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शख्सियतः मैदान में मोर्चे पर

भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह बेफिक्र होकर जिंदगी जीने में यकीन रखते हैं. टीम की अगुआई करते हुए ओलंपिक में कांस्य पदक दिलाने वाले मनप्रीत कहते हैं कि लंबे अरसे से संजोया गया उनका सपना आखिरकार पूरा हुआ.

हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह

भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह बेफिक्र होकर जिंदगी जीने में यकीन रखते हैं. टीम की अगुआई करते हुए ओलंपिक में कांस्य पदक दिलाने वाले मनप्रीत कहते हैं कि लंबे अरसे से संजोया गया उनका सपना आखिरकार पूरा हुआ.

ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद किस तरह की अनुभूति हो रही है?

भारत ने 41 साल पहले आखिरी बार जब ओलंपिक में हॉकी में पदक जीता था तब तक हमारी टीम का कोई खिलाड़ी पैदा तक नहीं हुआ था. भारत के पदक जीतने की बात हमने बस सुनी ही थी.

तो इस दफा कांस्य जीतने पर एक अलग तरह का एहसास हो रहा था. हमसे पहले भी बहुत-से अच्छे खिलाड़ी टीम में हुए लेकिन बतौर टीम हमने अच्छा खेला, जिसके चलते हमने पदक जीता. बचपन से ही ओलंपिक में पदक जीतने का सपना था जो अब पूरा हो गया.

भारतीय हॉकी में इसी जज्बे और उत्साह को बनाए रखने के लिए क्या किया जाना चाहिए?

भारत अभी विश्व में नंबर 3 पर है और सोच यही है कि इसे बरकरार रखा जाए. हमें ओलंपिक में की गई गलतियों पर काम करने और उन पहलुओं को पहचानने की जरूरत है जिनमें सुधार की जरूरत है. कैंप में लौटने पर हम इन चीजों का विश्लेषण करेंगे. अंतिम लक्ष्य, जाहिर है, नंबर 1 बनना ही है.

सेमी फाइनल में हार और तीसरे स्थान के लिए जर्मनी से हुए मैच के बीच के समय में खिलाड़ियों से आपने क्या कहा?

सेमी फाइनल में हार से सारे खिलाड़ी स्तब्ध थे. वह मैच हम जीत गए होते तो स्वर्ण या रजत पदक पक्का हो जाता. अब यह साफ था कि सिर्फ जीतने पर ही कांस्य पदक मिल सकेगा. मैंने उनसे यही कहा कि हमारे पास 60 मिनट हैं, इस दौरान हमने बढ़िया खेला तो हमारे नाम के आगे भी मेडल जुड़ जाएगा. वर्ना जिंदगी भर पछताने को रह जाएगा.

फिलहाल कुछ दिनों के लिए आप ट्रेनिंग वगैरह से दूर हैं, इस दौरान सबसे ज्यादा किस चीज का आनंद ले रहे हैं?

लौटने के बाद से ही हम अनेक स्वागत समारोहों में शिरकत करते रहे. लेकिन जहां कहीं थोड़ी भी गुफ्तगू का मौका मिला, मैंने लोगों को इस पदक के लिए किए गए बलिदान और बहाए गए पसीने के बारे में बताया.

लोगों को मैं बताना चाहता हूं कि यहां पहुंचने के लिए टीम ने क्या-क्या नहीं किया. ओलंपिक से पूर्व फास्ट फूड और मिठाई खाने पर रोक लग गई थी. अब थोड़ा उसका मजा ले रहा हूं.

—शैल देसाई
 

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