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साहित्य

परियों के बीच

किताबेंः समलैंगिक प्रेम की दास्तान

19 सितंबर 2021

भले उसकी उपस्थिति हमेशा से रही हो. लेकिन जिस रूप में यह संबंद्ध दो औरतों, मशहर तवायफ चपला बाई और शायरा नफीस बाई के माध्यम से उद्घाटित किया गया है.

चले साथ पहाड़

किताबेंः यात्राओं का एक नया संसार

11 सितंबर 2021

अरुण कुकसाल की किताब चले साथ पहाड़ जहां पहाड़ों के सौंदर्य और विषमता बोध को एक साथ लक्षित करती है .

पिशाच: एक फेसबुक पोस्ट, कई हाई प्रोफाइल मर्डर

किताबेंः पल-पल बदलता हत्याओं का रहस्य

07 सितंबर 2021

पिशाच की कहानी एक नामीगिरामी साहित्यकार, जनवादी कवि की क्रूर हत्या से शुरू होती है.

रंगमंच की कहानी  

किताबेंः स्थापना मौलिक अवधारणाओं की

19 अगस्त 2021

एब्सर्डिटी या विसंगति के नाटकों का विश्लेषण करते हुए वे स्पष्ट कहते हैं कि हमारे यहां विसंगति फैशन के तौर पर आई.

कशकोल: सफ़ीना-ए-उर्दू के नाख़ुदाओं की दास्तानें

किताबेंः मोती भरा कमंडल

07 अगस्त 2021

''ग़ालिब के परस्तारों में अकेले नेहरू ही नहीं थे. सियासी नजरिये से दो अलग-अलग ख़ेमों में खड़े लीडरान इस जगह एकमत रहे हैं.’’

वी.पी. सिंह, चंद्रशेखर, सोनिया गांधी और मैं

किताबेंः विवादास्पद युग का संपूर्ण विश्लेषण

04 अगस्त 2021

यह किताब भारतीय राजनीति के सबसे विवादास्पद युग का संपूर्ण विश्लेषण है जो रोचकता, बेबाकी और भाषा के प्रवाह से लबालब है.

एक और मीटिंग जयवर्धन

किताबेंः एक लेखक दो तरह के नाटक

04 अगस्त 2021

ज्यादातर कॉमिक फ्लेवर में लिखने वाले जयवर्धन का इसके अलावा एक सीरियस ढंग से लिखा गया नाटक 'कालपुरुष’ भी हाल में छपकर आया है.

मेरा ओलियागांव

किताबेंः आत्म का सामाजिक विस्तार

19 जुलाई 2021

कोसी का घटवार जैसी अमर प्रेम कहानी के लिए समादृत शेखर जोशी ने जीवन के आठवें दशक में अपने बचपन के दिनों और जगहों को याद किया है.

स्वांग

किताबेंः सिर्फ स्वांग ही असली है

16 जुलाई 2021

स्वांग यह साफ करता है कि दरअसल बहुत विकट वाला ड्रामा चल रहा है. सारे पात्र इतना शानदार अभिनय कर रहे हैं कि पता ही नहीं चला रहा, यह ड्रामा है. स्वांग की कामयाबी भी इसी में है.

राजेंद्र गुप्ता

सोशल मीडिया पर कविता का समां

24 जून 2021

हिंदी कविता चैनल का हिस्सा रह चुके ऐक्टर राजेंद्र गुप्ता अब अपने यूट्यूब चैनल राजेंद्र गुप्ता रिसाइट्स पर बिना तामझाम के रोज एक कविता सुना रहे हैं.

धूमिल ग्रंथावली

किताबेंः एक चेहरा जो पूरे आदमी का है

24 जून 2021

नामवर सिंह आलोचना पत्रिका के संपादक थे और विष्णु खरे सह संपादक. खरे के कहने पर ही मैंने ये सारी चिट्ठियां एक छोटे-से नोट के साथ छपने के लिए दे दी थीं.

दिल्ली में नींद

किताबेंः नींद के इर्द-गिर्द

17 जून 2021

बेशक संग्रह की एक कहानी का शीर्षक है दिल्ली में नींद लेकिन गहराई से देखा जाए तो नींद हर कहानी के केंद्र में है.

ह्यूमनकाइंड: मानवजाति का आशावादी इतिहास

किताबेंः मानव इतिहास का प्रेरक पहलू

03 जून 2021

सभ्यता शांति और प्रगति का पर्याय तथा जंगली जीवन युद्ध और पतन का पर्याय बन गया. लेकिन ब्रेख़मान की राय अलग है.

टूटे पंखों से परवाज तक

किताबेंः दलित स्त्री आत्मकथा के मायने

28 मई 2021

उच्च शिक्षा संस्थानों में स्थायी नियुक्तियों पर स्थायी विराम लग रहा है तब क्या सुमित्रा जैसी युवतियां ‘अपनी प्रतिभा और श्रम’ के बल पर वांछित मुकाम तक पहुंच सकेंगी?

तथ्यों के आईने में पहल

वैचारिक परिवार गढ़ा था पहल ने

23 अप्रैल 2021

हिंदी में प्रतिरोध की जो रचनाशीलता थी, उस धारा के जो लेखक थे, उन सबको मिलाकर उन्होंने एक कुटुंब जैसा बना दिया.

विदुषी गिरिजा देवी विशेषांक

अक्षरों में उतरतीं अप्पाजी

15 अप्रैल 2021

गिरिजा देवी गायिकी में अपने समकालीनों से, अगर वे वाद्यों में बड़े नाम हैं तो भी, इसीलिए अलग थीं कि प्रशिक्षण उनका दूसरा बड़ा परिचय बना.

छायानट:  विदुषी गिरिजा देवी विशेषांक

किताबेंः अक्षरों में उतरतीं अप्पाजी

14 अप्रैल 2021

उनकी शिष्या सुनंदा शर्मा का संस्मरण इस विशेषांक का सबसे सुगठित और सर्वांग लेख है. अप्पाजी जी ने शिष्यों को नकल की जगह अपना मूल बचाए रखने को कहा

मिशन होलोकॉस्ट राकेश कुमार सिंह

किताबेंः प्रकृति, परंपरा और विज्ञान के छोर

10 अप्रैल 2021

लेखक ने बड़े ही कौशल से उसके मारे जाने और प्रकट होने की घटना को प्रतीकात्मक बनाते हुए यह बताने का प्रयास किया है कि जब तक आदिवासियों का शोषण जारी रहेगा.

मोहम्मद रफ़ी स्वयं ईश्वर की आवाज़

किताबेंः शब्दों के कैनवस पर रफी

10 अप्रैल 2021

1924 में अमृतसर के एक छोटे-से गांव में जन्म से लेकर 1980 में बंबई में उनकी मृत्यु के बीच के कुल 56 बरसों के समय को खासी खोजबीन और शोध के बाद प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया गया है.

ब्लाइंड स्ट्रीट

किताबेंः चाहिए पूर्वाग्रह से परे एक दृष्टि

20 मार्च 2021

ये कहानियां आपस में मिलती भी हैं और कमोबेश एक दूसरे को प्रभावित भी करती हैं. प्रदीप सौरभ के लेखन की यह शैली अनूठी है.

कुलभूषण का नाम दर्ज कीजिए  अलका सरावगी

किताबेंः संवेदना के साथ समाजशास्त्र

11 मार्च 2021

उपन्यास का बड़ा हिस्सा हिंदू शरणार्थियों की दुर्दशा पर केंद्रित है.