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एक उभरते सितारे की रहस्यमय अकाल मौत

संभावनाओं से भरपूर एक प्रतिभावान सितारे का इंतकाल किसतरह त्रासदी की हदों से निकलकर मायानगरी के सनसनीखेज विवाद में तब्दील हो गया और अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआइ जांच तक जा पहुंचा

हंसी-खुशी के दिन पिछले साल 7 जुलाई को सुशांत और रिया मुंबई में साथ-साथ देखे गए हंसी-खुशी के दिन पिछले साल 7 जुलाई को सुशांत और रिया मुंबई में साथ-साथ देखे गए

यकीनन सुशांत सिंह राजपूत के मामले के पेचो-खम से तो बॉलीवुड का माहिर से माहिर किस्सागो भी चकरा गया होगा. लोकप्रियता की बुलंदी पर पहुंचे 34 साल के इस अभिनेता की मौत से सारा देश सन्न रह गया. उनके प्रशंसकों ने सोचा कि खुदकशी की वजह बेहिसाब मानसिक तनाव की घुटन थी, जिसे उन्होंने दुनिया से छुपाए रखा. लेकिन महामारी और लॉकडाउन के दौर में इसकी कडिय़ां खुलने लगीं तो एक पूरी फौज सोशल और पारंपरिक मीडिया पर जासूस की शक्ल में उतर आई.

इन स्वयंभू जासूसों ने पहले तो उनकी मौत का जिम्मेदार मुंबई फिल्म बिरादरी के मूवी-माफिया को ठहराया, जो सुशांत जैसे प्रतिभावान बाहरी को मौकों से महरूम कर देते हैं. फिर 40 दिनों के रहस्यमय लंबे अंतराल के बाद सुशांत के परिवार ने साजिश का शक जताया. तब सुर्खियां सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती और उनके परिजनों की ओर मुड़ गईं, जिन पर सुशांत के पिता कृष्ण किशोर सिंह ने सुशांत के खाते से 15 करोड़ रुपए के गबन और खुदकशी के लिए उकसाने का आरोप लगाया.

इस बीच एक और आंच उठने लगी, जो सुशांत की थोड़े समय तक मैनेजर रहीं दिशा सालियान की मौत, कुछ ऐक्टरों और दो राज्यों तथा उनकी पुलिस मशीनरी की सियासी जंग का फसाना थी. अचानक ‘कत्ल’ की गूंज सुनाई पडऩे लगी.

19 अगस्त को तो मामले में सबसे नाटकीय मोड़ आया जब सुप्रीम कोर्ट ने बिहार पुलिस की जांच के खिलाफ रिया चक्रवर्ती की याचिका पर सुनवाई के दौरान जांच का जिम्मा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) को सौंप दिया. अब सीबीआइ को उन सवालों के जवाब तलाशने होंगे जो सुशांत की मौत के दो महीने बाद भी सुर्खियों में छाए हुए हैं.

क्या सबूत है कि सुशांत ने खुदकुशी की?
कुछ भी तो 14 जून को ऐसा नहीं था, जिससे लगे कि वह सुशांत के लिए और दिनों से अलग था. सुशांत मुंबई के बांद्रा इलाके में माउंट ब्लैंक हाउसिंग सोसाइटी के छठे माले पर डुप्लेक्स फ्लैट में रहते थे. करीब 8 बजे सुबह, उन्होंने अपने घरेलू नौकर नीरज से एक ग्लास ठंडा पानी मांगा. नाश्ते में उन्होंने अपने रसोइए केशव से नारियल पानी, जूस और केले देने को कहा. लेकिन उन्होंने केले नहीं खाए.

केशव सुबह 10 बजे उनसे लंच के बारे में पूछने गया, तो देखा कि कमरा भीतर से बंद था. यह जानकर कि सुशांत देर तक सोना चाहते हैं, किसी ने उधर का रुख नहीं किया. लेकिन जब सुशांत ने दरवाजा नहीं खोला और अपने क्रिएटिव कंटेंट मैनेजर तथा जनवरी से फ्लैट में साथ रहने वाले सिद्धार्थ पिठानी का कॉल नहीं उठाया, तब उनके स्टाफ को चिंता हुई.

उन लोगों ने चाबी खोजनी शुरू की और सुशांत की बहन मीतू को जानकारी दी, जो वहां से 16 किमी दूर मुंबई के उपनगर गोरेगांव में रहती हैं. उन लोगों ने फैसला किया कि ताला तोड़ दिया जाए. करीब 1 बजे, एक स्थानीय तालासाज ने दरवाजे का ताला तोड़ा. लेकिन फौरन कमरे में जाने की बजाए पिठानी ने तालासाज को 2,000 रुपए दिए और उसे विदा कर दिया. फिर सुशांत के कमरे में हाउस मैनेजर दीपेश सावंत और नीरज के साथ गए. तब उन्होंने सुशांत को सीलिंग पंखे से लटकते देखा.

