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सुर्खियों के सरताजः कुछ खट्टा, कुछ मीठा

महामारी और लॉकडाउन ने सिनेमाघरों को सूना कर दिया तो एक्टरों और दर्शकों दोनों के लिए ओटीटी प्लेटफॉर्म बन गया वरदान

दिल्ली में आठ महीने बाद 15 अक्तूबर को कोविड प्रोटोकॉल के साथ एक पीवीआर थिएटर खुला दिल्ली में आठ महीने बाद 15 अक्तूबर को कोविड प्रोटोकॉल के साथ एक पीवीआर थिएटर खुला

सुर्खियों के सरताज
कोविड-19: मनोरंजन

मनोरंजन उद्योग में एकता कपूर के लिए दो दशकों के सफर में चढ़ाव के अवसर अधिक, लेकिन उतार के मौके बहुत थोड़े रहे हैं. फिर भी इन उतार-चढ़ावों ने उन्हें कभी वैसी उथल-पुथल के लिए तैयार नहीं किया जो महामारी के बाद हुए लॉकडाउन में मची. चार महीने के लिए उनके टीवी शो का निर्माण कार्य ठप हो गया था, जिससे शूटिंग पर निर्भर रहने वाले दिहाड़ी मजदूरों के पास आय का कोई स्रोत नहीं बचा था.

कपूर कहती हैं, ''ऐसा लगता था जैसे हम कहीं अटक गए हैं. जितना संभव हो सका, हमने उतने कर्मचारियों और फ्रीलांसरों का ध्यान रखने की कोशिश की. लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह दौर बहुत दर्दनाक था और बेरोजगारी का बड़ा कारण बना.’’

उनके मनोरंजन साम्राज्य का एक हिस्सा तो जूझ रहा था, लेकिन दूसरे हिस्से, उनके स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म आल्टबालाजी, ने 2020 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. इसकी सदस्यता में 100 प्रतिशत की उछाल देखी गई और ये अधिकांश नए ग्राहक दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों के दर्शक थे. सस्ते सदस्यता शुल्क और 69 शो की एक भरी-पूरी वीडियो लाइब्रेरी के साथ, उसने 85 लाख मासिक सक्रिय ग्राहकों को जोड़ा है और 3.5 करोड़ से अधिक कुल ग्राहकों के साथ यह नेटफ्लिक्स जैसे प्रतियोगियों की तुलना में बहुत आगे है. सिनेमाघर सात महीने के लिए बंद थे. इसलिए कपूर, जो फिल्म निर्माता भी हैं, ने अपनी फिल्म डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे (नेटफिल्क्स पर) को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया.

टीवी और फिल्मों के लिए झटके के बावजूद कपूर का मानना है कि भविष्य में तीनों प्रारूप साथ-साथ चल सकते हैं. वे कहती हैं, ''टेलीविजन परिवार के साथ, फिल्में समाज के साथ तो डिजिटल निजी मनोरंजन के लिए है. मैं नहीं मानती कि ये तीनों एक-दूसरे को खा रहे हैं. अपने दर्शकों को ध्यान में रखते हुए, टीवी की सामग्री थोड़ी वेनिला जैसी, जिसमें सभी दर्शक वर्ग फिट हो सकते हैं; व्यक्तिगत मनोरंजन के साथ सामग्री थोड़ी उत्तेजक हो जाती है.’’

2020 में ओटीटी प्लेटफॉर्मों के सूचना-प्रसारण मंत्रालय के दायरे में आने के साथ चिंताएं हैं कि आल्टबालाजी को अपनी सामग्री को लेकर संभलना होगा और हो सकता है कि उसे गंदी बात जैसे अपने सबसे लोकप्रिय शो को बदलना पड़े. कपूर कहती हैं, ''कुछ चीजों पर अंकुश लग जाएगा, लेकिन मंत्रालय के लिए मेरे मन में बहुत सम्मान है. मंत्रालय जरूर देखेगा कि निर्माताओं के हित सुरक्षित रहें और स्मार्ट तथा दिलचस्प प्रोग्रामिंग खेल से पूरी तरह बाहर न हो जाए.’’ 

जैसे-जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म फलते-फूलते गए, देश में सिनेमाघरों की स्थिति नाजुक होती चली गई. लंबे बंद को झेलने में असमर्थ और कोई सरकारी सहायता न मिलने से, पूरे देश में कम से कम 1,500-2,000 सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों के बंद हो जाने की आशंका है. पिछले आठ महीनों में विभिन्न भाषाओं की 90 से अधिक फिल्मों के सिनेमाघरों की बजाए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने से सिनेमाघरों की हालत और खराब हुई है और सिनेमाघर मालिकों के पास दर्शकों के लिए पेश करने को कम नई फिल्में उपलब्ध हैं.

सरकार सिनेमाघरों को खोलने की अनुमति तीन महीने पहले ही दे चुकी है, लेकिन हंस सिनेमा के राजेंद्र सिंह ने फैसला लिया है कि वे नई दिल्ली के आजादपुर में अपने 1,000 सीटों वाले सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर को नहीं खोलेंगे. उन्होंने सिनेमाघर के 4,000 गज किराए पर अमेजन को दे दिया है. उत्तर प्रदेश के बहराइच और हरदोई में उनके अन्य दो सिनेमाघर भी बंद हैं.

वे पूछते हैं, ''सिनेमाघरों के लिए उत्पाद (फिल्में) कहां हैं? इस समय सिनेमाघर चलाना व्यावहारिक नहीं है.’’ राजेंद्र कहते हैं कि घर में रहने के आदेश के कारण दर्शक अब नेटफ्लिक्स और अमेजन जैसे प्लेटफॉर्मों पर फिल्में देखने के आदी हो चुके हैं और ‘‘नई आदतें’’ इतनी आसानी से नहीं छूटती हैं.

ज्यादातर निर्माता भी नई फिल्में लाने के लिए अनिच्छुक दिखते हैं, जिनमें रिलायंस एंटरटेनमेंट भी है जिसने सूर्यवंशी और ’83 जैसी दो बड़ी फिल्में रोक रखी हैं. वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स, आमिर खान अभिनीत लाल सिंह चड्ढा की सह-निर्माता है, जो निर्माण में पहले से ही एक साल की देर झेल रही है. उसके अजीत अंधारे कहते हैं, ''हर कोई इस बात को लेकर आश्वस्त होना चाहता है कि लोग उस खिड़की तक आएं.’’

जहां कुछ स्टूडियो अभी परिस्थितियों को टटोल रहे हैं, वहीं कुछ ने तो पहले ही ताला मार दिया है. फॉक्स स्टार स्टूडियोज, जिसने संजू और छिछोरे जैसी हिट फिल्में बनाईं, ने इस साल अपने स्टाफ को जाने को कह दिया; यूनिवर्सल पिक्चर्स ने भारत में अपना संचालन बंद कर दिया. कई प्रोडक्शन हाउस ने इस उम्मीद के साथ नए प्रोजेक्ट शुरू किए हैं कि यकीनन थिएटर जल्द ही फिर से प्रासंगिक हो जाएंगे. अंधारे कहते हैं,  ''इतनी अनिश्चितता रहती तो लोग फिल्में बनाने में पैसे नहीं लगा रहे होते. अच्छा संकेत यह है कि हर प्रमुख सितारा आज शूटिंग कर रहा है.’’

हालांकि वेब सीरीज खूब झंडे गाड़ रही हैं. दर्शकों को कहानी सुनाने का यह लंबा फॉर्मेट लुभा रहा है. इस साल मिर्जापुर 2, स्कैम 1992, पाताल लोक, पंचायत, स्पेशल ऑप्स जैसी कई चर्चित वेब सीरीज रिलीज हुईं. जाने-माने डिजिटल मनोरंजन रणनीतिकार प्रभात चौधरी मनोरंजन जगत में बदलाव को बहुत अच्छा मानते हैं.

जयदीप अहलावत, दिव्येंदु या पंकज त्रिपाठी जैसे अभिनेता जिनका ‘‘बॉलीवुड पूरी तरह से उपयोग नहीं कर पा रहा था’’ वे अब फल-फूल रहे हैं. वे कहते हैं, ‘‘अधिक कहानियां परोसी जा रही हैं, अधिक रचनात्मक प्रतिभा निखर रही है, यह सब फिल्म व्यवसाय के लिए भी अच्छा है.’’

नेटफ्लिक्स के भारत में 80 प्रतिशत सदस्य हर हक्रते एक फिल्म देखते हैं. विक्रमादित्य मोटवाने, जिन्होंने सैक्रेड गेक्वस और एके बनाम एके (दोनों नेटक्रिलक्स ओरिजिनल) का निर्देशन किया है, के लिए ओटीटी का उदय बहुत फायदेमंद रहा है. वे कहते हैं, ''एक ऐसा समय भी हम देखेंगे जब थिएटर, लोगों के लिए तमाशा देखने की जगह बन जाएंगे.’’ 

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