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क्या है चुप्पा दिल का दौरा

दौरा पड़ने पर पहले 60 मिनट महत्वपूर्ण होते हैं, जिसे स्वर्णिम घंटा कहा जाता है. जितना जल्दी हो खून का प्रवाह चालू करना होता है, ताकि दिल की मांसपेशियों को बचाया जा सके और मौत टाली जा सके.

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दिल का दौरा दिल का दौरा

सोनाली आचार्जी

चुपके से आने वाला दिल का दौरा वह होता है, जिसका कोई लक्षण जाहिर नहीं होता या हल्के लक्षण आते हैं जिसे लोग दिल के दौरे से नहीं जोड़ते. डॉक्टर दिल के दौरे के विभिन्न चरण बताते हैं

पहला चरण
आपके दिल की मांसपेशियों को निरंतर ऑक्सी जनयुक्त रक्त की जरूरत होती है. दिल की मांसपेशियों को रक्त पहुंचाने वाली धमनियां वसा या कोलेस्ट्रॉल के जमा होने से संकरी हो जाती हैं, जिसे प्लेक (मैल) कहते हैं

दूसरा चरण
जब यह प्लेक टूटता है तो आसपास खून का थक्का जम जाता है. यह थक्का दिल में धमनियों से खून का प्रवाह रोकता है, इसे इस्कीमिया कहते हैं

तीसरा चरण
इस्कीमिया तब होती है, जब दिल की मांसपेशियां ऑक्सीजन और पोषण के लिए तरसने लगती हैं

चौथा चरण
जब इस्कीमिया की वजह से दिल की मांसपेशियों को नुक्सान होता है या कुछ हिस्से मर जाते हैं तो इसे मायोकार्डिडयल इन्फ्रैक्शन (एमआइ), या आम बोलचाल में दिल का दौरा कहते हैं

पांचवां चरण
दौरा पड़ने पर पहले 60 मिनट महत्वपूर्ण होते हैं, जिसे स्वर्णिम घंटा कहा जाता है. जितना जल्दी हो खून का प्रवाह चालू करना होता है, ताकि दिल की मांसपेशियों को बचाया जा सके और मौत टाली जा सके

आपको दिल का दौरा पड़ा हो सकता है, अगर...
लगे कि जुकाम हो गया है
सीने या पीठ की ऊपरी मांसपेशी में दर्द हो
जबड़े, बांह या पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द हो
काफी थकान महसूस करें
पेट में अपच जैसा हो

खास खलनायक
दिल के मर्ज के बड़े जोखिम तत्व

अधिक नमक, मीठा और तेल-घी वाला खान-पान अध्ययनों के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ की 6 ग्राम की सिफारिश के मुकाबले औसत शहरी भारतीय रोजाना 11 ग्राम नमक (ग्लोबल हेल्थ इंडिया के लिए जॉर्ज इंस्टीट्यूट का अध्ययन), 6 चम्मच चीनी के मुकाबले 10 चम्मच, और 20 ग्राम तेल-घी के मुकाबले 32.6 ग्राम का सेवन करता है (आइसीएमआर). चीनी, नमक और तेल-घी ज्यादा खाने से जुड़े रोग दिल को नुक्सान पहुंचाते हैं

बचाव के खराब उपाय डायबिटीज, हाइपरटेंशन और हाइ कोलेस्ट्रॉल दिल के लिए घातक हैं. फिर भी, ज्यादातर मरीज टालते रहते हैं, तब तक काफी देर हो चुकी होती है

बैठे-ठाले की जीवनशैली स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के अध्ययन के मुताबिक, भारत में लोग एक दिन में महज 4,297 कदम चलते हैं. डॉक्टरों की सलाह है कि दिल की सेहत के लिए कम से कम इससे दोगुना चलना चाहिए

तनाव
इससे सूजन वाले हॉर्मोन निकलते हैं जिसका सीधा असर दिल पर पड़ता है या परोक्ष तौर पर खराब खान-पान और जीवन-शैली बढ़ती है. सेंटर ऑफ हीलिंग के 2020 में 10,000 भारतीयों पर अध्ययन में 74 फीसद लोग तनाव और दुश्चिंताओं से ग्रस्त थे

प्रदूषण 
ज्यादातर शहरों में वायु प्रदूषण में अति सूक्ष्म कण दिल की सेहत के लिए जहर हैं.

धूम्रपान
जॉन्स हॉपकिंस के मुताबिक, धूम्रपान से संबंधित हर पांच मौत में एक दिल की बीमारी से होती है. ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में 16-64 वर्ष आयुवर्ग में 250,002,133 धूम्रपान करने वाले दुनिया में दूसरे स्थान पर हैं.

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