बकौल पिठानी, उन्होंने सुशांत को नीचे उतारा, उस हरे कुर्ते को फाड़ा जिससे फंदा लगा था और सुशांत की धड़कन चलाने की कोशिश की. तब तक सुशांत की बहन मीतू भी पहुंच गई थीं. वहां कोई सुइसाइड नोट नहीं था, जिससे बाद में विवाद को हवा मिली. कलीना की फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) ने अपनी रिपोर्ट में इसे कत्ल नहीं माना क्योंकि नमूनों में कुछ भी ऐसा संदिग्ध नहीं मिला, जिससे साजिश का शक हो.

एफएसएल के सूत्र बताते हैं कि ''नाखून और पेट के धोवन के परीक्षणों में कोई नोकझोंक या जहर के सबूत नहीं मिले.’’पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी इसी नतीजे पर पहुंची, जिसमें मृत्यु का कारण ‘फांसी के कारण दम घुटना’ बताया गया. अधखुली पलकों, कच्छे में वीर्य के रिसाव के दाग, विसरा रिपोर्ट और आमाशय में मौजूद पदार्थों के आधार पर फोरेंसिक विशेषज्ञ इस नतीजे पर पहुंचे कि कोई साजिश या गड़बड़ी का मामला नहीं है.

हालांकि, सुशांत की मौत के करीब 6 हफ्ते बाद 25 जुलाई को उनके पिता के.के. सिंह ने पटना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उन्हें इसमें साजिश का अंदेशा है. परिवार के वकील विकास सिंह ने परिवार के शक की वजहें बताईं. एक तो, उन्होंने तालासाज के साथ पिठानी के बरताव को अजीब बताया. उनका सवाल है, ‘‘आमतौर पर आप तालासाज को विदा करने से पहले दरवाजा खोलेंगे. उसे पहले क्यों भेजा गया?’’

सिंह सुशांत की मौत की जांच में मुंबई पुलिस की दूसरी कथित खामी का भी आरोप लगाते हैं. मुंबई पुलिस कहती है कि सुशांत ने फांसी पर झूलने के लिए अपने बेड का उपयोग किया था. सिंह का तर्क है कि छह फुट के सुशांत इतने लंबे थे कि बिस्तर पर खड़े होते तो पंखे को छू लेते.

उनका मानना है कि जब लोग खुद फांसी लगाते हैं तो वे स्टूल पर खड़े होते हैं, फंदे को गले में डालते हैं और स्टूल को दूर हटा देते हैं. सिंह आगे कहते हैं, सुशांत ने अगर खुद को फांसी लगाई होती तो भी वे तिरछी दशा में होते, क्योंकि उन्हें तब भी बिस्तर का सहारा मिल रहा होता.

खुदकुशी के यही कोई 800 मामलों की जांच कर चुके, मध्य प्रदेश के सागर में राज्य फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के निदेशक डॉ. हर्ष शर्मा उनकी इस दलील को खारिज कर देते हैं. उन्होंने यूट्यूब चैनल क्राइम तक से कहा कि अगर फंदा गले में कस गया और ऊपर जुड़ा हुआ हो तो आदमी चाहे खड़ा हो, बैठा हो, या झुका हो, गर्दन कस जाती है और दिमाग से नसों का रिश्ता टूट जाता है, जिससे शरीर शिथिल पड़ जाता है. वे यह भी कहते हैं कि सुशांत के शरीर पर खरोंच न होना और अधखुली पलकें फांसी लगाकर खुदकुशी का साफ संकेत हैं.

क्या सुशांत गंभीर मानसिक बीमारी से ग्रस्त थे?
सुशांत का परिवार अब मुंबई पुलिस के उस प्रारंभिक निष्कर्ष पर सवाल उठाता है कि अभिनेता को गंभीर मानसिक बीमारी थी जिसकी वजह से वे आत्महत्या को प्रवृत्त हुए. सुशांत की दिलचस्पी सिनेमा से परे भी थी और यह बात अब तक अच्छी तरह से स्थापित हो चुकी है. इंस्टाग्राम पर पोस्ट में उन्होंने फिल्म से अधिक 50 ड्रीम प्रोजेक्ट, आत्मचिंतन और ज्योतिष में अपनी दिलचस्पी के बारे में बातें की हैं. इतनी विविध दिलचस्पी वाला आदमी भला त्रासद कदम क्यों उठाएगा?  

