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और मजबूत होगी दुश्मनी की चीनी दीवार

भारत को लगातार बढ़ती चीन की शत्रुता का सामना करने के लिए तैयार हो जाना चाहिए. तथ्यों की मानें तो शी जिनपिंग का फैसला साफ है, वे भारत के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने वाले हैं

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2022 में 20वीं पार्टी कांग्रेस में जिनपिंग भारत की ऐसी नकारात्मक छवि पेश करने में कामयाब रहे जिसका असर लंबे समय तक रहने वाला है
2022 में 20वीं पार्टी कांग्रेस में जिनपिंग भारत की ऐसी नकारात्मक छवि पेश करने में कामयाब रहे जिसका असर लंबे समय तक रहने वाला है

भारत @2023 
सुरक्षा

जयदेव रानाडे
अध्यक्ष, सेंटर फॉर चाइना एनालिसिस ऐंड स्टडीज

वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद के दशक में विश्व व्यवस्था धीरे-धीरे बदलाव के दौर से गुजर रही है. भारत और जापान जैसी उभरती शक्तियों ने संयुक्त राष्ट्र सहित दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में अपना पूरा हिस्सा मांगना शुरू कर दिया है. हालांकि यह प्रक्रिया दो बड़े घटनाक्रमों से बुरी तरह से बाधित भी हुई—पहली कोविड महामारी और दूसरी फरवरी 2022 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यूक्रेन पर आक्रमण कर एकतरफा रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को बदलने का प्रयास. 4 फरवरी को अपने सहयोगी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ शिखर सम्मेलन के बाद पुतिन का हौसला बढ़ा. चीन से मौन समर्थन का आश्वासन मिलने पर रूस ने अपनी सेना को चीन की सीमा से हटाकर यूक्रेनी मोर्चे पर तैनात कर दिया.

पुतिन और शी दोनों एक नई विश्व व्यवस्था के उदय को देखने के इच्छुक हैं. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने शी जिनपिंग के हवाले से कहा कि ''चीन और रूस रणनीतिक सहयोग मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय निष्पक्षता और न्याय की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं.'' उन्होंने कहा कि यह ''एक रणनीतिक निर्णय है जिसके परिणाम चीन, रूस और दुनिया के लिए दूरगामी होंगे, और वे इस निर्णय से पीछे नहीं हटेंगे.''

यूक्रेन के साथ रूस के युद्ध ने चीन के इरादों को और भी स्पष्ट कर दिया है. बीजिंग लंबे समय से अमेरिका के बराबर की शक्ति के रूप में पहचाने जाने की मांग कर रहा था. इसने दोनों शक्तियों के वैश्विक विवादों का साझा मध्यस्थ बनने के ''एक नए प्रकार के महान शक्ति संबंध'' का प्रस्ताव दिया था, हालांकि वह नाकाम रहा. शी के नेतृत्व में चीन ने अपनी वैश्विक महत्वाकांक्षाएं खुले तौर पर जाहिर कर दी हैं. शी ने चीन के सशस्त्र बलों का तेजी से आधुनिकीकरण किया और 2012 और 2017 में लगातार दो बार पार्टी कांग्रेस में चीन के दो प्रमुख लक्ष्यों को स्पष्ट किया—अमेरिका को पीछे छोड़ना और देश की स्थापना की 100वीं वर्षगांठ यानी 2049 तक चीनी राष्ट्र का कायाकल्प.

अपने दूसरे लक्ष्य की प्राप्ति के लिए चीन उन क्षेत्रों को फिर से अपने अधिकार में करेगा जिन्हें लेकर उसका दावा है कि चीन ने अपने ये क्षेत्र ''शत्रुतापूर्ण विदेशी शक्तियों द्वारा गैर-बराबरी वाली संधियों को लागू करने'' के कारण गंवाए हैं. 2013 में शी ने बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव शुरू किया. यह एक व्यापक भू-आर्थिक रणनीतिक पहल है जिसे चीन समुद्री और डिजिटल सिल्क रोड के माध्यम से बढ़ा रहा है. इसे चीन निर्मित संचार नेटवर्क के बहाने पूरी दुनिया में चीन की शक्ति के विस्तार के प्रयास के रूप में देखा गया. लेकिन महाशक्ति बनने से पहले चीन को हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर हावी होना होगा, जहां भारत सबसे बड़ी शक्ति है.

चीन के विस्तारवादी एजेंडे और आक्रामक विदेश नीति का सीधा असर भारत पर पड़ता है. संप्रभु भारत के लद्दाख, कश्मीर के कुछ हिस्से, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के बड़े हिस्से और लगभग पूरे अरुणाचल प्रदेश को चीन के आधिकारिक मानचित्र पर चीन के भूभाग के रूप में दर्शाया जाता है. चीन दक्षिण चीन सागर के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से पर भी दावा जताता है. उसने वियतनाम, जापान और फिलीपींस जैसे कई पड़ोसियों के क्षेत्रों का अतिक्रमण किया है और ताइवान को फिर से चीन के साथ शीघ्र मिलाने पर जोर दे रहा है.

