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शख्सियतः करुणा बड़ी कारसाज है

लेखिका और जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) की को-डायरेक्टर नमिता गोखले अपने भीतर की उत्तेजना को आशावाद से संतुलित करती हैं. ऐसे में स्वाभाविक तौर पर उनके नए उपन्यास और जेएलएफ पर उनके विचारों में एक सजग किस्म की उम्मीद दिखती है.

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नमिता गोखले नमिता गोखले

लेखिका और जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) की को-डायरेक्टर नमिता गोखले अपने भीतर की उत्तेजना को आशावाद से संतुलित करती हैं. ऐसे में स्वाभाविक तौर पर उनके नए उपन्यास और जेएलएफ पर उनके विचारों में एक सजग किस्म की उम्मीद दिखती है.

ब्लाइंड मेट्रियार्क महामारी के शुरुआती दिनों की भावभूमि पर है. कोविड अभी जाता हुआ दिखता नहीं. इसमें बदलाव का असाधारण समय दर्ज हुआ है.

इसका बहुत कुछ किताब में गद्य के वास्तु पर और संपादक के रवैए पर निर्भर है. मेरे पिछले नॉवेल जयपुर जर्नल्स में बहुत-से स्वर, लोग और उतनी ही कहानियां गुंथी थीं. उससे उसकी वास्तुरचना और संपादन के लिए खास किस्म के शिल्प, दक्षता और एकाग्रता की जरूरत थी. लेकिन नए उपन्यास की कहानी लीनियर होने की वजह से इसका फ्रेमवर्क उतना जटिल नहीं था.

आपके उपन्यास में परिवार और राष्ट्र एक-दूसरे की जगह लेते दिखते हैं. क्या चीज है जो दोनों को जोड़ सकती है?

नहीं, एक-दूसरे की जगह नहीं ले सकते, हां, परिवार और राष्ट्र का अक्स एक-दूसरे में दिखता है. नायिका मातंगी कहीं पर मेरे लिए, हमारे आसपास घूम रही करोड़ों भारत माताओं में से ही एक भारत माता है. मुझे लगता है, करुणा जोड़ती है, जैसा कि प्रगतिशील सोच और पूर्वाभास के जरिए मातंगी परिवार को जोड़े रखती है.

उपन्यास में आशा का एक भाव आपका हाथ थामे दिखता है. एक व्यक्ति के तौर पर आप कितनी आशावादी हैं?

मैं मूर्खता की हद तक आशावादी हूं और बेहद बेचैन भी. हमेशा बुरे से बुरे हालात का ख्याल कर परेशान हो उठती हूं. अपने परिचितों में मैं सबसे बेचैन आत्माओं में से हूं. हमेशा बदतर के बारे में सोचती रहती हूं. पर हैरत की बात है कि मुझे भीतर कहीं न कहीं लगता रहता है कि इससे निबट लेंगे या फिर यह कि अच्छा ही होगा.

जेएलएफ की संस्थापक और को-डायरेक्टर के नाते क्या आपको इस बात की निराशा है कि डिग्गी पैलेस के उस भव्य परिवेश की बजाए सब कुछ कंप्यूटर स्क्रीन पर घट रहा है?

वैसे, इस बार मौके पर ही आयोजन हो रहा है, हालांकि सुरक्षा वजहों से मुख्य फेस्टिवल हम डिग्गी पैलेस में नहीं करवा सकेंगे. पर पैलेस से मेरा रिश्ता पहले जैसा ही रहने वाला है. हां, जहां तक स्क्रीन वाली बात है तो एकरसता वाला फॉर्मेट होने से जूम थोड़ा उबाऊ हो सकता है. पर मुझे लगता है, आगामी वर्षों में टेक्नोलॉजी हमारे सामने आश्चर्यजनक अवसर मुहैया कर सकती है.

—श्रीवत्स नेवटिया

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