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मंदिर जो नहीं है?

विशाल सिंह ने 19 मई को आठ पेज की रिपोर्ट सिविल जज (सीनियर डिविजन) दिवाकर की कोर्ट में दाखिल की.

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वाराणसी, ज्ञानवापी वाराणसी, ज्ञानवापी

शिवलिंग जैसी आकृति का रहस्य 
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के नए स्वरूप काशी विश्वनाथ धाम के गेट संख्या 04 से प्रवेश कर परिसर में सीधे करीब बीस कदम चलने पर बाईं ओर बैरिकेडिंग से घिरी हुई ज्ञानवापी परिसर की पश्चिमी दीवार पड़ती है. बैरिकेडिंग से एक पत्थर का चबूतरानुमा आकार बाहर निकला हुआ है. इसी चबूतरे के निचले हिस्से पर शृंगार गौरी की आकृति उभरी हुई है जिसे लाल रंग से पोत दिया गया है.

इसी शृंगार गौरी की पूजा को लेकर विवाद कोर्ट की चौखट पर पहुंच गया. इसकी शुरुआत करीब ढाई दशक पहले हुई थी जब वाराणसी के सूरजकुंड निवासी और विश्व हिंदू परिषद के पूर्व महानगर उपाध्यक्ष सोहनलाल आर्य ने 1995 में वाराणसी जिला न्यायालय में याचिका दायर कर शृंगार गौरी के दर्शन-पूजन और सर्वे की मांग की थी. 18 मई, 1995 को अदालत ने सर्वे के लिए कोर्ट कमिशनर नियुक्त किया. दोनों पक्षों में तनाव के चलते कोर्ट कमिशनर ने कमिशन की कार्यवाही खारिज कर दी. हाइकोर्ट ने भी जिला न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी. 

महिलाओं ने दावा ठोका 
27 साल बाद सोहनलाल की पहल पर ही पांच महिलाओं, दिल्ली की रहने वाली राखी सिंह और वाराणसी की लक्ष्मीदेवी, मंजू व्यास, सीता साहू और रेखा पाठक ने संयुक्त रूप से 18 अगस्त, 2021 को वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिविजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत में याचिका दायर कर श्री काशी विश्वनाथ धाम-ज्ञानवापी परिसर स्थित शृंगार गौरी और अन्य विग्रहों की वर्ष 1991 से पूर्व की स्थिति की तरह नियमित दर्शन-पूजन की मांग की.

सुनवाई के क्रम में अदालत ने मौके की वस्तुस्थिति जानने के लिए 8 अप्रैल को अजय कुमार मिश्र को कोर्ट कमिशनर नियुक्त कर कमिशन की कार्यवाही का आदेश दिया. कथित दावे के मुताबिक, ज्ञानवापी मस्जिद के वुजूखाने में सर्वे के दौरान मिले ''शिवलिंग’’ को सील कराए जाने के अगले दिन 17 मई को ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख करने वाली मस्जिद की इंतजामिया की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए सिविल जज (सीनियर डिविजन) रवि कुमार दिवाकर ने अजय कुमार मिश्र को कोर्ट कमिशनर के पद से हटा दिया. कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट कमिशनर विशाल सिंह को कमिशन की कार्यवाही पेश करने का आदेश दिया. 

शिवलिंग बनाम फौवारा 
विशाल सिंह ने 19 मई को आठ पेज की रिपोर्ट सिविल जज (सीनियर डिविजन) दिवाकर की कोर्ट में दाखिल की. रिपोर्ट में बताया कि ज्ञानवापी परिसर में मौजूद कुंड के बीचोबीच स्थित गोलाकार आकृति के पत्थर (हिंदू पक्ष के अनुसार शिवलिंग) में सींक डालने से 63 सेंटीमीटर की गहराई मिली. मुस्लिम पक्ष ने इसे फौवारा बताया है. इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी वाराणसी की निचली अदालत की कार्यवाही को रोकने की इंतजामिया अंजुमन मस्जिद की याचिका खारिज कर दी.

शीर्ष अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ मंदिर मुद्दे के दीवानी वाद की जटिलता और संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे मामले को वाराणसी के जिला जज के पास भेज दिया. जिला न्यायालय में सुनवाई के दौरान ज्ञानवापी परिसर में कमिशन के दौरान हुई वीडियोग्राफी और फोटो मीडिया में लीक होने पर मामले ने तूल पकड़ लिया है.

वीडियो में दिखाई दे रहे शिवलिंग जैसी आकृति, त्रिशूल, स्वास्तिक सहित अन्य धार्मिक चिन्ह पर लोग अलग-अलग दावे कर रहे हैं. कमेटी के वकील रईस अंसारी बताते हैं, ''कोर्ट से मांग की गई कि कमिशन कार्यवाही के वीडियो लीक मामले की जांच कर दोषियों को सजा दी जाए.’’ कोर्ट ने आवेदन स्वीकार कर लिया है. मामले की अगली सुनवाई अब 4 जुलाई को होगी.

कोर्ट कमिशनर रिपोर्ट के मुताबिक, ज्ञानवापी परिसर में मौजूद कुंड के गोलाकार पत्थर (हिंदू पक्ष के अनुसार शिवलिंग) में सींक डालने से 63 सेंटीमीटर की गहराई मिली. मुस्लिम पक्ष ने इसे फौवारा बताया है.

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