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विवाद के सूत्र

भगवान श्रीकृष्ण विराजमान और लखनऊ की वकील रंजना अग्निसहोत्री समेत आठ लोगों ने 25 सितंबर, 2020 के सिविल जज (सीनियर डिविजन), मथुरा की अदालत में वाद दायर किया था.

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उत्तर प्रदेश, मथुरा-शाही ईदगाह उत्तर प्रदेश, मथुरा-शाही ईदगाह

मालिकाना हक का मामला
मान्यता है कि मथुरा में आज जिस जगह पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान है, वहां पांच हजार साल पहले मल्लपुरा क्षेत्र के कटरा केशवदेव में राजा कंस का कारागार हुआ करता था. इतिहासकारों के मुताबिक 1618 में जहांगीर के शासनकाल के दौरान ओरछा के राजा वीर सिंह देव बुंदेला ने इसी स्थान पर एक नया मंदिर बनवाया. जाट विद्रोह के बाद 1670 में औरंगजेब ने मंदिर को ध्वस्त कराकर उसके एक हिस्से पर ईदगाह का निर्माण कराया था. 

निशाने पर जन्मस्थान-ईदगाह समझौता 
अंग्रेजों ने 1815 में कटरा केशवदेव मंदिर की 13.37 एकड़ जमीन नीलाम की, जिसे बनारस के राजा पटनीमल ने खरीदा. 7 फरवरी, 1944 को उद्योगपति जुगल किशोर बिड़ला ने खरीद लिया. बिड़ला ने 21 फरवरी, 1951 को श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की स्थापना की. श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट ने 1 मई, 1958 को श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ का गठन किया. 1977 में श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ का नाम बदलकर श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान कर दिया गया.

12 अक्तूबर, 1968 को श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही मस्जिद ईदगाह के प्रतिनिधियों के बीच एक समझौता हुआ कि 13.37 एकड़ जमीन पर कृष्ण मंदिर और मस्जिद दोनों बने रहेंगे. श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद कुल मिलाकर 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक का है, जिसमें 10.9 एकड़ जमीन श्री कृष्ण जन्मस्थान के पास और 2.5 एकड़ जमीन शाही ईदगाह मस्जिद के पास है. कोर्ट में विभिन्न याचिकाएं दायर कर 1968 के समझौते को रद्द करने के साथ 13.37 एकड़ जमीन पर मालिकाना हक की मांग की गई है. 

चार महीने में निबटेगा मामला
भगवान श्रीकृष्ण विराजमान और लखनऊ की वकील रंजना अग्निसहोत्री समेत आठ लोगों ने 25 सितंबर, 2020 के सिविल जज (सीनियर डिविजन), मथुरा की अदालत में वाद दायर किया था. 30 सितंबर, 2020 को वाद यह कहकर अदालत ने खारिज कर दिया था कि मात्र भक्त होने के आधार पर प्रार्थीगण को वाद दायर करने की अनुमति देना न्यायोचित नहीं है.

इस पर 12 अक्तूबर, 2020 को जिला जज, मथुरा की अदालत में अपील दायर की गई. जिला जज ने अपील स्वीकार की और और मुकदमा शुरू हुआ. इसके बाद हिंदू आर्मी चीफ मनीष यादव और ठाकुर केशवदेव महाराज ने सिविल जज (सीनियर डिविजन), मथुरा की अदालत में एक वाद दायर करके कृष्ण जन्मभूमि पर मालिकाना हक की मांग की.

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने 12 मई को भगवान श्रीकृष्ण के वादमित्र और हिंदू आर्मी के चीफ मनीष यादव की अर्जी पर सुनवाई करते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद से जुड़ीं सभी अर्जियों को अधिकतम चार महीने के भीतर निबटारे का निर्देश मथुरा कोर्ट को दिया है.

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