अप्रैल 2015 में घोषित चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी), कश्मीर, गिलगित और बल्तिस्तान पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे का समर्थन करता है. 2016 में पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की वेस्टर्न थिएटर कमान का निर्माण, जो चीन के पांच सैन्य थिएटर कमानों में से सबसे बड़ा है, संभावित रूप से चीन और पाकिस्तान की सैन्य ताकत को एकजुट करता है. पूरी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) इसी कमान के अधिकारक्षेत्र में है और सीपीईसी में तैनात चीनी संपत्तियों और कर्मियों के लिए जिम्मेदार है. एक-दूसरे के सैन्य संचालन निदेशालयों में वरिष्ठ पाकिस्तानी और चीनी सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी से चीन-पाकिस्तान की मिलीभगत और स्पष्ट रूप से रेखांकित होती है. सीपीईसी के ऐलान के तुरंत बाद चीन ने अपनी रणनीतिक सोच में पाकिस्तान के महत्व का स्पष्ट संकेत दिया जब चीनी नेताओं ने भारतीय वार्ताकारों को बताया कि ''भारत को पाकिस्तान के साथ तनाव कम करना चाहिए और बातचीत फिर से शुरू करनी चाहिए, कश्मीर मुद्दे को हल करना चाहिए और उसके बाद चीन के साथ बेहतर संबंधों के लिए प्रयास करने चाहिए.''

अप्रैल 2020 से, जब चीन ने सभी समझौतों और संधियों का उल्लंघन करते हुए लद्दाख में घुसपैठ की, पूरी 4,057 किलोमीटर लंबी एलएसी सक्रिय हो गई है और कड़ाके की सर्दी में भी दोनों सेनाएं मुस्तैदी से तैनात हैं. पीएलए ने तिब्बत में अपने सैन्य और वायु सेना के अभ्यास को बढ़ाया है और हवाई अड्डों, रणनीतिक राजमार्गों और रेलवे सहित तिब्बत को मुख्य भूमि से जोड़ने वाले बुनियादी ढांचे का तेजी से निर्माण किया है. शी ने कम से कम तीन मौकों पर वेस्टर्न थिएटर कमान का दौरा किया, जिसका संदेश साफ है. फिर भी न तो उन्होंने और न ही विदेश मंत्री वांग यी (जिन्हें अब केंद्रीय विदेश मामलों के आयोग का निदेशक नियुक्त किया गया है) के अलावा किसी अन्य वरिष्ठ नेता ने सीमा की स्थिति पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की. इससे साफ है कि संबंधों को सुधारने में उनकी कोई रुचि नहीं है. चीन भारत के साथ लंबे समय तक तनावपूर्ण संबंधों के लिए तैयार दिखाई देता है.

बीसवीं पार्टी कांग्रेस में पेश और अगले पांच वर्षों के लिए चीन की रणनीतिक दिशा तय करने वाली शी की कार्य रिपोर्ट से यह झलकता है कि भारत के प्रति चीन की सख्त मुद्रा में कोई बदलाव नहीं आने वाला. इसने उन रिपोर्टों की पुष्टि की कि चीन अपने परमाणु शस्त्रागार में वृद्धि कर रहा है और पीएलए स्ट्रेटेजिक सपोर्ट फोर्स और पीएलए रॉकेट फोर्स को बड़ा करने की योजना बना रहा है. सैन्य प्रशिक्षण और तैनाती पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, ''यह हमें सुरक्षा को लेकर अपने रुख को आकार देने, संकटों और संघर्षों को रोकने तथा मैनेज करने और स्थानीय युद्धों को जीतने में सक्षम बनाएगा.'' पिछली कार्य रिपोर्टों में 'स्थानीय युद्धों' का उल्लेख नहीं किया गया था. यह बदलाव मुख्य रूप से भारत के साथ संघर्षों को रेखांकित करता है. चीन पहले से ही भारत की सीमाओं पर सुरक्षा रुख को ''आकार देने'' का प्रयास कर रहा है. इसके अलावा, चीन के नए केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के सात सदस्यों में से चार के पास वेस्टर्न थिएटर कमान का अनुभव है, जो चीन के लिए एलएसी के महत्व को दर्शाता है. भारत के लिए, इसका अर्थ है नए सिरे से सैन्य तैनाती और सीमाओं पर बढ़ते दबाव के अलावा आगे भी चीन के साथ झड़पों की अधिक संभावना. 9 दिसंबर को तवांग के पास यांग्त्से में 300 पीएलए सैनिकों का 17,500 फुट ऊंची रिज लाइन पर कब्जा करने का प्रयास इसकी मिसाल है.

पिछले अक्तूबर में बीजिंग की 20वीं पार्टी कांग्रेस में भारत को लेकर विशेष रूप से नकारात्मक चर्चा हुई जो बहुत असामान्य है और इसने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया. पार्टी कांग्रेस किसी देश का नाम लेने से बचती है, लेकिन इस बार शी ने भारत के लिए नकारात्मक रुख सुनिश्चित किया. जून 2020 में गलवान में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़पों की एक वीडियो क्लिप को बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल में इकट्ठे हुए लगभग 5,000 प्रतिनिधियों, विशेष आमंत्रितों और अधिकारियों को उद्घाटन वाले दिन दिखाया गया था.

बदलती विश्व व्यवस्था में बड़ी ताकतें किस पक्ष के साथ खड़ी होती हैं, यह भारत के लिए एक चुनौती होगी. चीन एक दीर्घकालिक समस्या बना रहेगा. नए सीएमसी की संरचना, गलवान झड़प का वीडियो दिखाया जाना, और तिब्बत में रक्षा बुनियादी ढांचे का तेजी से निर्माण, ये सारी बातें इशारा देती हैं कि शी जिनपिंग के दिमाग में कुछ तैयारियां चल रही हैं और वे संभवत: अगले एक या दो साल में भारत के खिलाफ सैन्य अभियानों की योजना बना रहे हैं. शी का रणनीतिक आकलन गलत है या सही, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत इस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है.

2022 में 20वीं पार्टी कांग्रेस में जिनपिंग भारत की ऐसी नकारात्मक छवि पेश करने में कामयाब रहे जिसका असर लंबे समय तक रहने वाला है

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