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शख्सियतः सब मुमकिन है

अभिनेता पंकज त्रिपाठी की नई फिल्म बच्चन पांडे, अपनी व्यस्तता, ओटीटी और बचपन के सपने के बारे में राय.

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पंकज त्रिपाठी पंकज त्रिपाठी

अभिनेता पंकज त्रिपाठी की नई फिल्म बच्चन पांडे, अपनी व्यस्तता, ओटीटी और बचपन के सपने के बारे में राय.

 बच्चन पांडे रीमेक है. इसमें आपकी कैसी भूमिका है?

मैं जब भी रीमेक फिल्म करता हूं तो ओरिजिनल फिल्म नहीं देखता. बच्चन पांडे में मेरा कैरेक्टर गुरूजी का है जो ऐक्टिंग सिखाने आते हैं. इस कैरेक्टर को भी मैंने अपनी तरह से तैयार किया है. मैं कॉमेडी करता दिखूंगा. मेरा पार्ट अच्छा, मसालेदार और ह्यूमरस है.

 सिनेमा और ओटीटी को किस तरह की चुनौती है? ओटीटी पर कब और किस सीरीज के साथ लौटेंगे? 

कोई चुनौती नहीं है. स्थिति सामान्य होने पर थिएटर और ओटीटी दोनों एक साथ चलेंगे. अमेजन पर एक नई सीरीज में दिखूंगा. इसमें अलग कंटेंट है. इस वक्त मेरा मुंह सिला हुआ है इसलिए इसके बारे में कुछ नहीं बोल सकता.

 ओटीटी पर एक बार फिर सेक्स, हिंसा और गालियों का दबदबा बढ़ा है. आप क्या सोचते हैं? 

मैं यही सोचता हूं कि अगर कहानी में बहुत जरूरी न हो तो सिर्फ सनसनी के लिए इन्हें न डाला जाए. अगर इनके बिना कहानी पूरी होती है तो क्या जरूरत है हिंसा, गाली और न्यूडिटी. गैरजरूरी कोई भी चीज न डाली जाए.

 कोरोना के बाद आपकी क्या मसरूफियत है?

मैं तो इतना व्यस्त हूं कि शूटिंग दिन-रात कर रहा हूं. क्रिमिनल जस्टिस-3 सहित तीन-चार प्रोजेक्ट्शस चल रहे हैं. लेकिन अच्छा यह है कि कहानियां बदली हैं. ओटीटी के बूम होने की वजह से अभिनेताओं का काम बढ़ गया है. हर अभिनेता व्यस्त है. उसको काम मिल रहा है. अपना आर्ट दिखाने का मौका मिल रहा है. 

 छुट्टी के दौरान गांव जाने पर कैसा महसूस होता है?

वहां मैं सिनेमा से दूर रहता हूं. सिर्फ सोचता हूं कि बचपन में जो लड़का सपने देखता था वह मुंबई जाकर ऐक्टर बन गया क्या. बीस-पच्चीस साल पहले मैं ऐक्टर बनने को लेकर सोचता था, अब बन गया हूं. गांव का एक लड़का जो हिंदी मीडियम का छात्र रहा है, ऐक्टर बन गया. लगता है कि कुछ भी संभव है.

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