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शख्सियतः प्रशस्ति पत्र

स्टैंड अप कॉमेडियन प्रशस्ति सिंह का अमेठी से मुंबई तक का सफर दिलचस्प रहा है. इंजीनियरिंग और एमबीए की पढ़ाई के बाद नौकरी छोड़ स्टेज पर आने के फैसले और अगले शो के बारे में उनकी बेबाक राय.

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प्रशस्ति सिंह प्रशस्ति सिंह

स्टैंड अप कॉमेडियन प्रशस्ति सिंह का अमेठी से मुंबई तक का सफर दिलचस्प रहा है. इंजीनियरिंग और एमबीए की पढ़ाई के बाद नौकरी छोड़ स्टेज पर आने के फैसले और अगले शो के बारे में उनकी बेबाक राय.

● आइआइएम लखनऊ से एमबीए और फिर एक बड़ी नौकरी, फिर यह स्टैंड अप कॉमेडी. आखिर माजरा क्या था?

मुझे हमेशा से स्टेज पर परफॉर्म करने का बहुत शौक था, पर स्टैंड अप के बारे में मुझे पता भी नहीं था. स्कूल, इंजीनियरिंग और फिर एमबीए के दौरान मैं पहले डांस और थिएटर सोसाइटीज में काफी ऐक्टिव रहती थी. जब मैं नौकरी करने मुंबई आई तो एक साल में मुझे लगने लगा कि घर से ऑफिस और ऑफिस से घर, सिर्फ यही मेरी जिंदगी नहीं हो सकती.

पहले मैंने नौकरी के साथ-साथ थिएटर करने का सोचा, लेकिन 16 घंटे वाली नौकरी के साथ उसे मैनेज नहीं किया जा सकता. सिर पर लोन और परिवार की जिम्मेदारी भी थी. लेकिन कुछ नया सीखने के मकसद से स्टैंड अप के शो देखना और फिर धीरे-धीरे उसमें पार्टिसिपेट करना शुरू कर दिया. शुरू में यह सिर्फ हॉबी थी, फिर वक्त के साथ मुझे लगा यह भी एक करियर हो सकता है.

● स्टैंड अप कॉमेडी कर सकती हैं, इसका भरोसा कैसे आया?

मुझे लगता था कि मैं अपने दोस्तों को बहुत आसानी से हंसा लेती हूं पर यह कि लोग टिकट खरीदकर मेरी बातों पर हंसने आएंगे, ऐसा मैंने कभी नहीं सोचा था. मुझे स्टेज से कभी डर नहीं लगा पर माइक पर बात करने की हिम्मत कभी नहीं थी.

जब मैंने पहली बार हिम्मत जुटाकर एक ओपन माइक में पांच मिनट परफॉर्म किया, और लोगों को हंसते देखा तो मुझमें काफी कॉन्फिडेंस आ गया. मैंने महसूस किया कि यहां लोग आपकी भाषा नहीं, आपकी बात सुनने आए हैं और फिर मुझे लगने लगा कि मैं भी स्टैंड अप कॉमेडी कर सकती हूं.

● अमेठी से शुरू हुआ सफर मुंबई और फिर कॉमेडी के मंच तक पहुंचा. जाहिर है इसमें संघर्ष भी झेलना पड़ा होगा.

देखिए, मैंने कॉमेडी 30 साल की उम्र में शुरू की. तब तक मैंने अपने परिवार की काफी उम्मीदें पूरी कर दी थीं. शादी का प्रेशर 23 साल की उम्र से है, पर 30 तक आते-आते वह भी हैंडल करना आ गया था. पैसों को लेकर मैं किसी पर डिपेंडेंट नहीं थी.

मेरे लिए ज्यादा बड़ा चैलेंज था खुद पर विश्वास करना कि मैं इस नए फील्ड में अपनी जगह बना पाऊंगी, और यह करते हुए अपनी फाइनेंशियल जिम्मेदारियां निभा पाऊंगी. यही चीजें सुलझाने में थोड़ा समय लगा.

● मौजूदा राजनैतिक हालात को कॉमेडी के लिए कितना माकूल मानती हैं?

अब माहौल ऐसा हो गया है कि लगता है कुछ लोग बस मौका ढूंढ़ रहे हैं आपको टारगेट करने का. उन्हें परेशानी आपकी बातों से नहीं, आपके होने से है. इसलिए ऐसे समय में खुलकर अपनी बात कहना मुश्किल तो हो जाता है.

इसमें एक अच्छी बात यह है कि जब इनसान खुलकर बात नहीं कर पाता तो उसे घुमाकर वही बात करनी पड़ती है, ऐसे में उसका तंज और तीखा हो जाता है.

● आपने कॉमिकस्तान और किसकी सरकार जैसे शो किए, अभी नया क्या लेकर आ रही हैं?

मैं फिलहाल अपने एक घंटे के स्पेशल पर काम कर रही हूं जिसे आप जल्दी एक ओटीटी पर देखेंगे.

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