खुद को सुशांत की ‘लिव-इन पार्टनर’ बताने वालीं रिया चक्रवर्ती का मानना है कि सुशांत पिछले आठ महीनों से गंभीर मानसिक रोग से पीड़ित थे. वे याद करती हैं कि उन्होंने पहली बार इसे सुशांत और अपने भाई शोविक के साथ अक्तूबर 2019 की यूरोप यात्रा के दौरान महसूस किया था. रिया ने इस मामले की जांच कर रहे अधिकारियों को बताया कि ऐसा पहली बार फ्लोरेंस के एक होटल के कमरे में उस वक्त हुआ जब वे फ्रांसिस्को गोया की पेंटिंग सैटर्न डिवाउरिंग हिज सन देखकर लौटे थे.

बकौल रिया, सुशांत उसके बाद कांप उठे थे और कुछ दिनों तक हताश-से रहे थे. उनकी हालत इतनी गंभीर हो गई कि वह ट्रिप बीच में छोड़कर लौटना पड़ा. नवंबर और दिसंबर 2019 के बीच सुशांत और रिया ने मुंबई में नैदानिक मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक डॉ. सुजन वॉकर मॉफैट से परामर्श किया. मॉफैट का जांच के बाद निष्कर्ष था कि सुशांत ‘बाइपोलर डिसऑर्डर’ से ग्रस्त थे.

यूट्यूब चैनल मोजो स्टोरी में साझा किए एक वीडियो बयान में डॉक्टर ने खुलासा किया कि सुशांत ''अवसाद और हाइपोमेनिया के दौरों से बुरी तरह पीडि़त थे.’’ वे उन चार डॉक्टरों में से एक हैं, जिन्होंने मार्च 2020 तक राजपूत को चिकित्सीय परामर्श दिया. रिया ने भी स्वीकार किया कि डॉक्टर मॉफैट से वे खुद अपनी बेचैनी और घबराहट का भी इलाज करा रही थीं.

आजतक टीवी चैनल से 1 अगस्त को राजपूत के नौकर नीरज ने बताया कि सुशांत यूरोप यात्रा से लौटने के बाद से ही ‘बुझे-बुझे’ थे. उसने यह भी बताया कि खुदकुशी के पहले वाली रात कोई पार्टी नहीं हुई थी, जैसा कि कुछ हलकों में अटकलें उड़ीं; सुशांत लॉकडाउन के दौरान बाहर लगभग नहीं निकले थे. 

18 जून को अपने फेसबुक पोस्ट, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया, पर सुशांत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने लिखा था, ‘‘मुझे पता है कि आप बहुत दर्द में थे और मुझे पता है कि आप एक योद्धा थे और बहादुरी से लड़ रहे थे.’’ 3 अगस्त को मुंबई पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह ने मीडिया को बताया कि पुलिस की जांच में पुष्ट हुआ है कि सुशांत 'अवसाद’ से ग्रस्त थे.

सुशांत की अस्थिर मानसिक अवस्था की गवाही पिठानी के पास भी साफ है. सुशांत ने उनसे जनवरी में फौरन (अहमदाबाद से) मुंबई आने और अपने साथ काम करने को कहा. सुशांत ने पिठानी से कहा कि वे ऐक्टिंग छोडऩा चाहते हैं. पिठानी याद करते हैं, ‘‘मुझसे कहा कि मेरे पास अभी कोई नहीं है.’’ जूम पर एक वीडियो बातचीत में पिठानी ने कहा कि 9 जून को दिशा सालियान की मौत की खबर से सुशांत बहुत रोए और बेहोश हो गए थे. पिठानी ने कहा, ''वे अपना नाम बार-बार लिए जाने से दुखी थे.’’

हालांकि राजपूत परिवार के वकील विकास सिंह ऐसे आरोपों से साफ इनकार करते हैं. उन्होंने इंडिया टुडे से कहा, ''2019 के आखिर तक सुशांत को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कोई परेशानी नहीं थी. अगर वह 2019 के बाद उदास था या कोई और परेशानी शुरू हुई थी, तो इसके लिए रिया जिक्वमेदार है.’’

क्या मानसिक परेशानी के कारण सुशांत खुदकुशी कर सकते हैं?
कई जगह ऐसी खबरें चलीं कि इंडस्ट्री में भेदभाव के माहौल के अलावा अपने करियर की असफलताओं के कारण सुशांत मानसिक पीड़ा में थे. और यही दबाव आखिरकार उनके लिए बहुत भारी साबित हुआ. यह सच है कि बीते एक साल में दो बड़े प्रोजेक्ट उनके हाथ से निकल गए, जो सुशांत को बहुत प्रिय थे और जिसके लिए उन्होंने काफी तैयारियां की थीं.

