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कोविड 19ः क्या 2022 कोविड से राहत दिलाएगा?

ओमिक्रॉन ने हमें दिखाया है कि कोविड के नए स्ट्रेन अभी भी उभर रहे हैं. अगर हमें वायरस को हराना है तो नियंत्रण की कोशिशों में सबसे आगे विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य को रखना होगा और उनके लिए एक सक्षम नीति भी दरकार है.

गगनदीप कंग गगनदीप कंग

साल 2021 का आगाज शानदार तरीके से हुआ था—भारत में कोविड के कम होते मामलों और टीकों के वादे के साथ. उस समय ब्रिटिश वैरिएंट (जिसे अब अल्फा कहा जाता है) का खतरा छाया हुआ था और ब्रिटेन से आने वाली उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था. भारत की टीके की कहानी आगे बढ़ रही थी, हालांकि यह पहले से साफ था कि अग्रणी निर्माताओं की ओर से पेश किए गए खुराकों की संख्या और समय के सुहाने अनुमान पूरे नहीं होने वाले थे.

यह साल के आखिर में साफ नजर आया और टीकाकरण में धीमी वृद्धि हुई तथा 2021 के पहले छह महीनों में खुराकों को हासिल करने के लिए संघर्ष करना पड़ा. खरीद और दान के रूप में खुराकों के शुरुआती बंटवारे के बाद, अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत ने टीके के निर्यात को रोक दिया. फरवरी के उत्तरार्ध में कोविड मामलों में वृद्धि हुई और फिर अगले दो महीनों में तो इसका विस्फोट ही हो गया.

अब, यह सब साफ नजर आता है. एक नया वैरिएंट, धीमा टीकाकरण तथा स्थानीय और लंबी दूरी की यात्रा समेत लोगों के जमावड़े ने खासकर उत्तर भारत में कमजोर स्वास्थ्य प्रणालियों को तबाह करने के लिए पूरा तूफान पैदा कर दिया. जांची-परखी दवा के अभाव में सब कुछ इस्तेमाल करने की हताशा ने भारत में ब्लैक फंगस की दूसरी महामारी पैदा कर दी.

ब्लैक फंगस भारत के लिए असाधारण है और चेतावनी है कि हद से ज्यादा इलाज के बुरे नतीजे भी निकलते हैं. अभी भी इस बात पर विवाद है कि कितने लोग मारे गए, लेकिन कई राज्यों में इसे कम करके बताए जाने की संभावना है.

पहले ही आर्थिक नुक्सान और सामाजिक व्यवधानों से जूझ रहे परिवारों को अस्पतालों में बिस्तर और मदद पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा. घटते मामलों और टीके की आपूर्ति पर एक तर्कहीन फैसले के पलटे जाने के साथ, जून की शुरुआत तक हम बेहतर स्थिति में थे. लेकिन बाकी दुनिया के लिए, डेल्टा की उनकी कहानी अभी शुरू ही हुई थी.

टीकाकरण
सार्स-कोविड2 महामारी से कैसे निपटा जाएगा, इसका पैटर्न 2020 में तैयार हो चुका था. जिन अमीर देशों में टीकों के निर्माण की क्षमता थी उन्होंने टीकों के विकास और परीक्षण में अपने संसाधनों को झोंक दिए. और, जिन अमीर देशों में यह क्षमता नहीं थी, उन्होंने अप्रमाणित टीकों की खुराकों को भी जमा करना शुरू कर दिया.

उनका दांव कामयाब रहा. नए और पुराने प्लेटफॉर्मों ने बेहतर काम किया, और टीकों को विकसित करना आसान था (भले उनका निर्माण आसान नहीं हो) और प्लेटफॉर्म के आधार पर शानदार या अच्छा काम किया. दुनिया के टीकाकरण कार्यक्रम ने एक साल में चार अरब से ज्यादा खुराक कभी भी नहीं बनाए थे. लेकिन इसने 2021 में सार्स-कोविड2 टीके के 10 अरब खुराद बनाए और नौ अरब खुराक दे भी दिए. दुनिया की आबादी के आधे से ज्यादा ने टीके का कम-से-कम एक खुराक ले लिया है.

लेकिन, चाहे वह नैदानिक परीक्षणों, सिक्वेंसिंग या टीका और टीकाकरण का मामला हो, अमीरों और वंचितों के बीच चौड़ी खाई थी. अमीर देशों ने बाकी दुनिया, खासकर अफ्रीका से पहले बूस्टर खुराक देना और बच्चों का टीकाकरण शुरू कर दिया. उन्होंने अपने सबसे कमजोर लोगों—डब्ल्यूएचओ के अनुमान के मुताबिक, आबादी के 20 फीसद—की रक्षा के लिए खुराक हासिल कर लिया.

कम आय वाले देशों में, 10 फीसद से भी कम लोगों को टीके की पहली खुराक मिली. अग्रिम खरीद के बावजूद, कोवैक्स सुविधा अधिक शक्तिशाली राजनैतिक ताकतों की ओर से पीछे धकेल दी गई और 2021 में दो अरब खुराक मुहैया कराने के अपने लक्ष्य को पूरा करने में नाकाम रही. लेकिन अब कम से कम उम्मीद तो है क्योंकि निर्माण बड़े पैमाने पर बढ़ गया है और उच्च-आय वाले देशों में मांग घट गई है.

