scorecardresearch
 
डाउनलोड करें इंडिया टुडे हिंदी मैगजीन का लेटेस्ट इशू सिर्फ 25/- रुपये में

शख्सियतः बनारस में नहीं रहा बनारस

चर्चित कथाकार काशीनाथ सिंह संस्मरण लेखन, बदलते बनारस और यूपी में आने वाले चुनाव पर.

कथाकार काशीनाथ सिंह कथाकार काशीनाथ सिंह

चर्चित कथाकार काशीनाथ सिंह संस्मरण लेखन, बदलते बनारस और यूपी में आने वाले चुनाव पर.

कोरोना संकट के डेढ़ वर्ष में अस्सी और पप्पू की चाय की दुकान छूट जाने की काफी कसक होगी आपके भीतर.

सब छूट गया है. इधर कुछ लिखा नहीं. दो-ढाई साल से स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा. इसी के चलते घर से बाहर ही नहीं निकला. एक ऑपरेशन कराया था जो सफल नहीं रहा. लोग किताबें लेकर आते हैं और यहीं फोटो खींच लेते हैं. चीजें ऑनलाइन चल रही हैं.

आपके साढ़े चार यारों में विजयमोहन सिंह, रवींद्र कालिया और फिर दूधनाथ सिंह का, साथ ही भैया नामवर सिंह का बिछड़ना भी आपको अकेला कर गया.

हां, अकेलापन तो है. जबलपुर में ज्ञानरंजन (कथाकार, संपादक) हैं. उन्हें भी कोरोना हो गया था. उसके बाद उनसे भी बातचीत नहीं हुई. सारे लोग धीरे-धीरे बिछड़ रहे.

आपके संस्मरण काफी चर्चित हुए हैं. काशी का अस्सी पर तो फिल्म भी बनी है. पर लंबे समय से आपने कोई संस्मरण भी नहीं लिखा.

संस्मरण प्राय: मैंने उन्हीं के बारे में लिखा है जिन्हें भीतर-बाहर बहुत अच्छी तरह जानता हूं. जिन्हें बाहर से ही जानता हूं, अंदर से नहीं जान पाता, उनके बारे में नहीं लिखता. बाबा नागार्जुन पर लिखना चाहता था. वे आते तो हमारे घर ठहरते थे. हमारे लिए ही आते थे. उनके बारे में लिखने की सोची थी मैंने लेकिन कुछ ऐसे विरोधाभास मुझे दिखाई पड़ रहे थे, जिन्हें मैं समझना चाहता था, नहीं समझ सका. इसलिए लिखने से रह गए बाबा.

अब तो आपका बनारस, उसका सांचा-ढांचा भी बहुत बदल रहा है.

अब तो बनारस भी बनारस में नहीं दिखता. जिन गलियों के लिए जाना जाता था, बाबा विश्वनाथ उन गलियों के बीच थे पर अब वे भी कॉरिडोर में चले गए. बनारस अब बचा कहां है? बनारस के लिए क्या-क्या नहीं किया लोगों ने पर अब वह बनारस रहा ही नहीं. ध्वंसावशेष के रूप में कुछ लोग आज भी रह गए हैं तो रह गए हैं, जैसे भांग-ठंडई वाले, मस्ती वाले.

उत्तर प्रदेश में चुनाव आ रहे हैं, क्या सोचते हैं?
चुनाव के बारे में मैं क्या बताऊं? सारी चीजें तो बिकती चली जा रही हैं. आदमी ही बचा हुआ है. अभी खुद को बचाए हुए चल रहा है. अब तो सीधे अस्तित्व पर ही संकट है भाई.  

—आलोक पराड़कर.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें
ऐप में खोलें×