उनमें एक शेखर कपूर की फिल्म पानी थी जिसे शेखर ने निर्माता आदित्य चोपड़ा के साथ मतभेदों के कारण छोड़ दिया था. दूसरी फिल्म चंदामामा दूर के थी जो अंतरिक्ष की कहानी थी और जिसके लिए ट्रेनिंग लेने को सुशांत अलबामा के हंटसेविले में यूएस स्पेस ऐंड रॉकेट सेंटर भी गए थे. 2018 में शुरू हुई सुशांत की दूसरी कंपनी इनसेई वेंचर्स में पार्टनर, सीरियल उद्यमी वरुण माथुर के मुताबिक तारीखों की दिक्कतों से सुशांत को फिल्म छोडऩी पड़ी थी.

लेकिन इन प्रमुख नाकामियों के बावजूद सुशांत के पास नियमित रूप से फिल्मों के प्रस्ताव आ रहे थे. रूमी जाफरी उनको और रिया को साथ लेकर एक रोमांटिक कॉमेडी निर्देशित करने जा रहे थे. राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार आनंद गांधी को उम्मीद थी कि सुशांत एक दोस्त के नाते महामारी की पृष्ठभूमि पर आधारित उनकी अगली फिल्म में काम करने पर विचार करेंगे. मौत से ठीक एक दिन पहले निर्माता रमेश तौराणी और निर्देशक निखिल आडवाणी ने सुशांत के सामने एक नया प्रोजेक्ट रखा था.

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि करियर में आए झटके उनकी मानसिक पीड़ा का मुख्य कारण नहीं हो सकते. मुंबई स्थित मनोवैज्ञानिक डॉ. श्रद्धा सिधवानी कहती हैं, ‘‘ऐसा कोई शारीरिक पैरामीटर नहीं है जिसे देखकर कोई कह सकता है कि अमुक व्यक्ति तनाव में है. आप तनाव में हैं इसका मतलब यह नहीं कि आप काम नहीं कर सकते.’’

17 साल से मनोचिकित्सा के पेशे से जुड़ीं डॉक्टर सिधवानी कहती हैं कि मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर मीडिया ट्रायल और मीडिया के इसे खारिज करते आने की वजह से, ‘‘मनोचिकित्सक इस कलंक को मिटाने के लिए पिछले एक दशक से जो मेहनत करते आए हैं, उस सारी मेहनत पर पानी फिर रहा है.’’

सिधवानी कहती हैं कि मरीज का दूसरे डॉक्टरों से सलाह लेना और मनोचिकित्सकों को बदलना आम बात है क्योंकि उन्हें लगता है कि उनका अपने दिमाग का ''नियंत्रण टूट रहा’’ है. उन्होंने कहा, ''बड़ी और सफल शख्सियतों के लिए बीमारी को स्वीकार करना अधिक कठिन होता है.’’ सुशांत के फ्लैट में ही रहने वाले पिठानी का कहना है कि सुशांत ने मार्च में दवा लेना बंद कर दिया था.

सुशांत के मनोचिकित्सक के दावे के मुताबिक सुशांत बाइपोलर डिसऑर्डर, जिसे पहले उन्मत्त अवसादग्रस्तता (मैनिक डिप्रेसिव इलनेस) के रूप में जाना जाता था, से ग्रस्त थे. यह ऐसी गंभीर मनोदशा है जिसमें पीड़ित का मूड तेजी से बदलता है. व्यक्ति कभी उन्मत्तता के शिखर पर पहुंच जाता है तो कभी गहरे अवसाद में डूब जाता है.

बीमारी की वजह दरअसल क्या है, यह ठीक-ठीक बताना मुश्किल है लेकिन विशेषज्ञ बड़े पैमाने पर मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन, आनुवंशिकी या न्यूरोट्रांसमीटर में गड़बड़ी को इसका कारण मानते हैं. इस पर आम सहमति है कि जीवन के दूसरे दशक में इसके लक्षण उभरने लगते हैं.

बेंगलूरू स्थित निमहांस के निदेशक डॉ. बी.एन. गंगाधर बताते हैं, ‘‘यह उन्माद से शुरू हो सकता है—जिसमें पीडि़त अत्यधिक खर्च, बहुत ऊर्जावान, कभी-कभी भव्यता के भ्रम में और नींद की परेशानी से जूझ रहा होता है. कुछ समय बाद वह अवसादग्रस्त हो सकता है और उसमें उदासी और खुद को नुक्सान पहुंचाने की प्रवृत्ति देखी जाती है. कुछ लोगों में यह क्रम उलट सकता है—पहले अवसादग्रस्तता की प्रवृत्ति दिखेगी उसके बाद उन्माद के चरण.’’

