scorecardresearch
 
डाउनलोड करें इंडिया टुडे हिंदी मैगजीन का लेटेस्ट इशू सिर्फ 25/- रुपये में

शख्सियतः बहुत रह लिया दिल्ली

कथक नर्तक और गुरु पंडित बिरजू महाराज कोरोना संकट के बाद पहली यात्रा, लखनऊ से लगाव, पुरुष कलाकारों की कमी और फिल्मों पर.

X
 पंडित बिरजू महाराज पंडित बिरजू महाराज

कथक नर्तक और गुरु पंडित बिरजू महाराज कोरोना संकट के बाद पहली यात्रा, लखनऊ से लगाव, पुरुष कलाकारों की कमी और फिल्मों पर.

आप तो कथक के मिथक पुरुष हैं और निरंतर सक्रिय रहते आए हैं. कोरोना संकट के दौरान आपने आखिर किस तरह से एडजस्ट किया, कैसे रास्ता निकाला?

मैंने, मेरे शागिर्दों, शाश्वती सेन वगैरह सबने कलाश्रम की ओर से ऑनलाइन कार्यक्रम खूब किए. मैं भी रुका नहीं, सिखाता रहा. मेरी तालीम पहले जैसी चलती रही.

हाल ही में आप लखनऊ गए थे. क्या अब आपकी पहले की तरह यात्राएं शुरू हो गई हैं?

डेढ़ साल से मेरी यात्राएं बंद थीं. अभी लखनऊ के लिए पहली बार हवाईजहाज में चढ़ा हूं. मेरी इच्छा थी कि जब भी मैं फिर से यात्राएं शुरू करूंगा तो सबसे पहले लखनऊ जाऊंगा क्योंकि यहीं पैदा हुआ, यह मेरे पूर्वजों की नगरी है. अब दूसरी यात्राएं भी होंगी.

लखनऊ से आपका लगाव रहा है. यहां आपके पैतृक निवास कालका-बिंदादीन की ड्योढ़ी को कथक संग्रहालय का रूप दिया जा चुका है. अब और क्या करना चाहते हैं यहां?

लखनऊ यात्रा के दौरान मैंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिलकर निवेदन किया कि सरकार कोई ऐसी जगह बना दे जिसमें देश-विदेश के लोग आएं और मैं उसकी सेवा में पूरी तरह समर्पित हो सकूं. अपने जीवन का आखिरी हिस्सा मैं लखनऊ में बिताना चाहता हूं. बहुत रह लिया दिल्ली.

अब जन्मभूमि पर लौटकर यहीं कथक की सेवा करना चाहता हूं. लोगों को लगता है कि कथक मनोरंजन का माध्यम है, मेरा मानना है कि यह आपको अध्यात्म से, भक्ति से जोड़ता है. मैं स्वयं भक्ति में रहता हूं, मैं जब मंच पर आता हूं तो ईश्वर से कहता हूं कि अब आप मेरे भीतर आकर नृत्य करिए. नृत्य भी ईश्वर तक पहुंचने का माध्यम है.

आपसे पहले और आपकी पीढ़ी तक कथक में पुरुष कलाकारों की प्रमुखता रही है. आपके घराने में आपके पिता और चाचा, उनके बेटे कथक नर्तक हुए लेकिन अब कथक में पुरुष कलाकारों की कमी-सी दिखती है.

अब इधर फिर से लड़के आ रहे हैं. दिल्ली में सात-आठ लड़के हमसे सीख रहे हैं.

निकट भविष्य में दर्शकों को क्या फिर किसी फिल्म में आपका नृत्य निर्देशन देखने का मौका मिल सकेगा?

देखिए, इसके लिए मेरी तरह की फिल्म भी तो होनी चाहिए. वैसे, देवदास बनाने वाले संजय लीला भंसाली से एक फिल्म की बात चल रही है. जल्द ही कुछ तय होगा तो सबको बताऊंगा

—आलोक पराड़कर

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें