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आवरण कथाः आसान नहीं थी रिहाई

आर्यन खान की जमानत के लिए इस्तेमाल किए गए तर्कों ने एक बार फिर लोगों का ध्यान एनडीपीएस अधिनियम जैसे कानूनों में जमानत संबंधी कठोर प्रावधानों की ओर खींचा.

लंबा इम्तिहान आर्यन खान मेडिकल जांच के लिए जाते हुए लंबा इम्तिहान आर्यन खान मेडिकल जांच के लिए जाते हुए

बीती 2 अक्तूबर की रात एक गुप्त सूचना मिलने के बाद नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की मुंबई इकाई की एक टीम कॉर्डेलिया क्रूजेज के जहाज एंप्रेस में यात्रियों के वेश में सवार हुई. इस जहाज पर दिल्ली की एक इवेंट कंपनी ने दो दिन की संगीतमय यात्रा का आयोजन किया था. जहाज पर सवार लोगों में सुपरस्टार शाहरुख खान का 23 वर्षीय बेटा आर्यन भी शामिल था.

क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े के नेतृत्व में एनसीबी के अधिकारियों ने इस जहाज की तलाशी शुरू की और बाद में 13 ग्राम कोकीन, 5 ग्राम एमडी, 21 ग्राम चरस, एमडीएमए (एक्सटैसी) की 22 गोलियां और 1.33 लाख रुपये नगद बरामद करने का दावा किया. इसके अगले दिन एनसीबी ने आर्यन खान, उसके दोस्त अरबाज मर्चेंट और 18 अन्य लोगों को कथित तौर पर प्रतिबंधित सामग्री की ''खपत, बिक्री और खरीद’’ के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. 

खान पर नार्कोटिक ड्रग्स ऐंड साइकोट्रॉपिक सबस्टेंसेज (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 की धाराओं 8 (सी), 20 (बी), 27, 28, 29 और 35 के तहत आरोप लगाए गए हैं. ये धाराएं गैर-जमानती हैं और इनमें दोषी पाए जाने पर खान को 20 साल तक की जेल हो सकती है. उसके पास से कोई मादक वस्तु नहीं मिली थी, पर मर्चेंट के जूतों में कथित तौर पर छह ग्राम चरस छिपा पाया गया था.

एनसीबी का दावा है कि जांच के दौरान खान और मर्चेंट ने उपभोग के लिए इस वस्तु का अपने कब्जे मंी होना कबूला था. एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि खान के व्हाट्सऐप चैट से पता चलता है कि वह विदेशी नागरिकों और ऐसे अज्ञात लोगों के संपर्क में था जिनके अंतरराष्ट्रीय ड्रग रिंग का हिस्सा होने का संदेह है.

मामले में पहली सुनवाई के दौरान 4 अक्तूबर को एनसीबी ने खान को 11 अक्तूबर तक पुलिस हिरासत में देने की मांग की थी, पर अदालत ने 7 अक्तूबर तक के लिए हिरासत का आदेश दिया था. जब यह अवधि समाप्त हुई तो उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. यह आदेश आने के अगले दिन खान ने अंतरिम और नियमित दोनों तरह की जमानत के लिए अदालत की शरण ली.

मामले की सुनवाई कर रही मजिस्ट्रेट अदालत ने जमानत अर्जी को उस अदालत के अधिकारक्षेत्र से परे होने के आधार पर खारिज कर दिया. तीन दिन बाद एक विशेष एनडीपीएस अदालत ने जमानत अर्जी पर सुनवाई की और एनसीबी को तीन दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. अदालत ने 13 अक्तूबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुनवाई अगले दिन के लिए स्थगित कर दी.

14 अक्तूबर को एनडीपीएस की विशेष अदालत के न्यायाधीश ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया. सप्ताहांत और अन्य छुट्टियों के कारण अदालतें बंद होने के कारण मामले की अगली सुनवाई 20 अक्तूबर के लिए निर्धारित की गई थी. उस दिन, खान की जमानत याचिका खारिज कर दी गई.

न्यायाधीश वी.वी. पाटील ने अपने 18 पन्नों के आदेश में कहा कि खान के खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत हैं क्योंकि उन्हें पता था कि उनके दोस्त के पास ड्रग्स हैं. न्यायाधीश ने यह भी कहा कि उनकी व्हाट्सऐप चैट दिखाती है कि मादक वस्तुओं के आपूर्तिकर्ताओं और विक्रेताओं के साथ उनका गठजोड़ था.

कई कानूनी विशेषज्ञों ने खान के इकबालिया बयान और व्हाट्सऐप चैट के आधार पर जमानत अर्जी खारिज किए जाने की आलोचना की क्योंकि ये दोनों ही अदालत में अस्वीकार्य हैं. उसके पास से कोई ड्रग भी नहीं मिली थी. 26 अक्तूबर को एनडीपीएस अदालत ने गिरफ्तार किए गए 20 लोगों में से दो को जमानत दे दी. आखिरकार 28 अक्तूबर को बॉम्बे हाइ कोर्ट ने आर्यन को जमानत दे दी.

हालांकि, एनडीपीएस अधिनियम के अधीन जमानत हमेशा से ही काफी जांच-पड़ताल का मुद्दा रही है. उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व डीजी विक्रम सिंह कहते हैं, ''इसमें जमानत के प्रावधानों में कोई एकरूपता नहीं. पिछले साल कॉमेडियन भारती और उनके पति को दो दिनों के भीतर जमानत दे दी गई थी, जबकि उनके पास से गांजा बरामद हुआ था. दूसरी ओर, अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती से कोई 'ड्रग’ बरामद न होने के बावजूद लंबे समय तक जेल में रखा गया था.’’

एनडीपीएस अदालत ने केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से नशीली दवाओं का उपयोग करने वालों और नशेड़ियों को जेल भेजने से बचने के लिए अधिक मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की सिफारिश करने के कुछ दिनों बाद जमानत अर्जी खारिज कर दी थी. एनडीपीएस अधिनियम की अपनी समीक्षा में मंत्रालय ने व्यक्तिगत उपभोग के लिए कम मात्रा में इन मादक वस्तुओं को अपने पास रखने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की सिफारिश की थी.

इसी बीच, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के इस दावे के बाद राजनीतिक ड्रामा शुरू हो गया कि खान को उनके मुस्लिम होने की वजह से कानून प्रवर्तन एजेंसियां निशाना बना रही हैं. महाराष्ट्र के मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता नवाब मलिक ने आरोप लगाया कि क्रूज पर एनसीबी की छापेमारी ''नकली’’ थी, और ''महाराष्ट्र, राज्य सरकार और बॉलीवुड को बदनाम करने’’ के लिए भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है. उन्होंने छापेमारी के दौरान दो स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी पर भी सवाल उठाया जिनमें से एक, किरण गोसावी, कथित तौर पर भाजपा से जुड़े हैं.

गोसावी की एनसीबी कार्यालय में खान के साथ ली गई सेल्फी वायरल हुई. खान की गिरफ्तारी और उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस के तुरंत बाद वे गायब हो गए. बाद में 24 अक्तूबर को गोसावी के अंगरक्षक और अन्य स्वतंत्र गवाह प्रभाकर सैल ने एक हलफनामे में कहा कि गोसावी ने खान की रिहाई के लिए वानखेड़े की ओर से 25 करोड़ रुपये मांगे थे.

इसके अगले दिन एनसीबी ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि वानखेड़े ने सभी आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने मुंबई पुलिस आयुक्त को एक पत्र भी लिखा जिसमें उनसे ''यह पक्का करने का अनुरोध किया गया था कि उनके खिलाफ’’ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा ''गलत उद्देश्यों’’ से कोई कानूनी कानूनी कार्रवाई न की जाए.

25 अक्तूबर को एनसीबी के उप महानिदेशक ज्ञानेश्वर सिंह ने कहा कि वानखेड़े के खिलाफ जांच शुरू की गई है. उसी दिन गोसावी लखनऊ में सामने आए और समर्पण की पेशकश की, पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने कहा कि उसके पास ऐसा करने का अधिकार नहीं है. वे 28 अक्तूबर को गिरफ्तार हो गए.

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