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साहित्य

क़लम जिंदा रहेगा

जब तलक ज़िंदा क़लम है...

07 जून 2022

लड़कियों के हाथ में क़लम के साथ तलवार भी पकड़ाने की पैरवी से फ़ैज़ लुधियानवी की 'क़लम और तलवार’ की लाइनें बरबस याद आ जाती हैं, जिनसे आलोक की बात और स्पष्ट हो जाती है.

दूर-दूर से : झीनी बीनी चदरिया का एक दृश्य

'परवाह आपको करनी होगी!’

06 जून 2022

रंगमंच के शिक्षक और डॉक्यूमेंटरी निर्माता रितेश शर्मा ने अपनी फिल्म झीनी बीनी चदरिया के लिए न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल (एनवाइआइएफएफ) में बेस्ट डेब्यू फीचर फिल्म का अवार्ड जीता है. 

ओपन हाउस

पसंद अपनी चुनाव अपना

17 मई 2022

टीवी विज्ञापन की दुनिया की एक बड़ी शख्सियत पीयूष पांडेय ने इस किताब में अपने पेशे और उससे जुड़ी नैतिकता पर सवाल-जवाब शैली में खुलकर बात की है. यहां पेश है किताब का एक दिलचस्प अध्याय.

कचहरी की चकल्लस

न्याय के लिए लड़ाई लड़ने की जुझारू ...

01 अप्रैल 2022

झगड़ू इंडिया का नहीं बल्कि उस भारत का प्रतिनिधित्व करता है जो हर चौक चौराहे पर अपने और अपने परिवार के लिए रोटी, कपड़ा जुटाने के लिए जद्दोजहद करता है.

नेताजी, गुमनामी बाबा और सरकारी झूठ

पुस्तक अंशः नेताजी का विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ ही न था?

22 फरवरी 2022

ताइवान में मिले दस्तावेज बताते हैं कि अगस्त से अक्तूबर 1945 के बीच ताईपेई के पास युद्धबंदियों को ले जा रहा एक अमेरिकी विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, इसके अलावा वहां कोई हादसा हुआ ही नहीं.

नकटौरा

उपन्यास अंशः यह चौदहवां ब्लास्ट

23 जनवरी 2022

इतिहास में आ जुड़े इन सियाह पन्नों की कल्पना किसे थी. वल्लभभाई पटेल जीवित होते तो सहज विश्वास कर पाते कि हमारी केंद्र सरकार तुष्टिकरण का पर्याय हो रही है.

अमर देसवा

पुस्तक अंशः विपदा केवल उस्मानाबाद की न थी

15 जनवरी 2022

‘’बाप-बेटे के बीच चल रही मौन प्रतियोगिता को बेटी दो घंटे से महसूस कर रही थी. उससे रहा नहीं गया. सूनी सड़क पर जैसे कोयल कूकी, 'मेडल नहीं मिलेगा किसी को. रुककर पानी तो पी लो. मुझे भी प्यास लगी है.”

मूर्ति-भंजन लेखिका: क्षमा कौल

पुस्तक अंशः इसका अर्थ है कि हमारी वापसी कठिन है अब

26 दिसंबर 2021

कश्मीर से विस्थापन की पीड़ा को गहरी संवेदना और साहस के साथ व्यक्त करती आईं मशहूर लेखिका क्षमा कौल के नए उपन्यास मूर्ति-भंजन का एक अध्याय.

भारतीय संविधान

पुस्तक अंशः संशोधन प्रस्ताव वापस

23 दिसंबर 2021

वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय की यह पुस्तक संविधान बनने से जुड़ी घटनाओं के पीछे की कहानियां दिलचस्प ढंग से कहती है. उक्त शीर्षक वाला एक अध्याय हम यहां छाप रहे हैं.

आदिवासी कला-कृति

दीपावली विशेषः ग्रंथ से परे हमारा धर्म

14 नवंबर 2021

झारखंड में आदिवासियों के त्योहार सरहुल में आदिवासी मांदर, ढोल बजाते, नाचते, गाते शामिल होते हैं.

