरआइएल के तेल से लेकर रसायन कारोबार का राजस्व महामारी की वजह से मूल्य में कमी आने के कारण 2020-21 में 29 फीसद घटकर 3.2 लाख करोड़ रुपए हो गया. वहीं, डिजिटल सेवाओं ने राजस्व में 90,287 करोड़ रुपए जोड़े, जो 2019-20 में 69,605 करोड़ रुपए से काफी अधिक है.

आरआइएल अंबानी परिवार के बाहर भी नेतृत्व तैयार कर रहा है. मुकेश अंबानी की अध्यक्षता वाले आरआइएल बोर्ड में चार कार्यकारी निदेशक हैं—निखिल आर मेसवानी, हिताल आर मेसवानी, पी.एम.एस. प्रसाद और पवन कुमार कपिल. नीता अंबानी, अरुंधति भट्टाचार्य, के.वी. चौधरी, यासिर ओ. अल-रुमायन, दीपक सी. जैन, आर.ए. माशेलकर, आदिल जैनुलभाई, आर.एस. गुजराल और शुमीत बनर्जी नौ गैर-कार्यकारी/स्वतंत्र निदेशक हैं.

विभिन्न विभागों या कारोबारों के प्रमुख का काम संभाल रहे अन्य वरिष्ठ पेशेवर अनुभवी और युवा दोनों हैं. उद्योग के 50-65 आयु वर्ग के दिग्गज इसमें शामिल हैं. मसलन, समूह के मुख्य वित्तीय अधिकारी आलोक अग्रवाल; रिलायंस रिटेल के एमडी सुब्रमण्यम वी., रिलायंस जियो के दोनों अध्यक्ष संजय मशरूवाला और मैथ्यू ओमन तथा जिओ के बिजनेस हेड पंकज पवार. तेल से लेकर रसायन के कारोबार में कार्यकारी निदेशक के रूप में पी.के. कपिल मौजूद हैं, तो समूह अध्यक्ष के रूप में संजीव सिंह और निदेशक के रूप में श्रीनिवास तुट्टागुंटा काम संभाल रहे हैं.

इन व्यवसायों में 35-50 आयु वर्ग के नेतृत्व की एक कड़ी है, जिन्हें बड़ी भूमिकाओं के लिए तैयार किया जा रहा है. मसलन, रिलायंस जियो के हेड ऑफ स्ट्रेटेजी अंशुमान ठाकुर, रिलायंस डिजिटल के मुख्य व्यवसाय अधिकारी कौशल नेवरेकर, जियो प्लेटफॉर्म्स के सीएफओ सौरभ संचेती, आरआइएल के मुख्य लेखा अधिकारी राज मलिक; रिलायंस रिटेल के सीएफओ अश्विन खासगीवाला, जियो के अध्यक्ष किरण थॉमस, जियो प्लेटफॉर्म्स के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट आशीष लोढ़ा और आयुष भटनागर, जियो के राजस्व और वाणिज्यिक संचालन के अध्यक्ष आर. श्रीनिवासन, ट्रेजरी के प्रमुख सौक्वय दत्ता और डीपवाटर ऑयल ऐंड गैसफील्ड्स एसेट्स के प्रमुख संजय रॉय.

आइएसबी के रामचंद्रन कहते हैं कि भले ही अंबानी के वारिस पूरी तरह से तैयार न हों, पर वे इस अनुभवी टीम पर भरोसा कर सकते हैं. आरआइएल ने कई ग्रूमिंग प्रोग्राम चलाए हैं. इसका करियर एक्सेलेरेशन प्रोग्राम और स्टेप-अप का मकसद अगुआ लोगों की जल्दी पहचान करना और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना है. वहीं, प्रबंधक बहु-कार्यात्मक प्रशिक्षण लेते हैं. केवल 30-35 आयु वर्ग के लोगों को लीडरशिप प्रोग्राम में शामिल होने की अनुमति है. विभिन्न भूमिकाओं में अनुभव हासिल करने में मदद करने के लिए अधिकारियों के पास सलाहकार होते हैं. 

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