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शख्सियतः राग की रंगत में विचार

शास्त्रीय गायक टी.एम. कृष्ण का गद्य भी उनके संगीत की ही तरह भेदक होता है. उनके लिखे हुए का नया संकलन इसी हफ्ते आया है पर उनका कहना है कि  उनकी निगाह में कुछ भी, यहां तक कि उनका खुद का संगीत भी ठोस और स्थायी नहीं

शास्त्रीय गायक टी.एम. कृष्ण शास्त्रीय गायक टी.एम. कृष्ण

शास्त्रीय गायक टी.एम. कृष्ण का गद्य भी उनके संगीत की ही तरह भेदक होता है. उनके लिखे हुए का नया संकलन इसी हफ्ते आया है पर उनका कहना है कि उनकी निगाह में कुछ भी, यहां तक कि उनका खुद का संगीत भी ठोस और स्थायी नहीं

 आपकी किताब द स्पिरिट ऑफ इक्वायरी: नोट्स ऑन डिसेंट आपके उम्दा आलेखों का संकलन है. पुराने आलेखों को आपने किस ढंग से जांचा-परखा और उनका चुनाव किया?

संकलन के पीछे मूल बात यही थी कि वह विचारोत्तेजक हो. आलेखों का चुनाव इस आधार पर किया कि भले ही वे किसी फौरी विषय पर प्रतिक्रिया के रूप में लिखे गए हों पर वे उस घटना से उपजते व्यापक मुद्दों पर बात करते हैं. मैं नहीं मानता कि महज इसलिए कि कभी कुछ सार्वजनिक रूप से कहा/लिखा है तो उस पर अड़ा रहूं. तभी तो वर्षों पहले लिखे गए एक लेख की मैंने जमकर आलोचना की है. संग्रह में नए आलेख जोड़कर मैंने अपनी वैचारिक बहस को ज्यादा गंभीर और परतदार बनाने की कोशिश की है.

 आप तो राष्ट्रगान पर भी एक किताब लिख रहे हैं, उसके प्रतीकों के पीछे की सोच और उसके अर्थ जानने के नजरिए से. इस किताब का ख्याल कैसे उपजा?

प्रतीक खूबसूरत भी हैं और खतरनाक भी. वे हमें ताकत और साझेपन का एक भाव भी देते हैं पर अक्सर हमें अपनी अर्जित और उपार्जित प्रासंगिकताओं के भंवर में फंसा लेते हैं. इस किताब में आलोचनात्मक ढंग से उन्हें परिकल्पित कर पाऊंगा, ऐसी उम्मीद है.

 हर लेखक की अपनी एक चर्या और एक लय-ताल होती है. आपनी प्रक्रिया क्या है?

मेरा सब कुछ बहुत ही अव्यवस्थित रहता है, वह चाहे संगीत हो या लेखन. मेरा ऐसा कोई व्यवस्थित नियम-कायदा नहीं है. शुरू करने में तो मुझे अच्छा-खासा समय लग जाता है लेकिन उसके बाद एक लय बन जाती है.

 इधर के वर्षों में शब्दों के साथ लगातार संवाद के चलते अब बतौर संगीतकार क्या आप शब्दों को स्वर के रूप में सोचते हैं?

वैसे तो शब्दों और स्वरों दोनों का स्वभाव ध्वन्यात्मक ही है, पर हम कह सकते हैं कि शब्द अपने अर्थों के जरिए स्मृति में आते हैं और स्वर रागों के जरिए. पर दोनों में यह क्षमता है कि वे हमें थोड़ा ठहरकर सोचने के लिए प्रेरित करें.

अखिला कृष्णमूर्ति

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