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शख्सियतः उम्रभर का काम

शशि थरूर का लेखन विविधतापूर्ण है और विस्तृत भी. अपना नया संकलन प्राइड, प्रीजुडिस ऐंड पंडिट्री आने के मौके पर इस लेखक-राजनेता का कहना है कि अभी कई किताबें उनके दिमाग में हैं.

शशि थरूर शशि थरूर

शशि थरूर का लेखन विविधतापूर्ण है और विस्तृत भी. अपना नया संकलन प्राइड, प्रीजुडिस ऐंड पंडिट्री आने के मौके पर इस लेखक-राजनेता का कहना है कि अभी कई किताबें उनके दिमाग में हैं.

आपकी कई किताबें आ चुकी हैं पर इस संकलन में आपको क्या कुछ खास लगता है?
किताब लिखने पर हर बार आप यही उम्मीद करते हैं कि यह स्थायी महत्व का काम होगा. पर इस संकलन को स्थायी महत्व का बनाने का ठोस प्रयास किया गया है. इसके लिए 40 साल में छपी किताबों और लेखों में से चुना गया है.

इसमें मेरा कुछ उम्दा गद्य—फिक्शन और नॉन फिक्शन—है और डेविड देवीदार के कहने पर कुछ कविताएं भी डाली हैं. यह रचनात्मक जीवन को समग्रता में समेटने वाला संकलन है.

समय की कमी या लेखकीय झिझक सरीखी चीजें आपको बिल्कुल परेशान करती नहीं दिखतीं.

जब आपने किसी से लिखने का वादा कर रखा हो और उसकी डेडलाइन हो तो सब तरफ से ध्यान हटाकर आपको लिखना ही पड़ता है. इस मामले में मैं खुद पर अमेरिकी व्यंग्यकार ए.जे. लिबलिंग की कहावत लागू करता हूं: मैं किसी भी तेज लिखने वाले से बेहतर लिखता हूं और किसी भी बेहतर लिखने वाले से तेज लिखता हूं.

● आपने जिन दो संस्थानों—संयुक्त राष्ट्र और कांग्रेस—के लिए काम किया, हाल के दिनों में वे दोनों ही साख के संकट से गुजरते दिखे हैं. क्या उनके बारे में लिखकर उनकी प्रतिष्ठा बहाल करने का ख्याल आपके दिमाग में कभी आया?

संयुक्त राष्ट्र में रहते हुए मैंने शांति रक्षा पर कुछ शोधपूर्ण लेखन किया था. सियासी दुनिया में रहते हुए मैंने किताबें और 100 से ज्यादा लेख लिखे और कांग्रेस का बचाव या उसे प्रोमोट करने से उनका कोई वास्ता न था.

देखिए, मैंने अपने सिद्धांत अपनी पार्टी से नहीं लिए हैं, राजनैतिक प्रतिबद्धता लेकर मैं इसमें दाखिल हुआ था. यही चीज मुझे उन ज्यादातर नेताओं से अलग करती है जिनकी प्रतिबद्धता पार्टी में रहते हुए बनती है न कि विचारों के साथ मुठभेड़ से.

आपका पिछला उपन्यास 20 साल पहले आया था. फिक्शन लिखना छोड़ तो नहीं दिया आपने?
साहित्य रचने के सुख से अपने को हमेशा के लिए वंचित कर लूं, ऐसी मेरी बिल्कुल मंशा नहीं है. लेकिन राजनैतिक जीवन के जिस मकाम पर अभी मैं खड़ा हूं, वहां बहुत सारा और अधूरा काम पड़ा है जिसे करना जरूरी है. ऐसे में किसी बड़े उपन्यास के उपक्रम में गंभीरता से जुट पाना मेरे लिए अभी  संभव नहीं.

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