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आवरण कथाः रियल एस्टेट को गहरा झटका

लंबे समय से मुश्किलों का सामना कर रहे रियल एस्टेट क्षेत्र को महामारी से जुड़े लॉकडाउन का गहरा आघात झेलना पड़ा

कामगारों को काम नहीं नवी मुंबई में आनंद पाटिल अपनी निर्माणाधीन कंस्ट्रक्शन साइट पर कामगारों को काम नहीं नवी मुंबई में आनंद पाटिल अपनी निर्माणाधीन कंस्ट्रक्शन साइट पर

रियल एस्टेट क्षेत्र के हालात तो कोविड-19 आने से काफी पहले से खराब थे. महामारी ने उस तकलीफ को कई गुना बढ़ा दिया है. रियलिटी कंसलटेंट एनारॉक का कहना है कि नए घरों की आपूर्ति में साल 2020 की पहली छमाही में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 56 फीसद कि गिरावट आई जबकि अप्रैल-जून की तिमाही में नई लान्चिंग में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 98 फीसद गिरावट आई.

रियल एस्टेट क्षेत्र के खिलाड़ियों का कहना है कि लॉकडाउन ने कारोबार बुरी तरह से चौपट कर दिया और इस अवधि में प्रॉपर्टी के लिए लोगों की पूछताछ बिल्कुल थम गई. कंस्ट्रक्शन का काम भी पूरी तरह रुक गया. वे कहते हैं कि जुलाई के बाद स्थिति में थोड़ा सुधार तो हुआ लेकिन अब भी उनके पास महामारी के आने से पहले के वक्त की तुलना में केवल आधी ही इंक्वायरी प्रॉपर्टी को लेकर आ रही हैं.


सात बड़े शहरों—राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, मुंबई महानगर क्षेत्र, पुणे, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नै व बेंगलूरू— में घरों की बिक्री साल 2020 की पहली छमाही में 57,940 इकाइयों की रही जो साल 2019 की दूसरी छमाही की तुलना में 49 फीसद कम थी. विशेषज्ञ इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इस क्षेत्र को हाल के वर्षों में कई दबावों का सामना करना पड़ा है—नोटबंदी, आइएलऐंडएफएस व दीवान हाउसिंग फाइनेंस के घपलों के पहले व बाद में बना नकदी का संकट, आर्थिक सुस्ती और अब कोविड-19 लॉकडाउन. क्षेत्र को जीएसटी और रेरा (रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण) के तहत अनुपालन की नई अनिवार्यताओं को लेकर भी समायोजन करना पड़ा था.

उनकी शिकायत यह भी है कि बैंक कर्ज देने से हिचक रहे हैं जिससे बेचने और खरीदने वालों की उम्मीदों पर पानी फिरा है. हालात को छड़ी घुमाकर दुरुस्त नहीं किया जा सकता लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि नीति-निर्माताओं को मांग में तेजी लाने के लिए प्रोत्साहन देना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि ब्याज दरों में कमी खरीदारों तक प्रभावी रूप से पहुंचे. ठ्ठ

केस स्टडी
आनंद पाटिल, 46 वर्ष
मालिक, वास्तु डेवलपर्स, नवी मुंबई


मार्च-अंत में जब पहला लॉकडाउन आया तो देशभर में रियल एस्टेट कंपनियों का धंधा एकदम से रुक गया. एक तरफ ग्राहकों की तरफ से कोई पूछताछ नहीं हो रही थी और इधर कंस्ट्रक्शन पर पूरी तरह से ब्रेक लग गया. पाटिल की कंपनी के पांच प्रोजेक्ट नवी मुंबई के उल्वे, द्रोणागिरी व विंचुम्बे इलाकों में चल रहे थे. उनके यहां 17 लोग तो सीधे नौकरी पर हैं और कंस्ट्रक्शन के काम के लिए जरूरत व काम के आकार के हिसाब से लोग रखे जाते हैं. वे बताते हैं कि किसी भी समय उनकी विभिन्न साइट पर 25 से 100 के बीच कर्मचारी रहते हैं.


पाटिल ने लॉकडाउन में स्थायी स्टाफ बरकरार रखा और सुनिश्चित साइट पर सौ श्रमिकों को रखकर उन्हें भोजन उपलब्ध कराया. वे कहते हैं कि मांग धीरे-धीरे लौट रही है पर ग्राहकों की पूछताछ लॉकडाउन से पहले की तुलना में करीब आधी है.

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