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शख्सियतः विश्व कप जीतना तो बाकी है अभी

महिला क्रिकेट के उत्थान के लिए जीवन के 22 साल समर्पित करने वालीं मिताली राज को हाल में खेल रत्न से नवाजा गया. जीवन में ढेरों उपलब्धियां हासिल कर लेने के बावजूद उनका कहना है कि अभी दूर जाना है.

 मिताली राज मिताली राज

महिला क्रिकेट के उत्थान के लिए जीवन के 22 साल समर्पित करने वालीं मिताली राज को हाल में खेल रत्न से नवाजा गया. जीवन में ढेरों उपलब्धियां हासिल कर लेने के बावजूद उनका कहना है कि अभी दूर जाना है.

बाईस साल खेल लेने के बाद भी आप उतनी ही मजबूती से जमी हैं. इतने लंबे और चमकदार करियर का राज क्या है?

बेहद अनुशासन में बंधी जीवनशैली. मैं जिस परिवेश में पली-बढ़ी थी, वहां दिन-रात सख्त अनुशासन में रहना पड़ता था. उसी ने शायद, मुझे नाकामियों और मुश्किल हालात से उबरने में मदद की.

मैं किसी चीज के लिए ज्यादा दिन तक रूठती-कुढ़ती नहीं. साथ ही साथ बेहतर करने की भूख मेरे भीतर हमेशा बनी रही. मुझे हमेशा लगता है कि अपने खेल में अभी एक और आयाम जोड़ सकती हूं.

महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन, महिला एकदिवसीय मैचों में सफलतम कप्तान, खेल रत्न, हिंदी में बायोपिक बन रही है आप पर...आपको क्या लगता है, अब भी कुछ हासिल करना बाकी है?

अभी तो विश्वकप जीतना है. 2022 में हमारे पास इसके लिए अच्छा मौका है. वह जीत लिया तो सोने पे सुहागा. दो दफे हम जीतते-जीतते रह गए हैं. इस समय हमारे पास यह ट्रॉफी जीत पाने वाली टीम मौजूद है.

खेल रत्न का आपके लिए क्या अहमियत है?
यह सालों की तपस्या का इनाम है. यह सिर्फ मेरा नहीं, यह महिला क्रिकेट का सम्मान है. यह उन तमाम लोगों का सम्मान है जिन्होंने मेरे यहां तक पहुंचने में भूमिका निभाई है—मेरे मां-बाप, मेरे कोच, फिजियो, ट्रेनर, और वे साथी जो मेरे पीछे खड़े रहे.

मैं यह अवार्ड अपने उन सीनियर्स को समर्पित करती हूं जिन्होंने मुश्किल और चुनौती भरे हालात में खेलते रहकर इसकी लौ जलाए रखी और फिर मशाल हमें सौंपी.

अगले साल महिला आइपीएल की बात चल रही है. आप तो टी20 फॉर्मेट से रिटायर हो चुकी हैं, पर इसमें खेलने में आपकी दिलचस्पी होगी?

इस बारे में सोचा नहीं. इस बारे में मैं एक निश्चित पड़ाव के बाद फैसला करूंगी. अभी तो मेरा पूरा ध्यान विश्व कप पर है. अभी तो उसी मौके के लिए टीम और उससे जुड़ी तैयारियों के बारे में सोच रही हूं.

—सुहानी सिंह

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