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किताबेंः पीड़ा का प्रेम

देश, समाज, भाषा के प्रति गहरी संवेदनाओं वाला कविता संग्रह

पेड़ो पर हैं मछलियां पेड़ो पर हैं मछलियां

पेड़ों पर हैं मछलियां

लेखकः प्रतिभा चौहान

प्रकाशकः बोधि प्रकाशन, जयपुर

कीमतः 125 रु.

देश, समाज, भाषा के प्रति गहरी संवेदनाओं वाला कविता संग्रह

देश, समाज, भाषा के प्रति गहरी संवेदनाओं वाला कविता संग्रह

अपने पहले ही काव्य संग्रह पेड़ों पर हैं मछलियां में प्रतिभा चौहान ने जिस परिपक्वता का परिचय दिया है, वह बहुत कम देखने को मिलता है. इधर की हिंदी कविता में दो अतिवादी प्रवृत्तियां देखने को मिल रही हैं. एक तरफ, कविता को लगभग अबूझ बना दिया जा रहा है तो दूसरी तरफ  कविता के नाम पर यथार्थ की स्थूल अभिव्यक्ति हो रही है. प्रतिभा ने इन दो अतिवादों के बीच से अपना काव्य मार्ग बनाया है. संप्रेषणीयता से समझौता किए बिना यथार्थ को कलात्मक तरीके से अभिव्यक्ति कर देना उनकी विरल विशेषता है. स्त्रियों की शुरुआती कविताओं में प्रायः निजी अनुभवों की बहुलता होती है. इस कारण उनकी कविताओं की विषय-वस्तु अत्यंत सीमित होने के साथ ही एकरस भी हो जाती हैं. प्रतिभा के यहां विषयगत विस्तार बहुत है. उनकी कविताओं में स्त्री की निजी अनुभूति की जगह देश, समाज, राष्ट्र, पर्यावरण, विस्थापन, भाषा आदि की चिंता अधिक है. यह विशिष्टता ही उनकी असल ताकत है. विस्थापन का दर्द में वे जहां विस्थापित मनुष्य की पीड़ा और हताशा को अभिव्यक्ति करती हैं तो जज्बा में मनुष्य और प्रकृति के बीच के एकतरफा रिश्ते को—उसमें बांटने का जज्बा था/और आदमी में लेने का. इस संग्रह में कुछ अच्छी प्रेम कविताएं भी हैं. इन कविताओं में समर्पण का भाव अधिक मुखरित हुआ है. कई जगह तो अपने अस्तित्व को मिटा देने की उदात्तता है. बावजूद इसके, कविताओं में भावुकता की जगह बौद्धिकता का संस्पर्श है. बिंब और प्रतीकों का बेहतरीन इस्तेमाल है. भावपक्ष के साथ रूप पक्ष भी उतना ही सुंदर है. —दिनेश कुमार

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