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मोर्चे पर सबसे आगे

भारत का दवा उद्योग महामारी से लड़ाई का अगुआ रहा

डॉ. शर्विल पटेल, 42 वर्ष प्रबंध निदेशक, जाइडस कैडिला डॉ. शर्विल पटेल, 42 वर्ष प्रबंध निदेशक, जाइडस कैडिला

दवा उद्योग के बारे में अक्सर कहा जाता है कि यह मंदी से बेअसर रहता है. कोविड-19 के इस दौर में यह लड़ाई के मोर्चे पर है, जिसमें जाइडस कैडिला, भारत बायोटेक, अरबिंदो फार्मा, सीरम इंस्टीट्यूट, बायोलॉजिकल ई. और गन्नोवा बायोफार्मास्यूटिकल्स जैसी भारतीय कंपनियां टीके की खोज मंा लगी हुए हैं. ये टीके विकास या नैदानिक परीक्षणों के विभिन्न चरणों में हैं.

विश्व स्तर पर फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में भारत ने पहले ही बड़ी प्रगति की है और दुनिया में जेनेरिक दवाओं के बाजार में 20 फीसद हिस्सेदारी रखता है. दुनिया भर में टीकों की कुल मांग का 62 फीसद भारतीय दवा उद्योग ही पूरा करता है. अमेरिका के फूड ऐंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन द्वारा स्वीकृत फार्मा इकाइयों की सबसे बड़ी संख्या (262 से अधिक जिनमें सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयव अर्थात् एपीआइ और दवा उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले अन्य कच्चे माल के उत्पादक शामिल हैं) भारत के ही पास है.

देश में उच्च तकनीकी का प्रयोग करने वाले 253 दवा कारखाने ऐसे हैं जो यूरोपियन डायरेक्टोरेट ऑफ क्वालिटी मेडिसिन (ईडीक्यूएम) से अनुमोदित हैं. भारत का एपीआइ उद्योग दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा है और जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रीक्वालिफाइड सूची में 57 प्रतिशत एपीआइ का योगदान दिया है.

महामारी के शुरुआती दिनों में, चीन से एपीआइ आयात में व्यवधान के कारण भारत में दवाओं का उत्पादन प्रभावित हुआ था. फार्मा उत्पादन को लॉकडाउन से मुक्त रखा गया था, लेकिन श्रमिकों की कमी के कारण उत्पादन ठप हो गया था. कारखानों से भेजे गए माल भी प्रभावित हुए.

भारत ने बाद में पर्याप्त घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण दवा अवयवों, आवश्यक दवाओं, कुछ खास चिकित्सीय उपकरणों, सैनिटाइजरों और वेंटिलेटरों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. दवा उद्योग मंजूरी के लिए एकल-खिड़की स्वीकृति व्यवस्था की मांग करता रहा है. यह जीएसटी के मद में वापस पावतियों की जल्दी मांग करता है. एपीआइ और यौगिकों का भंडार भी जरूरी है ताकि आपात जरूरतें पूरी की जा सकें.


केस स्टडी
डॉ. शर्विल पटेल, 42 वर्ष
प्रबंध निदेशक, जाइडस कैडिला 
कर्मचारी: दुनिया भर में 25,000

कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में जाइडस कैडिला अगली कतार में रहा है. उसने मांग के अनुसार हाइड्रोक्लोरोक्विन (एचसीक्यू) और डेक्सामेथासोन के साथ ही जीवन रक्षक दवा रेमडैक को बाजार में उतारा जिसके बारे में दावा है कि यह कोरोना वायरस के उपचार के लिए उपलब्ध रेमडेसिविर का सबसे किफायती ब्रांड है. भारत में संक्रमण फैलने से पहले ही कंपनी ने अपना टीका विकास कार्यक्रम शुरू कर दिया था.

जाइकोवी-डी इस समय द्वितीय चरण के क्लिनिकल परीक्षण में है. आइसीएमआर के सहयोग से कंपनी ने वायरस के फैलने की निगरानी के लिए 'कोविड कवच एलिसा डायग्नॉस्टिक किट’ बनाया. मार्च से जाइडस ने उत्पादन और अन्य क्षेत्रों में 1,600 लोगों को नौकरी दी है. कंपनी को अहमदाबाद स्थित जाइडस वैक्सीन टेक्नोलॉजी सेंटर में जाइकोवी-डी की 10 करोड़ नगों के उत्पादन की उम्मीद है.

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