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आवरण कथाः पढ़ें और समझें

बजट में कटौती से देश की शिक्षा व्यवस्था और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को चुस्त-दुरस्त करने की सरकार की मंशा पर पानी फिरा

शिक्षा 6,088 करोड़ रु. या पिछले साल के मुकाबले शिक्षा बजट में 6.1 फीसद की कमी शिक्षा 6,088 करोड़ रु. या पिछले साल के मुकाबले शिक्षा बजट में 6.1 फीसद की कमी

केंद्रीय बजट/आवरण कथा

पिछले साल दुनिया के बाकी देशों की तरह भारत को भी जिस तरह महामारी का सामना करना पड़ा, उससे शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव देखा गया—स्कूल और कॉलेज बंद रहे और अचानक बिल्कुल ही अनियोजित तरीके से पढ़ाई की वर्चुअल राह पकडऩी पड़ी. डिजिटल के दयनीय बुनियादी ढांचे के बावजूद, खासकर दूरदराज के इलाकों और समाज के वंचित तबकों में, संस्थागत शिक्षा के पूरी तरह पंगु हो जाने की स्थिति से बचने के लिए देश ने ऑनलाइन शिक्षा का रास्ता अपनाया.

इन परिस्थितियों को देखते हुए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021-22 का जो बजट पेश किया है, उसमें देश के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया गया है. अब एक नेशनल डिजिटल एजुकेशनल आर्किटेक्चर गठित किया जाएगा, जो न सिर्फ पढ़ाई-लिखाई में मददगार बनेगा, बल्कि शिक्षा की योजना, और प्रशासनिक गतिविधियों में भी मदद करेगा.  

डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ ही पूरी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक रूप से सुधार भी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत करना है, जिसका ऐलान जुलाई, 2020 में किया गया था. 34 वर्षों के अंतराल के बाद शिक्षा नीति में बदलाव लंबे समय से प्रतीक्षित था और उसके क्रियान्वयन की दिशा में इस बजट में उसके लिए पर्याप्त फंड के आवंटन की अपेक्षा थी.

आवरण कथाः पढ़ें और समझें
आवरण कथाः पढ़ें और समझें

सीतारमण ने घोषणा की कि एनईपी के सभी बिंदुओं को शामिल करने के लिए 15,000 से ज्यादा स्कूलों को गुणवत्ता की दृष्टि से मजबूत किया जाएगा और ये स्कूल अपने इलाके में विशिष्ट स्कूल की तरह उभरेंगे और दूसरे स्कूलों का भी मार्गदर्शन करेंगे, ताकि वे भी नई शिक्षा नीति के आदर्शों का हासिल कर सकें. एनईपी के क्रियान्वयन में सहायता के लिए कुछ अन्य कार्यक्रमों की भी घोषणा की गई है. उदाहरण के लिए नेशनल प्रोफेशनल स्टैंर्ड्स फॉर टीचर्स का विकास.

30 लाख प्राथमिक स्कूल के टीचरों को डिजिटल रूप से प्रशिक्षित किए जाने के अलावा 56 लाख अन्य टीचरों को नेशनल इनिशिएटिव फॉर स्कूल हेड्स और टीचर्स होलिस्टिक एडवांसमेंट के जरिए प्रशिक्षित किया जाएगा. सरकार चरणबद्ध तरीके से सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में सुधार शुरू करेगी, जिसकी शुरुआत 2022-23 से प्रभावी हो जाएगा. रटंतू पढ़ाई की जगह विद्यार्थियों की परीक्षा विषय की समझ, विश्लेषण की क्षमता और वास्तविक जीवन में ज्ञान के उपयोग के आधार पर की जाएगी.

ताज्जुब की बात यह है कि बजट में एनईपी के क्रियान्वयन के लिए अलग से कोई आवंटन नहीं किया गया है. अगर पिछले साल के बजट में आबंटन—99,312 करोड़ रु.—से तुलना करें तो इस साल का आवंटन घटकर 93,224 करोड़ रु. हो गया है, हालांकि 2020-21 के बजट की संशोधित राशि से अधिक है जो 85,089 करोड़ रु. थी. विशेषज्ञों का कहना है कि एनईपी शुरू किए जाने के बाद के वर्ष में यह 'वृद्धि’ काफी नहीं है.

