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‘‘हमें ऑनलाइन के हिसाब से परीक्षा का तरीका बदलना होगा’’

ऑनलाइन कक्षाएं 23 मार्च से शुरू हुईं और कॉलेज के अपने आइटी विभाग ने सभी को प्रशिक्षण दिया कि एमएस टीम्स में कक्षाएं कैसे ली जाएं.

नई पढ़ाई ऑनलाइन क्लास के दौरान प्रोफेसर वाधवा; और  (इनसेट) प्रीतोम लॉग इन के जरिए नई पढ़ाई ऑनलाइन क्लास के दौरान प्रोफेसर वाधवा; और (इनसेट) प्रीतोम लॉग इन के जरिए

केस स्टडीः 
ऋतु वाधवा, 40 वर्ष
असिस्टेंट प्रोफेसर, एमिटी बिजनेस स्कूल

प्रीतोम बर्मन, 23 वर्ष
एमबीए (फाइनांस), एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा

 

ऑनलाइन पढ़ाई में प्रीतोम बर्मन को अलग ही चुनौतियों का सामना करना पड़ा. एमिटी यूनिवर्सिटी के नोएडा कैंपस, उत्तर प्रदेश के एमिटी बिजनेस स्कूल से एमबीए (फाइनांस) कर रहे बर्मन को 24 मार्च को लॉकडाउन के वक्त छात्रावास छोड़कर अरुणाचल प्रदेश के अपने गृह नगर लौटना पड़ा था. बाकी छात्रों की ही तरह वे भी चार दिन पहले ही निकले थे.

एमिटी बिजनेस स्कूल ने अपने कैंपस को 20 मार्च को बंद कर दिया और सभी शिक्षकों और छात्रों को ऑनलाइन कक्षाओं की सूचना दे दी गई. बर्मन के लिए, जो कक्षा के नोट्स और कॉलेज की लाइब्रेरी की किताबों पर निर्भर थे, यह बड़ी मुश्किल थी. अरुणाचल प्रदेश के पामुम पारे जिले में उनके गृह नगर नाहरलागुन में, वे किसी लाइब्रेरी के बगैर खुद को असहाय महसूस कर रहे थे. वे कहते हैं, ‘‘हम ऑनलाइन लेक्चर में शामिल होते थे और शिक्षक जो नोट्स भेजते थे, उनकी पढ़ाई करते थे.’’

ऑनलाइन कक्षाएं 23 मार्च से शुरू हुईं और कॉलेज के अपने आइटी विभाग ने सभी को प्रशिक्षण दिया कि एमएस टीम्स में कक्षाएं कैसे ली जाएं. एमिटी बिजनेस स्कूल की असिस्टेंट प्रोफेसर ऋतु वाधवा कहती हैं, ‘‘पहले दिन थोड़ी समस्या हुई लेकिन बाद में सब ठीक हो गया. हमने ऑनलाइन के लिहाज से फायदेमंद परीक्षा प्रणाली और प्रश्नपत्र तैयार किए.’’

अपने बैच के साथ तालमेल बिठाने के लिए बर्मन को कई समस्याओं से पार पाना पड़ा क्योंकि अरुणाचल में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या थी. वे कहते हैं, ''सभी कुछ एमएस टीम्स और ई-मेल के जरिए हो रहा था. कनेक्शन 0.5 केबीपीएस से 80 केबीपीएस के बीच झूलता था और लेक्चर में शामिल होना भी मुश्किल था.’’

कई बार उन्हें घर से बाहर जाकर फोन के जरिए कक्षा में शामिल होना पड़ता था. बर्मन कहते हैं, ''मुझे सड़क के किनारे बैठना होता था और लेक्चर में शामिल होना था.’’ अपने मिड टर्म टेस्ट के दौरान, वे प्रश्नपत्र देख नहीं पा रहे थे और उन्हें दोस्त के घर जाना पड़ा, जहां कनेक्शन बेहतर था. उन्होंने अपनी सारी परीक्षाएं अपने दोस्त के घर से दीं.
वाधवा कहती हैं, ''छात्रों के लिए यह अनिवार्य है कि वे लेक्चर में लॉग इन करते समय अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं. बर्मन खराब कनेक्शन की वजह से ऐसा नहीं कर पाता था. किसी तरह वह लेक्चर में शामिल हुआ और सारे असाइनमेंट अपलोड किए. कई बार यह उसने साइबर कैफे से किया.’’

बर्मन के सहपाठियों और शिक्षकों, दोनों ने उनकी मदद की. उनके दोस्तों ने व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया जहां शिक्षकों के दिए सारे स्लाइड्स भेज देते थे. वे कहते हैं, ''मैं कोई क्लास मिस कर देता था, तो एमएस टीम्स पर उपलब्ध उसकी रिकॉर्डिंग सुनता था. यूनिवर्सिटी का एलएमएस (ल‌र्निंग मैनेजमेंट सिस्टम) पर छात्र क्लास नोट और पत्रिकाएं हासिल कर सकते हैं.’’
—शेली आनंद

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