बाइपोलर डिसऑर्डर से ग्रस्त रोगियों का निदान करना कठिन है क्योंकि जरूरी नहीं हैं कि उनमें लक्षण हमेशा स्पष्ट ही हों. बहुत-से मरीज अपने लक्षणों को कलंक के डर या शर्म और अपराध बोध से छिपा लेते हैं. हैदराबाद की मनोचिकित्सक डॉ. पूर्णिमा नागराज बताती हैं, ‘‘कोई एक दिन स्थिर हो सकता है और अगले दिन उसमें उन्माद या अवसाद के दौरे देखे जा सकते हैं. बाइपोलर डिसऑर्डर में व्यक्तित्व संबंधी विकार भी हो सकते हैं, और उनमें से कुछ में अवसाद की प्रवृत्ति अधिक हो सकती है... यह अलग-अलग रोगी में अलग-अलग हो सकता है.’’ 

बाइरपोलर डिसऑर्डर के रोगियों के लिए दवा और चिकित्सा आवश्यक है, खासकर उन लोगों में जिनमें आत्मघाती प्रवृति है. डॉ. गंगाधर कहते हैं, ‘‘किसी में किसी विकार की पहचान हो चुकी है, तो उचित परामर्श और दवा के माध्यम से, मानसिक रोग का शिकार कोई भी व्यक्ति पूरी तरह सक्रिय और स्थिर जीवन जी सकता है.’’ उन्होंने बताया कि अगर इलाज न किया जाए तो ज्यादातर मरीजों में लक्षण खुद में सिमट जाते हैं.

लक्षण भले ही हमेशा स्थायी न हों, फिर भी अधिकांश रोगियों में लक्षण की गंभीरता, विशेष रूप से अवसाद का दौर ऐसा होता है जिसे झेलना असहनीय होता है. इससे वे गंभीर अपराधबोध, अवांछित होने और अत्यधिक निराशा की भावना से भरे हो सकते हैं.

वैज्ञानिक अनुसंधान बिरादरी के लिए स्रोत मुहैया कराने वाले अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर बॉयोटेक्नोलॉजी इंफोर्मेशन में सुइसाइड अटेक्वप्ट्स इन बाइपोलर डिसऑर्डर शीर्षक से प्रकाशित 2015 के एक अध्ययन का अनुमान है कि बाइपोलर डिसऑर्डर विकार वाले 25 से 60 प्रतिशत व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक बार आत्महत्या की कोशिश जरूर करते हैं और 4 से 19 प्रतिशत के बीच लोग बार-बार ऐसा प्रयास करते हैं.

मनोचिकित्सकों का कहना है कि बाइपोलर डिसऑर्डर में अवसाद चरम पर हो सकता है. यह अक्सर रोगी की तर्क शक्ति और सकारात्मक भावनाओं को मिटा देता है जिससे कुछ लोग आत्महत्या के लिए उतारू हो जाते हैं क्योंकि उन्हें आशा की कोई किरण नहीं नजर आती और अपने या अपने जीवन को लेकर कोई उत्साह नहीं रह जाता. 

क्या रिया चक्रवर्ती के साथ उनके रिश्ते ने सुशांत को आत्महत्या की तरफ धकेला?
सुशांत सिंह राजपूत की 34 साल और 146 दिनों की जिंदगी को अब मोटे तौर पर उस वक्त के आईने में देखा जा रहा है जो उन्होंने अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के साथ गुजारा. उन्होंने रिया के साथ डेटिंग मई 2019 में शुरू की थी. रिया और सुशांत एक-दूसरे को 2012 से जानते थे, जब वे दोनों यशराज स्टुडियो की प्रतिभाएं थे.

सुशांत का उनके साथ तीन फिल्मों का अनुबंध था जिसकी पहली फिल्म  थी. उस वक्त वे पवित्र रिश्ता की अपनी साथी अदाकारा अंकिता लोखंडे के साथ लिव-इन रिश्ते में थे. रिया भी वाइ-फिल्मस के प्रोजेक्ट मेरे डैड की मारुति का हिस्सा थीं. सुशांत का करियर एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी करने के लिए यशराज स्टुडियो छोड़ने के बाद परवान चढ़ा; रिया निकट भविष्य में कामयाबी हासिल करने में नाकाम रहीं.

सुशांत को तो केदारनाथ और छिछोरे से शोहरत हासिल हुई, रिया को नई स्थिति के हिसाब से खुद को ढालने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी क्योंकि उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर पिट गईं. अप्रैल 2019 के मध्य में मुंबई में उनके रास्ते फिर मिल गए.

