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विवाद में प्रार्थनाएं

मध्य प्रदेश के धार जिले में सूफी संत दरगाह और इसके बगल में 14वीं शताब्दी की मस्जिद एक सदी से ज्यादा वक्त से विवाद के केंद्र में है.

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धार, मध्य प्रदेश-कमाल मौला/भोजशाला धार, मध्य प्रदेश-कमाल मौला/भोजशाला

मध्य प्रदेश के धार जिले में सूफी संत कमालुद्दीन मालवी की 15वीं शताब्दी की दरगाह और इसके बगल में 14वीं शताब्दी की मस्जिद एक सदी से ज्यादा वक्त से विवाद के केंद्र में है. हिंदुओं का दावा है कि यह परिसर भोजशाला है. मालवा क्षेत्र में सांप्रदायिक राजनीति की जड़ें गहरी हुईं तो 1990 के दशक के बाद से यह विवाद बढ़ता ही गया. 

'भोजशाला’’ शब्द का जिक्र पहली बार 1903 में शिक्षा अधीक्षक के.के. लेले के एक पेपर में आया था. लेले, धार रियासत में तैनात ब्रिटिश पॉलिटिकल एजेंट कैप्टन अर्नेस्ट बारनेस की ओर से स्थापित एक पुरातत्व कार्यालय के मुखिया थे. लेले ने इस स्थान का संबंध 11वीं सदी के राजा भोज से बताया जिसे बाद में गलत शब्द बताकर खारिज कर दिया गया.

बहरहाल, 1909 में धार स्टेट ने इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया और इसमें नमाज पर रोक लगाई. 1934 में, स्टेट ने इसके बाहर एक बोर्ड लगाया जिसमें भोजशाला का उल्लेख था. अगले साल नमाज फिर से शुरू हुई और 1944 में पहला उर्स मनाया गया.

साल 1952 में, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने परिसर को अपने कब्जे में ले लिया और नमाज पर प्रतिबंध का पुराना आदेश बहाल कर दिया. 1998 में, एएसआइ ने मुसलमानों को शुक्रवार को और हिंदुओं को वसंत पंचमी पर पूजा करने की अनुमति दी. 2003 के एक संशोधित आदेश में हिंदुओं को हर मंगलवार को वहां पूजा की अनुमति दी गई थी. इसे दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, लेकिन याचिका खारिज हो गई.

मुकदमेबाजी का ताजा दौर इस साल 2 मई को शुरू हुआ जब हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने इंदौर उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर मांग की कि केवल हिंदुओं को ही इस परिसर में पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाए. मामले की सुनवाई 27 जून को होगी.

भोज शोध संस्थान के सचिव दीपेंद्र शर्मा का दावा है, ''धार राज्य के दीवान ने 1930 के दशक के अंत में राजा के स्वास्थ्य के लिए बस एक दिन के लिए नमाज और दुआ की अनुमति दी थी. मुस्लिम पक्ष तब से भोजशाला में जमा हुआ है.’’ इस दावे का विरोध उन मुसलमानों ने किया है, जिनका परिवार करीब 700 वर्षों से दरगाह की सेवा कर रहा है.

एएसआइ की व्यवस्था के अनुसार, हिंदू और मुस्लिम निर्धारित दिनों में परिसर के अंदर प्रार्थना करते हैं. 2016 में वसंत पंचमी शुक्रवार को थी. उस रोज दोनों पक्षों को भारी पुलिस तैनाती के बीच अलग-अलग वक्त पर पूजा करने और नमाज अदा करने की इजाजत दी गई.

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की मांग है कि परिसर में केवल हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत दी जाए.

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