इससे अधिक खुराकें सुलभ हो गई हैं. 2022 में हमें जितनी जल्दी हो सके यह सुनिश्चित करना होगा कि दुनिया की अधिक से अधिक आबादी सुरक्षित हो. इसके लिए निर्माण और वितरण प्रणाली को मजबूत करने की दोगुनी कोशिश करनी होगी. दरअसल, खतरा यह है कि अगर हम वैश्विक स्तर पर वायरस के प्रसार को कम नहीं करते हैं तो नए वैरिएंट के उभरने का जोखिम कम नहीं होगा.

साल 2021 की शुरुआत में अल्फा के अपने अनुभव के दोहराव के साथ, हम अत्यधिक उत्परिवर्तित ओमिक्रॉन वैरिएंट के नए खतरे का सामना कर रहे हैं. ओमिक्रॉन का सिक्वेंस डेटा बताता है कि हम अभी तक नहीं समझ पाए हैं कि वायरस क्यों और कैसे, और शायद इससे भी अहम कि कहां और किसमें विकसित होते हैं. यह बहुत ज्यादा संक्रामक वायरस है और संभावना है कि वैश्विक स्तर पर प्रमुख स्ट्रेन बनने के लिए यह डेल्टा को पछाड़ देगा.

ओमिक्रॉन पिछले वैरिएंट से कम गंभीर हो सकता है, लेकिन इसमें कई म्युटेशन (उत्परिवर्तन) हुए हैं. ऐसे में पहले हुए संक्रमण या मौजूदा टीकों से हासिल प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का इस पर कम असर होता है. सरकार ने इस अप्रत्याशित खतरे से निपटने के लिए यात्रा प्रतिबंध, कर्फ्यू और बूस्टर खुराक की कोशिशें शुरू की हैं. लेकिन यह समझना बेहद जरूरी है कि 2020 के आखिर की तुलना में इस साल हम अलग स्थिति में हैं. हम वायरस के बर्ताव, नैदानिक परीक्षणों, दवाइयों और टीकों के इस्तेमाल के तरीकों के बारे में अधिक जानते हैं.

अभी बाकी बचे कामों या हम जिन तरीकों से नाकाम रहे और कई लोगों को हुए जबरदस्त नुक्सान का शोक मनाने की जरूरत को दरकिनार किए बगैर पिछले दो साल में हमने बड़े पैमाने पर काफी कुछ हासिल किया है. यह तर्क दिया जा सकता है कि विज्ञान और तकनीक ने हमें अपने वायरल दुश्मन को समझने, उस पर निगाह रखने और उसके संक्रमण को रोकने की गुंजाइश मुहैया की है.

हालांकि यह अन्य कोरानावायरस से कम घातक है. एक ऐसी दुनिया में जहां मानव-निर्मित बदलाव नई महामारियों में वृद्धि की संभावना उत्पन्न कर रहे हैं, यह हमें बताता है कि आने वाली चीजों कैसी शक्ल ले सकती हैं. मोटे तौर पर, हम उन स्थितियों पर दोष मढ़ सकते हैं जिनकी वजह से महामारी फैली, लेकिन 2021 में किए गए व्यापक और ऐतिहासिक प्रयास बताते हैं कि हमारे सहयोगी, सामूहिक बौद्धिक संसाधन कितना कुछ हासिल कर सकते हैं.

हमें क्या करना चाहिए? हमें यह समझने की जरूरत है कि ओमिक्रॉन भविष्य के बारे में यह जानकारी देता है कि नए सार्स-कोविड2 वैरिएंट सामने आते रहेंगे और कुछ तो प्रतिरक्षा प्रणाली को भी चकमा देने में कामयाब रहेंगे और नई वैश्विक लहरें आएंगी. ठीक उसी तरह जैसा हम इनफ्लुएंजा के मामले में पहले ही अनुभव कर चुके हैं. इसका मतलब यह है कि नियंत्रण के हमारे प्रयासों में विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य को अग्रिम मोर्चे पर रहना होगा और इसके लिए सक्षम नीति भी होनी चाहिए.

हमें यह समझने के लिए वैज्ञानिक शोध की जरूरत है कि कौन-से नियंत्रण उपाय कामयाब हैं और कौन-से नहीं, कमजोर लोगों को सर्वाधिक सुरक्षा के लिए किस तरह की परीक्षण रणनीति अपनाई जानी चाहिए, सामुदायिक व्यवहार को प्रोत्साहित करने वाले कौन-से कारक हैं, बीमारी के हर चरण के लिए सर्वश्रेष्ठ क्लिनिकल प्रोटोकॉल क्या हैं.

यह भी कि व्यापक रूप से सुरक्षात्मक नए टीके कैसे बनाएं और उनका परीक्षण करें जिनमें हर कुछ महीनों में बूस्टर खुराक की जरूरत न हो. हमें ऐसी सक्षम नीति की जरूरत है जो रणनीतिक रूप से बड़े पैमाने पर और लंबी अवधि के लिए विज्ञान को फंड मुहैया करे क्योंकि खतरा अभी टला नहीं है.  

गगनदीप कंग क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर के गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल साइंस डिपार्टमेंट में प्रोफेसर हैं

नए साल में हमें टीकों के निर्माण और डिलिवरी सिस्टम को मजबूत और दुरुस्त करने के अपने प्रयासों को दोगुना कर देना चाहिए... अगर हमने दुनियाभर में कोविड के विभिन्न वैरिएंट को फैलने से प्रभावी ढंग से नहीं रोका तो हम नए वैरिएंट उभरने के जोखिम को कम नहीं कर पाएंगे.

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