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पुस्तक समीक्षाः रोमांटिक स्वप्न भंग का कथाकार

हिदीं कहानी में दूधनाथ जी ने जो विधागत प्रयोग किए उससे एक नया रचना जगत उभरकर आया जिस पर इस महाविशेषांक में संकलित अनेक लेखों में इंगित किया गया है.

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साहित्य विकल्प के संपादक डॉ. विजय अग्रवाल हैं. इसे साहित्य भंडार, इलाहाबाद से प्रकाशित किया गया है.

अपने प्रतिरोधी लेखन और विचारों के कारण आजीवन चर्चा में रहे विश्रुत कथाकार एवं संस्मरण लेखक दूधनाथ सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को सामने लाता यह महाविशेषांक बहुत गहरे उतरकर उनके लेखन से मुठभेड़ की कोशिश है. इसमें कोई भी लेख या संस्मरण ऐसा नहीं है जिसमें लेखक को लेकर अतिरंजनापूर्ण निष्कर्ष परोसा गया हो.

हिदीं कहानी में दूधनाथ जी ने जो विधागत प्रयोग किए उससे एक नया रचना जगत उभरकर आया जिस पर इस महाविशेषांक में संकलित अनेक लेखों में इंगित किया गया है. दूधनाथ जी ने उपन्यास, कहानी, कविता समेत सभी साहित्य रूपों में विपुल लेखन किया और चर्चित हुए.

असल में वे रोमांटिक स्वप्नभंग के कथाकार थे. विवेचित पत्रिका में संकलित काशीनाथ सिंह, विश्वनाथ त्रिपाठी, ममता कालिया, अली अहमद फातमी, हरिश्चंद्र मिश्र, धनंजय वर्मा, प्रभृति के संस्मरण एवं मूल्यांकन खंड के तहत खगेंद्र ठाकुर, अजय तिवारी, राजेश जोशी, अखिलेश, अरुण कुमार, आदि के लेख दूधनाथ की कहानियों, नाटक, कविता और खास तौर पर उनकी विक्चयात कृति निरालाः आत्महंता, आस्था एवं महादेवी पर बहुत ही गहरे उतरकर विश्लेषण कर उसके निष्कर्षों को सामने लाते हैं. इस अंक में दूधनाथ के लेखन के जिज्ञासुओं के लिए विपुल सामग्री पेश की गई है, जो बहसतलब है.

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