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‘‘हमें जान फूंकने के लिए सहारे की जरूरत है, न कि हम पर कानून लादने वाले बाबुओं की’’

असली परेशानियों के बारे में सुनकर उनका हल निकालना चाहिए. और जल्दी से जल्दी राज्य का दर्जा वापस होना चाहिए.

मुश्ताक चाया मुश्ताक चाया

कश्मीर की आवाज

मुश्ताक चाया, 70 वर्ष
मालिक, मुश्ताक ग्रुप ऑफ होटल्स, श्रीनगर

कश्मीर के हालात का सबसे बढिय़ा पैमाना पर्यटन है: अगर वहां हालात बदतर हों तो पार्यटकों की तादाद कम हो जाती है और अगर वादी में अमन-चैन हो तो उनकी आमद में तेजी से इजाफा होता है. इस बारे में होटल व्यवसायी 70 वर्षीय मुश्ताक चाया से बेहतर भला कौन जान सकता है, जो मुश्ताक ग्रुप ऑफ होटल्स के चेयरमैन हैं. इस ग्रुप के होटल जम्मू-कश्मीर और दिल्ली में हैं.

चाया 1980 के दशक के मध्य से ही होटल व्यवसाय में हैं. वे कहते हैं कि पिछले पांच साल वादी में पर्यटन के लिए मुश्किल वाले रहे हैं. 2016 में आतंकवादी हिंसा, 2018 में राजनैतिक अस्थिरता, 2019 में अनुच्छेद 370 का रद्द किया जाना और फिर कोविड महामारी की वजह से बार-बार लॉकडाउन ने वादी में इस क्षेत्र की कमर तोड़ दी.

पिछला साल सबसे ज्यादा खराब गुजरा. पर्यटकों की संख्या घटकर 43,059 पहुंच गई, जो पिछले वर्षों में औसतन 14 लाख हुआ करती थी. दूसरी लहर से पहले कुछ सुधार दिखा था और इस साल गर्मी में देसी पर्यटक अपेक्षाकृत बड़ी तादाद में वादी पहुंचे थे. चाया बताते हैं, ''अब हमारे होटलों में 40 फीसद बुकिंग है.’’ फिर भी हालात सामान्य होने में कुछ वक्त लगेगा.

कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री का अनुमान है कि पहले राजनैतिक घटनाओं और फिर कोविड लॉकडाउन की वजह से जम्मू-कश्मीर को कारोबार के मद में 40,000 करोड़ रुपए और 5,00,000 नौकरियों का नुक्सान हुआ क्योंकि सबसे पहले इंटरनेट बंद हुआ और फिर पर्यटकों की आमद कम हो गई. 

जम्मू-कश्मीर के लिए पर्यटन महत्वपूर्ण है, जिसका उसकी जीडीपी में सबसे ज्यादा योगदान है. चाया का कहना है कि इस साल अप्रैल में केंद्रशासित प्रदेश में ''बढ़िया नई औद्योगिक नीति’’ की घोषणा के बावजूद इस क्षेत्र की हालत में पिछले डेढ़ साल में कोई सुधार नहीं हुआ है.

ई औद्योगिक नीति के तहत अगले 15 साल में औद्योगिक विकास के प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करना, भूमि बैंक तैयार करना और कारखाने लगाने के लिए प्रोत्साहन देने पर 28,000 करोड़ रुपए खर्च किया जाना है, जिसमें बुनियादी ढांचे का निर्माण भी शामिल है.

लेकिन पुरानी बाधाएं जस की तस बनी हुई हैं. खासकर गुलमर्ग में मकान और बाथरूम की मरम्मत के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी है. गुलमर्ग में होटल का पट्टा लंबे समय के लिए दिया गया है. चाया का कहना है, ''हमें जान फूंकने के लिए सहारे की जरूरत है, न कि हम पर कानून लादने वाले बाबुओं की.’’

वादी के सियासी हालात के बारे में क्या ख्याल है? चाया का कहना है, ''हमें बोलने से डरना नहीं चाहिए या हमें शक की निगाह से नहीं देखा जाना चाहिए. असली परेशानियों के बारे में सुनकर उनका हल निकालना चाहिए. और जल्दी से जल्दी राज्य का दर्जा वापस होना चाहिए—हमारा सम्मान वापस दीजिए और जलालत बंद कीजिए.’’

43,059
पर्यटक 2020 में आए, जबकि उसके पिछले कई साल औसतन 14 लाख पर्यटक पहुंचे थे.

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