मायानगरी में जैसा आम तौर पर होता है, दोनों ने कभी आधिकारिक तौर पर अपने रिश्ते की तस्दीक नहीं की. सितंबर 2019 में दिल्ली में हुए माइंड रॉक्स यूथ समिट में सुशांत ने खुद को 'बिल्कुल सिंगल’ बताया और फिर मुंह चुराकर अपने दांत भींचे. लेकिन तब तक काफी संकेत मिल रहे थे कि प्यार की पींगें बढ़ रही हैं.

1 जुलाई, 2019 को लद्दाख में सुशांत और दोस्तों के साथ अपने जन्मदिन के जश्न की शुरुआत करते हुए रिया की तस्वीरें आईं, जिम और रेस्तराओं के बाहर उन्हें कई बार देखा गया; और अक्तूबर में यूरोप के सफर पर गए. दिसंबर 2019 आते-आते रिया सुशांत के अपार्टमेंट में रहने आ गईं और 8 जून तक रहीं. रिया के मुताबिक, उस दिन वे सुशांत के आग्रह पर गईं क्योंकि वह चाहता था कि उसी दिन उसकी बहन मीतू के आने से पहले वह चली जाए.

रिया और सुशांत के परिवारों के बीच उनके रिश्ते के शुरुआती दिनों से ही खटास आ गई. रिया के वकील सतीश मानेशिंदे ने इंडिया टुडे से बातचीत में दावा किया कि अप्रैल 2019 में रिया जब कुछ दिनों के लिए सुशांत के घर रहने आईं, तब प्रियंका और उनके पति भी वहां रह रहे थे. एक मौके पर वे एक पार्टी में भी साथ-साथ शामिल हुए थे. बाद में जब वे सुशांत के बेडरूम में सो रही थीं, प्रियंका ने नशे की हालत में रिया को कथित तौर पर गलत तरीके से छुआ था.

रिया ने जल्दी ही घर छोड़ दिया लेकिन उससे पहले सुशांत को इस घटना के बारे में बता जरूर दिया. इसकी वजह से भाई-बहनों के रिश्ते बिगड़ गए. सुशांत के पिता के वकील विकास सिंह इस आरोप का पुरजोर खंडन करते हुए कहते हैं, ''यह पूरी तरह झूठा आरोप है और सुशांत ने बाद में इस मामले में अपनी बहन से माफी भी मांगी थी. पूरा परिवार जानता था कि यह झूठा आरोप था.’’

परिवार रिया को सुशांत की अपनों से दूरी के लिए दोषी मानता है. यह आरोप दिसंबर 2019 के बाद और भी तीखा हो गया जब रिया सुशांत के साथ रहने के लिए आ गईं. उस वक्त सुशांत ने भी अपने परिवार यानी पिता और बहनों के साथ संपर्क कम कर दिया.

सुशांत के पूर्व सहायकों में से एक सबीर अहमद और उनके दोस्त महेश शेट्टी ने अपने तमाम इंटरव्यू में दावा किया है कि रिया ने उनके पहले के सारे कर्मचारियों—उनके कुक, मैनेजर और बॉडीगार्ड—को नौकरी से निकाल दिया था और उनकी जगह नए स्टाफ की भर्ती कर ली थी. शेट्टी टीवी शो पवित्र रिश्ता के दिनों से सुशांत के दोस्त रहे हैं. सुशांत ने 13 जून की देर रात शेट्टी से संपर्क करना चाहा था.

इस बीच रिया का 24 वर्षीय भाई शोविक सुशांत के करीब आ गया. वह उनके बांद्रा वाले घर में अक्सर मौजूद रहता. वह उन दो कंपनियों में डायरेक्टर भी बन गया, जो सुशांत ने शुरू की थीं. इनमें से एक विविडरेज रिएलिटी प्राइवेट लिमिटेड थी, जो मिक्स्ड रिएलिटी, एक्सपेरिमेंटल टेक्नोलॉजी और आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी थी और दूसरी थी फ्रंट इंडिया फॉर वर्ल्ड फाउंडेशन, जो स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने तथा भुखमरी, गरीबी और कुपोषण के खात्मे के लिए स्वयंसेवी संगठन था. शोविक ने 24 जुलाई को इंस्टाग्राम पर सुशांत के प्रति भावनाओं का इजहार भी किया. उसने लिखा, ''आप प्यार में यकीन रखते थे और हमेशा प्यार दिया करते थे जबकि आप खुद में एक लड़ाई भी लड़ रहे थे.’’

