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साहित्य

दिल्ली में नींद

किताबेंः नींद के इर्द-गिर्द

17 जून 2021

बेशक संग्रह की एक कहानी का शीर्षक है दिल्ली में नींद लेकिन गहराई से देखा जाए तो नींद हर कहानी के केंद्र में है.

ह्यूमनकाइंड: मानवजाति का आशावादी इतिहास

किताबेंः मानव इतिहास का प्रेरक पहलू

03 जून 2021

सभ्यता शांति और प्रगति का पर्याय तथा जंगली जीवन युद्ध और पतन का पर्याय बन गया. लेकिन ब्रेख़मान की राय अलग है.

टूटे पंखों से परवाज तक

किताबेंः दलित स्त्री आत्मकथा के मायने

28 मई 2021

उच्च शिक्षा संस्थानों में स्थायी नियुक्तियों पर स्थायी विराम लग रहा है तब क्या सुमित्रा जैसी युवतियां ‘अपनी प्रतिभा और श्रम’ के बल पर वांछित मुकाम तक पहुंच सकेंगी?

तथ्यों के आईने में पहल

वैचारिक परिवार गढ़ा था पहल ने

23 अप्रैल 2021

हिंदी में प्रतिरोध की जो रचनाशीलता थी, उस धारा के जो लेखक थे, उन सबको मिलाकर उन्होंने एक कुटुंब जैसा बना दिया.

विदुषी गिरिजा देवी विशेषांक

अक्षरों में उतरतीं अप्पाजी

15 अप्रैल 2021

गिरिजा देवी गायिकी में अपने समकालीनों से, अगर वे वाद्यों में बड़े नाम हैं तो भी, इसीलिए अलग थीं कि प्रशिक्षण उनका दूसरा बड़ा परिचय बना.

छायानट:  विदुषी गिरिजा देवी विशेषांक

किताबेंः अक्षरों में उतरतीं अप्पाजी

14 अप्रैल 2021

उनकी शिष्या सुनंदा शर्मा का संस्मरण इस विशेषांक का सबसे सुगठित और सर्वांग लेख है. अप्पाजी जी ने शिष्यों को नकल की जगह अपना मूल बचाए रखने को कहा

मिशन होलोकॉस्ट राकेश कुमार सिंह

किताबेंः प्रकृति, परंपरा और विज्ञान के छोर

10 अप्रैल 2021

लेखक ने बड़े ही कौशल से उसके मारे जाने और प्रकट होने की घटना को प्रतीकात्मक बनाते हुए यह बताने का प्रयास किया है कि जब तक आदिवासियों का शोषण जारी रहेगा.

मोहम्मद रफ़ी स्वयं ईश्वर की आवाज़

किताबेंः शब्दों के कैनवस पर रफी

10 अप्रैल 2021

1924 में अमृतसर के एक छोटे-से गांव में जन्म से लेकर 1980 में बंबई में उनकी मृत्यु के बीच के कुल 56 बरसों के समय को खासी खोजबीन और शोध के बाद प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया गया है.

ब्लाइंड स्ट्रीट

किताबेंः चाहिए पूर्वाग्रह से परे एक दृष्टि

20 मार्च 2021

ये कहानियां आपस में मिलती भी हैं और कमोबेश एक दूसरे को प्रभावित भी करती हैं. प्रदीप सौरभ के लेखन की यह शैली अनूठी है.

कुलभूषण का नाम दर्ज कीजिए  अलका सरावगी

किताबेंः संवेदना के साथ समाजशास्त्र

11 मार्च 2021

उपन्यास का बड़ा हिस्सा हिंदू शरणार्थियों की दुर्दशा पर केंद्रित है.

अमिताभ घोष

एक सरीखी सरजमीं पर

11 मार्च 2021

महामारी के दौरान भी कई अच्छी बातें देखने को मिलीं. उन्हीं में से एक था इस साल के लाहौर लिटरेरी फेस्टिवल में कई हिंदुस्तानियों का हिस्सा लेना.