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विशेषांकः मुश्किलों में तनकर हुए खड़े

कोविड सरीखे गहरे संकट वाले दौर में भी तेलंगाना ने विकास की सुई को नीचे नहीं आने दिया. अब देश की जीडीपी में इसका योगदान पूरे पांच फीसदी का.

लौट आई चमक हैदराबाद में शिल्प और गहनों की एक प्रदर्शनी में जमा भीड़ लौट आई चमक हैदराबाद में शिल्प और गहनों की एक प्रदर्शनी में जमा भीड़

तेलंगाना: अर्थव्यवस्था में श्रेष्ठ प्रदर्शन वाले बड़े राज्य

तेलंगाना की अर्थव्यवस्था खासी लचीली रही है और इसने मुश्किलों में भी आगे बढ़ने का हौसला दिखाया है. 2019-20 में राज्यों में इसकी प्रतिव्यक्ति आय सर्वाधिक 2,33,325 रुपए रही और 2020-21 में यह बढ़कर 2,37,632 रुपए हो गई जबकि अखिल भारतीय स्तर पर प्रतिव्यक्ति आय 1,28,829 रुपए थी.

तेलंगाना भौगोलिक क्षेत्रफल के लिहाज से देश का 11वां और जनसंख्या की दृष्टि से 12वां सबसे बड़ा राज्य है. लेकिन देश की अर्थव्यवस्था में इसका योगदान चौथा (2020-21 में 8,10,503 करोड़ रु.) रहा और इसके आगे सिर्फ तमिलनाडु, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल ही थे.

विशेषांकः मुश्किलों में तनकर हुए खड़े
विशेषांकः मुश्किलों में तनकर हुए खड़े

राज्य के उद्योग, आइटी और शहरी विकास मंत्री के.टी. रामराव कहते हैं, ''तेलंगाना, जो महज सात साल पहले ही अस्तित्व में आया है, देश की जीडीपी में 5 फीसद का योगदान करता है.’’

कोविड-19 के संकट के बावजूद, राज्य की अर्थव्यवस्था ने 2020-21 में प्रभावशाली रफ्तार पकड़ी और इसका सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 9,80,407 करोड़ रु. के स्तर पर पहुंच गया और इसकी वृद्धि दर 2.4 फीसद रही.

इसकी तुलना में राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक आउटपुट (यानी जीडीपी) में तीन प्रतिशत की कमी आई. यह बढ़ोतरी कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की अगुआई में थी, जिसमें तेलंगाना में 18.5 फीसद की वृद्धि हुई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर इन क्षेत्रों की 6.6 फीसद की वृद्धि ही दर्ज की जा सकी.

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