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पुस्तक समीक्षाः बंद कमरों की घुटन में ताजी हवा

लेखक का यही अंदाजेबयां इस किताब को पर्सनालिटी डेवलपमेंट या डिप्रेशन मैनेजमेंट की चलताऊ किताबों से अलग कर देता है.

जीवन संवाद लेखक: दयाशंकर मिश्र जीवन संवाद लेखक: दयाशंकर मिश्र

ओमप्रकाश बबेले

कोरोना काल शुरू होने से कुछ दिन पहले आई दयाशंकर मिश्र की किताब जीवन संवाद डिप्रेशन और आत्महत्या के खिलाफ चल रही लेखक की मुहिम का हिस्सा है. इसके छोटे-छोटे लेखों को पढ़ते हुए लगता है कि यही बात मैंने या किसी जानने वाले ने थोड़ी देर पहले सोची थी. या फिर ऐसा लगता है कि जो बात लेखक भाव के आवेग में सूत्र की तरह कह गया है, वह तो हमारी रोजमर्रा की ङ्क्षजदगी की कहानी है.

लेखक का यही अंदाजेबयां इस किताब को पर्सनालिटी डेवलपमेंट या डिप्रेशन मैनेजमेंट की चलताऊ किताबों से अलग कर देता है. यहां लेखक किसी एक्सपर्ट की तरह तनावग्रस्त व्यक्ति को उपदेश या सलाह नहीं देता, बल्कि वह तो एक आम मध्यमवर्गीय इंसान की तरह तनाव की उन जड़ों को खोजता है जो हमारे कमरे-दो कमरे के मकानों में चुपचाप फैल जाती हैं सूत्रों तक ले जाती है, जहां तनाव के रेशे खिंचते हैं और बात कहीं से कहीं पहुंच जाती है.

लेखक ने अपने लंबे अनुभव से इस बात को समझा है कि तनाव और आत्महत्या तक ले जाने वाले बुनियादी कारणों में गृह कलह, आर्थिक संकट, बच्चों पर पढ़ाई का दबाव और नितांत अकेलेपन की पीड़ा शामिल है.

कभी-कभी ऐसी स्थिति आती है कि व्यक्ति पास घर के बाहर कोई सुनने वाला होता नहीं और घर के भीतर अहंकार का टकराव संवाद की संभावनाएं खत्म कर चुका होता है. आत्महत्या और डिप्रेशन जैसे विषय में अपनी शैली में हिंदी में लिखी गई यह अनूठी किताब पाठकों को तनाव से बचने का नया नजरिया उपलब्ध कराएगी. 

—ओमप्रकाश बबेले

किताबः जीवन संवाद
लेखक:
दयाशंकर मिश्र
प्रकाशन: संवाद प्रकाशन
कीमत: 300 रु.

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