महान कथाएं विभिन्न व्याख्याओं के जरिए खुद को उद्घाटित करती हैं

दीपावली विशेषः जब रावण पर हावी हुई सीता

14 नवंबर 2021

हांगकांग में स्कूली बच्चों के साथ रामायण मंचित करते हुए इस सत्य से परिचय हुआ कि महान कथाएं विभिन्न व्याख्याओं के जरिए खुद को उद्घाटित करती हैं.

आदि पर्व संगठित धर्म जिन मूल्यों पर जोर देता है, उन्हें आदिवासी समाज बड़ी सहजता से जीता है

दीपावली विशेषः अंधकार है उम्मीद जहां

14 नवंबर 2021

शहर में हर पर्व का संबंध प्राय: किसी की जीत-हार, हत्या, अंधकार-प्रकाश से होता है लेकिन आदिवासी समाज में त्योहार प्रकृति के उत्सव के प्रतीक होते हैं. अंधकार बुराई का नहीं बल्कि नए जीवन की आस, मनुष्य की आस्था और समर्पण का चिन्ह है.

अनुक अरुदप्रगासम

किताबेंः सम्मान को लेकर उदासीन अनुक

13 नवंबर 2021

अनुक अरुदप्रगासम बुकर पुरस्कार के लिए नामांकन के बाद आई प्रशंसा की बौछार के फेर में आने वालों में से नहीं हैं.

कोड काकोरी

किताबेंः आज के काकोरी का सस्पेंस

27 अक्टूबर 2021

कहानी में ट्रेन, ब्रिटिश कॉइन्स और एक जर्मन माउजर में छिपा है वह कोड जिसे डीकोड करने की जद्दोजदहद में छिपा है पूरा का पूरा सस्पेंस और थ्रिल.

उलटी गिनती

किताबेंः हर शिक्षित हिंदीभाषी के लिए अनिवार्य पुस्तक

19 अक्टूबर 2021

1,900 सरकारी कंपनियों की सेल लगाई जाए क्योंकि ये कंपनियां करदाता के पैसे से चलती हैं और इनसे सरकार और शेयर बाजार के निवेशक को कुछ नहीं मिलता.

विक्रम सेठ

फुरसतः छंदों में बुना जीवन

17 अक्टूबर 2021

अ सुटेबल बॉय पर बीबीसी की ओर से तैयार सीरीज के चर्चाओं में रहने के बाद अब एक नए संग्रह की वजह से मशहूर लेखक विक्रम सेठ कवि के रूप में अपनी उपलब्धियों को लेकर खबरों में हैं. स्पीकिंग टाइगर से सात खंडों में छपे इस संग्रह में सेठ की विलक्षण प्रतिभा के व्यापक आयाम दिखते हैं. इंडिया टुडे से उनकी एक दुर्लभ बातचीत:

शिवकुमार यादव

किताबेंः एक कथाकार के आयाम

08 अक्टूबर 2021

आलोचना सम्राट नामवर सिंह भी एक पुरानी टिप्पणी में उनकी कहानियों में ब्यौरे और तथ्यों के हावी होने की बात कहते हैं.

बाइज़्ज़त बरी

किताबेंः आतंक से लड़ने के नाम पर सरकारी आतंक

06 अक्टूबर 2021

पुलिस उनसे इस धमाके की जिम्मेदारी लेने के लिए अड़ी हुई थी लेकिन डार 'नाकरदा गुनाह’ कबूल करने को तैयार नहीं थे.

परियों के बीच

किताबेंः समलैंगिक प्रेम की दास्तान

19 सितंबर 2021

भले उसकी उपस्थिति हमेशा से रही हो. लेकिन जिस रूप में यह संबंद्ध दो औरतों, मशहर तवायफ चपला बाई और शायरा नफीस बाई के माध्यम से उद्घाटित किया गया है.

चले साथ पहाड़

किताबेंः यात्राओं का एक नया संसार

11 सितंबर 2021

अरुण कुकसाल की किताब चले साथ पहाड़ जहां पहाड़ों के सौंदर्य और विषमता बोध को एक साथ लक्षित करती है .

पिशाच: एक फेसबुक पोस्ट, कई हाई प्रोफाइल मर्डर

किताबेंः पल-पल बदलता हत्याओं का रहस्य

07 सितंबर 2021

पिशाच की कहानी एक नामीगिरामी साहित्यकार, जनवादी कवि की क्रूर हत्या से शुरू होती है.