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किताबेंः प्रकृति, परंपरा और विज्ञान के छोर

लेखक ने बड़े ही कौशल से उसके मारे जाने और प्रकट होने की घटना को प्रतीकात्मक बनाते हुए यह बताने का प्रयास किया है कि जब तक आदिवासियों का शोषण जारी रहेगा.

मिशन होलोकॉस्ट राकेश कुमार सिंह मिशन होलोकॉस्ट राकेश कुमार सिंह

दिनेश कुमार

राकेश कुमार सिंह का उपन्यास ऑपरेशन महिषासुर इस सचाई को रेखांकित करता है कि जल, जंगल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की लूट जब तक जारी रहेगी, आदिवासियों का उसके विरुद्ध हिंसक संघर्ष भी चलता रहेगा. आदिवासी समस्या के मूल में पूंजीवादी लूट है. उपन्यास की कथाभूमि इसी विचार के इर्द-गिर्द केंद्रित की गई है. हिंसक संघर्ष आदिवासियों का चयन नहीं बल्कि विकल्पहीनता की स्थिति है.

लोकतांत्रिक प्रणाली की इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है कि जिन चुनी हुई सरकारों को आदिवासी हितों की रक्षा करनी चाहिए, वे कॉर्पोरेट के साथ मिलकर उन्हें अमानवीय स्थितियों में धकेल रही हैं. उपन्यास प्रस्तावित करता है कि आदिवासियों के आंदोलन और संघर्ष को नक्सलवाद, उग्रवाद या राष्ट्रद्रोह के रूप में देखने की जगह उसे कॉर्पोरेट के चंगुल में फंसी लोकतांत्रिक प्रणाली की घोर नाकामी के तौर पर देखा जाना चाहिए.

लेखक के पूर्ववर्ती उपन्यासों की तरह यह उपन्यास भी कथारस से भरपूर है. उसी का कमाल है कि आदिवासी जीवन के विविध आयामों को समेटे हुए लगभग सवा तीन सौ पृष्ठों का यह उपन्यास आद्यंत पाठकों को बांधे रखता है. इसका केंद्रीय पात्र एक विधि सलाहकार महेश असुर है जो एक इस्पात कंपनी में आदिवासी मजदूरों को न्यूनतम मानवीय सुविधाएं दिलाने के संघर्ष में शामिल होता है. लेखक ने बड़े ही कौशल से उसके मारे जाने और प्रकट होने की घटना को प्रतीकात्मक बनाते हुए यह बताने का प्रयास किया है कि जब तक आदिवासियों का शोषण जारी रहेगा, महेश असुर पैदा होते रहेंगे.

दूसरी ओर हाल ही में आए अपने ताजा उपन्यास मिशन होलोकॉस्ट में राकेश कुमार सिंह ने विज्ञान कथा और जासूसी कथा के मेल से एक अद्भुत कथानक का निर्माण किया है. उपन्यास एक ऐसे खोए हुए देश की दास्तान है जो अपनी तमाम विशिष्टताओं को खोकर भूगोल का एक नक्शा मात्र रह गया है.

शायद इसीलिए अतिविकसित रोबोट जब भारत खोजने आता है तो उसे नक्शे के मुताबिक सभी राज्य तो यथास्थान मिलते हैं पर उनके बीच का भारतवर्ष लापता मिलता है. यह आश्चर्यजनक है कि कैसे एक संपूर्ण राष्ट्र अपने समाज और अपनी संस्कृति समेत सदियों के नियत भूगोल के बीच इस तरह गुम हो सकता है? यही वह केंद्रीय प्रश्न है जो उपन्यास हमारे लिए छोड़ जाता है. ठ्ठ

ऑपरेशन महिषासुर
राकेश कुमार सिंह
भारतीय ज्ञानपीठ,
नई दिल्ली
कीमत: 620 रुपए

मिशन होलोकॉस्ट
राकेश कुमार सिंह
सामयिक प्रकाशन, दिल्ली
कीमत: 250 रुपए

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