सेंटर फॉर बजट ऐंड गवर्नेंस एकाउंटेबिलिटी में शोधकर्ता प्रोविता कुंडू के मुताबिक, ''अगर शिक्षा मंत्रालय के लिए जीडीपी का 0.42 प्रतिशत आवंटित किया जाता है तो एनईपी की सिफारिशों को लागू करने के लिए शिक्षा पर जीडीपी के 6 प्रतिशत के खर्च का अतिरिक्त वहन राज्यों को करना होगा, जो  संभव नहीं है.’’ इस समय शिक्षा पर सरकारी खर्च 3 प्रतिशत के आसपास रहता है. 

दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति दिनेश सिंह भी बजट में देश में ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण पर जोर न दिए जाने पर नाराजगी जाहिर करते हैं. वे कहते हैं, ‘‘मैंने बजट का विस्तार से विश्लेषण नहीं किया है लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि दुनिया में सभी विकसित देशों ने इसलिए तरक्की की है कि उन्होंने अपने यहां ज्ञान आधारित मजबूत अर्थव्यवस्था खड़ी की है. आत्मनिर्भर भारत की नींव ज्ञान की अर्थव्यवस्था पर आधारित होनी चाहिए.’’ 

बजट में अपर्याप्त आवंटन के बावजूद इस सेक्टर के लिए कई अन्य प्रस्ताव भी किए गए हैं—जिनमें कुछ नए हैं और कुछ अतीत से लिए गए हैं. ऐसा ही एक प्रस्ताव है उच्चतर शिक्षा आयोग का गठन, जिसकी छतरी के नीचे उच्च शिक्षा के सभी संस्थान रहेंगे. अगले पांच वर्षों में नेशनल रिसर्च फाउंडेशन पर 50,000 करोड़ रु. खर्च किए जाएंगे, जिसकी घोषणा पिछले साल की गई थी. कुछ नए कार्यक्रमों की भी घोषणा है, जिनमें केंद्र देश भर में 100 नए सैनिक स्कूल और लेह में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना करेगा.

बजट में युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने के लिए एप्रेंटिसशिफ कानून में भी संशोधन करने का प्रस्ताव रखा गया है. शिक्षा के बाद एप्रेंटिसशिप मुहैया कराने के लिए नेशनल एप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम में संशोधन किया जाएगा और इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट एवं डिप्लोमाधारकों की ट्रेनिंग पर 3,000 करोड़ रु. खर्च किए जाएंगे. यूएई के साथ साझीदारी में कौशल शिक्षा, आकलन, सर्टिफिकेशन और प्रमाण-प्राप्त श्रमशक्ति मुहैया कराने की योजना शुरू की जाएगी.

जापानी औद्योगिक और व्यावसायिक कौशल के हस्तांतरण के लिए भारत और जापान के बीच सहयोगपूर्ण टेक्निकल इंटर्न ट्रेनिंग प्रोग्राम (टीआइटीपी) शुरू किया जाएगा. हालांकि ये सारे प्रस्ताव प्रशंसनीय हैं लेकिन बजट में शिक्षा में पर्याप्त फंड का आवंटन नहीं किया गया है. इससे सरकार की मंशा पर पानी फिर सकता है. 

खास प्रस्ताव
➜ नई शिक्षा नीति पर अमल के लिए करीब 15,000 स्कूलों गुणवत्ता संपन्न किया जाएगा 
➜ सरकार पिछले साल घोषित उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना के लिए कानून लाएगी
➜ पिछले साल घोषित राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के लिए अगले पांच साल में 50,000 करोड़ रु. खर्च करने का प्रस्ताव है
➜ सरकार देश भर में 100 सैनिक स्कूलों और लेह में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना करेगी
➜ सरकार नौ शहरों में विभिन्न शोध संस्थानों की स्वायत्तता को बरकरार रखकर उनके बीच बेहतर समन्वय के लिए एक औपचारिक छतरी तंत्र की स्थापना करेगी 
➜ पढ़ाई के बाद एप्रेंटिसशिप के लिए राष्ट्रीय एप्रेंटिसशिप योजना को नया रूप दिया जाएगा; इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट और डिप्लोमाधारियों की ट्रेनिंग पर 3,000 करोड़ रु. खर्च किए जाएंगे
➜ स्किल क्वालिफिकेशन, एसेसमेंट और सर्टिफिकेट युक्त कार्यबल के लिए यूएई की साझेदारी में एक पहल शुरू की जाएगी 
➜ जापानी औद्योगिक और व्यावसायिक कौशल के हस्तांतरण जापान के साथ टीआइटीपी पर दस्तखत होगा, और इस ज्ञान को दूसरे देशों के साथ दोहराया जाएगा.

 

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