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शख्सियतः बंदे में है दम

वेब सीरीज रे की चार कहानियों में से एक ने फिर इस तथ्य को साबित किया कि अभिनेता के.के. मेनन में किसी फिल्म को अपने कंधे पर लेकर चलने और उसे कामयाब बनाने की प्रतिभा हमेशा से मौजूद रही है.

के.के. मेनन के.के. मेनन

वेब सीरीज रे की चार कहानियों में से एक ने फिर इस तथ्य को साबित किया कि अभिनेता के.के. मेनन में किसी फिल्म को अपने कंधे पर लेकर चलने और उसे कामयाब बनाने की प्रतिभा हमेशा से मौजूद रही है.

● सत्यजित रे आपके अभिनेता को कितना प्रेरित-प्रभावित किया है?

मेरा मानना है कि सारी क्रिएटिविटी एक बंदिश में खुलना-खिलना चाहिए. रे जैसे महान फिल्मकारों ने उन बंदिशों में काम किया. उनका काम अत्यंत सारगर्भित किस्म का होता था और उनके दिमाग में शीशे की तरह साफ होता था कि अभिनेताओं से उन्हें क्या चाहिए.

मैं अभिनेताओं की उस पीढ़ी से आता हूं जिन्हें पता होता है कि शूट करने के लिए कोरी फिल्म की क्या लागत होती है. इसलिए हमें पता होना चाहिए कि हम क्या कर रहे हैं. इससे आप हमेशा चौकस और चौकन्ना
बने रहते हैं.

●क्या ओटीटी ने इतनी ताकत और आजादी दे दी है कि अब आपको किसी फिल्म में लीड रोल मिलने की फिक्र करने की जरूरत नहीं रही?

स्पेशल ऑप्स (डिज्नी+ हॉटस्टार सीरीज) अगर के.के. मेनन अभिनीत एक फिल्म होती तो सिनेमाघरों में बड़े पैमाने पर यह रिलीज ही नहीं होती. उस बिजनेस का गुणा-गणित ही बिल्कुल अलग है. ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दर्शकों से सीधा कनेक्शन है. ओटीटी ने स्टारडम को लेकर चलने वाली चर्चाओं की हवा निकाल दी है.

●आपने स्वतंत्र/प्रायोगिक और मुख्यधारा की फिल्मों के बीच संतुलन बनाया हुआ है. ओटीटी पर कामयाबी के बाद भी वह संतुलन आपके लिए मायने रखता है?

मेनस्ट्रीम के मेरे काम पर कुछ इस तरह का ठप्पा लगाया गया कि मेरे जैसे एक्टर्स को ओपनिंग नहीं मिल पाती. पर अब लोगों को पता है कि हम क्या कर सकते हैं और कर रहे हैं, तो अब ऐसे में मैं इसकी जरूरत नहीं समझता. कुछेक साल पहले मैंने तय किया था कि जिन चीजों के लिए मैं जरूरत से ज्यादा योग्य हूं, उन्हें बिल्कुल नहीं करूंगा. देखता हूं, मेरा यह संकल्प कहां तक निभ पाता है.

●आपका कोई मीडिया मैनेजर या पब्लिशिस्ट नहीं है और आपको सोशल मीडिया का भी शौक नहीं. इस मामले में बिल्कुल अलग हैं.

मुझे नहीं लगता कि अपने काम का ढोल पीटने से कोई फायदा होता है. हां, आपका काम लोगों तक पहुंचना चाहिए और अगर वह अच्छा है तो पहुंचेगा. किसी अभिनेता को आप जितना कम जानते हैं, उसका काम देखते हुए आप उतना ही पूर्वाग्रहमुक्त रहेंगे.

मैंने तो इस महामारी से पहले ही कहा था कि अगर कोई राष्ट्रीय आपदा आती है तो ऐसे में अभिनेता पहली वस्तु होगा, जिसे उठाकर खिड़की से बाहर फेंका जाएगा.
 

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