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गगनचुंबी तकरार

भाजपा नेता तरुण विजय ने दावा किया कि कुतुब मीनार में 'अपमानजनक’ ढंग से रखी गणेश की मूर्तियां वहां से हटाकर राष्ट्रीय संग्रहालय में ले जाई जाएं या 'सम्मानपूर्वक’ स्थापित हों.

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नई दिल्ली कुतुब मीनार नई दिल्ली कुतुब मीनार

विवाद 
महाकाल मानव सेवा सरीखे हिंदुत्व धड़े 10 मई को कुतुब मीनार पर आ धमके और मांग करने लगे कि ऐतिहासिक स्मारक का नाम बदलकर विष्णु स्तंभ रखा जाए. एएसआइ के पूर्व रीजनल डायरेक्टर धर्मवीर शर्मा ने दावे के सुर में सुर मिलाकर कहा कि कुतुब मीनार 'सूर्य मीनार’ है जिसका निर्माण चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने 5वीं सदी में किया था. 

7 अप्रैल को राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के अध्यक्ष और भाजपा नेता तरुण विजय ने दावा किया कि कुतुब मीनार में 'अपमानजनक’ ढंग से रखी गणेश की मूर्तियां वहां से हटाकर राष्ट्रीय संग्रहालय में ले जाई जाएं या 'सम्मानपूर्वक’ स्थापित हों.

उधर दिल्ली की एक जिला अदालत एक याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें कुतुब मीनार संकुल के भीतर हिंदू और जैन देवताओं को पुनर्प्रतिष्ठित करने और पूजा-उपासना का अधिकार देने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि संकुल के भीतर स्थित 27 मंदिरों को कुतुबद्दीन ऐबक ने ढहाकर उसके मलबे से बगल में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का निर्माण किया था.

इसके पीछे कौन है?
वकील विष्णुशंकर जैन ने यह याचिका दायर करके कुतुब मीनार संकुल के भीतर हिंदू और जैन देवताओं को पुनर्प्रतिष्ठित करने और पूजा-उपासना का अधिकार देने की मांग की है. वे लखनऊ के वकील हरिशंकर जैन के पुत्र हैं. दरअसल उनके पिता की ही याचिका पर अदालत ने पूजा-उपासना के उद्देश्य से बाबरी मस्जिद के दरवाजे हिंदुओं के लिए खोलने का आदेश दिया था, जिसकी परिणति विवाद इस कदर बढ़ने में हुई कि अब वह इतिहास है.

यह किस तरफ बढ़ रहा है
हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई, लेकिन बताया जाता है कि संस्कृति मंत्रालय ने एएसआइ से कुतुब संकुल की मूर्तियों की आइकनोग्राफी या छवि निरूपण करने के लिए कहा है. कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद के इमाम मौलाना शेर मोहम्मद ने मीडिया में दावा किया कि एएसआइ के अधिकारियों ने उनसे 13 मई से नमाज पढ़ना बंद करने के लिए कहा है. 

कुतुब मीनार में पूजा के अधिकार की मांग पर सुनवाई के दौरान एएसआइ ने इस मुकदमे का विरोध किया और कहा कि कुतुब मीनार पूजा स्थल नहीं था और स्मारक का मौजूदा दर्जा बदला नहीं जा सकता. यूनेस्को ने कुतुब मीनार को 1993 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया.

24 मई को मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान अतिरिक्त जिला जज निखिल चोपड़ा ने पूछा कि याचिकाकर्ता किस कानूनी उपाय के तहत ''800 साल पहले घटी किसी चीज की’’ पुनर्प्रतिष्ठा के अधिकार का दावा कर सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ''मूर्तियों की मौजूदगी पर विवाद नहीं है.’’ उसके बाद अतिरिक्त जिला जज ने कुछ मजाकिया लहजे में कहा, ''देवता पूजा के बिना भी 800 साल से मौजूद हैं. उन्हें इसी तरह जिंदा रहने दें.’’

दिल्ली की एक अदालत के अतिरिक्त जिला जज ने याचिका की सुनवाई करते हुए कहा, ''देवता पूजा के बिना भी 800 साल से मौजूद हैं. उन्हें इसी तरह मौजूद रहने दें’’.

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