हाल के महीनों में रिया और सुशांत के रिश्ते कथित मानसिक बीमारी की वजह से बिगड़ते जा रहे थे. मानेशिंदे के मुताबिक, ‘‘सुशांत अपने परिवार को फोन कर रहा था, उन्हें अपना मुंबई छोडऩे का फैसला बता रहा था और उनसे आग्रह कर रहा था कि वे उससे मिलने मुंबई आ जाएं. सुशांत के फोन करने और फोन पर रोने के कई दिनों बाद उनकी बहन मीतू 8 जून 2020 को उनके साथ रहने के लिए आने को राजी हुईं.

इस घटनाक्रम की वजह से सुशांत ने रिया से कुछ वक्त अपने माता-पिता के साथ रहने जाने की गुजारिश की. रिया उनके परिवार से मिलना चाहती थी, वे सुशांत को छोड़कर जाते हुए सहज नहीं थीं.’’ सुशांत की मृत्यु के महीने भर बाद रिया ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ''मेरे लफ्ज उस प्यार के इजहार के काबिल नहीं, जो हमारे बीच था और मुझे विश्वास है कि तुमने वह बात सच्चे मन से कही थी कि हम दोनों का प्यार हमसे ऊपर है...एकदम रुहानी प्यार.’’

अलबत्ता सुशांत के परिवार के वकील विकास सिंह का दावा है कि यह खुला झूठ है. वे कहते हैं, ‘‘सुशांत की बहन को उसके साथ रहने के लिए इसलिए जाना पड़ा क्योंकि रिया छोड़कर चली गई थी. रिया को सफाई देनी चाहिए कि अगर वे सुशांत के कहने पर गई थीं तो उन्होंने सुशांत का फोन क्यों ब्लॉक किया?’’

20 अगस्त को रिया और फिल्मकार महेश भट्ट का एक ह्वाट्सऐप चैट  सामने आ गया, जो उनकी आखिरी रिलीज जलेबी (2018) के निर्माता थे. यह चैट 8 जून का है, जिस दिन रिया ने सुशांत का घर छोड़ा. उसमें ऐसा कहा गया है कि वे रिश्ता तोड़ आई हैं. भट्ट की सलाह थी कि अब पीछे न लौटना. उन्होंने लिखा, ''जो अपरिहार्य था, उसे संभव बनाओ.’’


क्या रिया ने सुशांत के पैसे का गबन किया और उन्हें खुदकुशी की ओर धकेला, जैसा कि उनके पिता आरोप लगा रहे हैं?
शुरुआत में पुलिस की खुदकुशी की थ्योरी विश्वसनीय थी, पर जल्दी इसमें नाटकीय मोड़ आया, जब सुशांत के पिता कृष्ण किशोर सिंह ने साजिश का आरोप लगाकर 25 जुलाई को पटना पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई और रिया पर आरोप लगाए कि उन्होंने सुशांत को आत्महत्या के लिए उकसाया और उनके बैंक खाते से 15 करोड़ रुपए निकाल लिए.

पटना पुलिस ने उसी दिन रिया चक्रवर्ती के साथ उनके पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती, मां संध्या चक्रवर्ती, भाई शोविक चकवर्ती, सैमुअल मिरांडा (हाउस मैनेजर), श्रुति मोदी (पूर्व बिजनेस मैनेजर) के खिलाफ 306 (आत्महत्या के लिए उकसावा), 341 (गलत ढंग से रोकना), 342 (गलत ढंग से बंधक बनाना), 380 (गृह चोरी), 406 (अमानत में खयानत) और 420 (धोखाधड़ी और संपत्ति हड़पना) समेत भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत एफआइआर दर्ज कर ली.

सुशांत के पिता ने उनकी मौत के बाद शिकायत दर्ज करवाने में छह हफ्तों का वक्त क्यों लिया? उस पर उनके वकील विकास सिंह का कहना है कि उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि उन्होंने 'मुंबई पुलिस से उम्मीद छोड़ दी’ थी. उन्होंने कहा, ''हमने इंतजार किया कि वे सही दिशा में कोई कदम उठाएंगे. लेकिन जब हमने देखा कि वे पूरी तरह गलत दिशा में जा रहे हैं, तब हमने पटना में शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया.’’ वजह हालांकि अब भी स्पष्ट नहीं है, लेकिन मुंबई पुलिस ने एफआइआर दर्ज नहीं की और जांच की अहमियत को कम करके दिखाया.

कहा जाता है कि सुशांत रिया के साथ अपने रिश्ते के पहले तक अपने परिवार के करीब थे. कृष्ण किशोर सिंह पटना में राज्य हथकरघा निगम से 16 साल पहले रिटायर हुए थे. सुशांत पांच बहनों-भाइयों में सबसे छोटे थे. के.के. सिंह के भतीजे और भाजपा विधायक नीरज कुमार बबलू याद करते हैं, ''हम सब एक मध्यमवर्गीय परिवार से हैं. मेरे चाचा ने अपने संघर्ष किए.’’

सुशांत का जन्म बिहार के पूर्णिया जिले में हुआ और उन्होंने दसवीं तक की पढ़ाई पटना के सेंट कैरेंस हाइस्कूल से की. पड़ोसी उन्हें शर्मीले लेकिन पढ़ाई में मेधावी किशोर के रूप में याद करते हैं. वे हाइस्कूल पूरा करने और इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए दिल्ली आ गए. अलबत्ता उन्होंने अदाकारी में करियर बनाने के लिए 2005 में दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (अब दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी) की पढ़ाई बीच में छोड़ दी.

उनकी रिश्तेदार दिव्या गौतम कहती है कि सुशांत ने अपने परिवार के साथ बहुत करीबी मेलजोल बनाए रखा. बताया जाता है कि उन्होंने रुपए-पैसे से भी अपने पिता की मदद की और जब 2018 में वे उनके साथ रहने आए थे तब उनके इलाज का खर्च भी उठाया था. कहा जाता है कि अपनी मौत से महज कुछ दिन पहले सुशांत ने पटना में अपने घर की नौकरानी से बात की थी और  कहा था कि कोविड के इस वक्त में पिता का ज्यादा ख्याल रखें.

बहरहाल, रिया के खिलाफ सुशांत के बैंक खातों से बड़ी धनराशियां निकालने के आरोपों की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लिए सबूत जुटाना खासा मुश्किल हो रहा है. रिया का करियर सुशांत जितना कामयाब नहीं रहा इसलिए उन पर अमीर आदमी से शादी करने जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं, यह बात खुद रिया ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखी है.

पिछले साल से सुशांत के अकाउटेंट संदीप श्रीधर ने बैंक खातों के जो विवरण दाखिल किए हैं, उनके मुताबिक रिया के बैंक खातों में कोई बड़ी रकम ट्रांसफर करने के सबूत ईडी को अभी नहीं मिले हैं. श्रीधर ने 31 जुलाई को आजतक टीवी चैनल से कहा कि सुशांत के बड़े लेनदेन फिल्मी सितारों के अमूमन 'लाइफस्टाइल खर्चों’ से संबंधित हैं. इनमें पावना में उनके फार्म हाउस सहित किराये, विदेश यात्राओं और कर्मचारियों की फीस का भुगतान शामिल है.

उनके बैंक खाते के ब्योरों के मुताबिक उन्होंने कम से कम 2.78 लाख रुपए के जीएसटी और आयकर रिटर्न दाखिल किए, 61 लाख रुपए टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसी सीएए क्वान को अदा किए थे और करियर की शुरुआत में मलाड में खरीदे गए फ्लैट की किस्त का भुगतान किया. श्रीधर ने यह भी कहा कि सुशांत के पास उनके खाते में 15 करोड़ रुपए कभी थे ही नहीं जो वे किसी के खाते में ट्रांसफर कर पाते. सुशांत की वकील प्रियंका खेमानी ने इंडिया टुडे टीवी से कहा कि सुशांत अपने धन को लेकर बहुत सावधान थे और अपने सारे लेन-देनों से पूरी तरह अवगत थे.

अब जब सीबीआइ मामले को अपने हाथ में ले चुकी है, मुंबई पुलिस को मौके पर पंचनामे, पोस्टमार्टम और इंक्वेस्ट रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज सहित तमाम कागजात केंद्रीय एजेंसी को सौंप देने होंगे. सीबीआइ अब उस मौके पर घटनास्थल पर मौजूद तमाम गवाहों से पूछताछ करेगी और फ्लैट में भी जाएगी, ताकि घटनाक्रम को नए सिरे से देखे. अगर इससे यह साबित होता है कि सुशांत ने खुदकुशी की है, तो उसे इसमें उकसावे की बात साबित करनी होगी.

इसके लिए उन गवाहों से फिर पूछताछ करनी होगी और स्थापित करना होगा कि उन्हें अपनी जान लेने के लिए उकसाया गया. खुदकुशी में उकसावे को साबित करना हमेशा पेचीदा होता है. सीबीआइ को इसके लिए मंशा की साफ-साफ पहचान करनी होगी. बदकिस्मती से हाल के वर्षों में एजेंसी की मामलों की गुत्थी सुलझाने की प्रतिष्ठा नहीं रही है.

सुशांत ने अपने मन की तमाम परेशानियों को दूर करने के लिए अपनी जान लेने का फैसला किया हो सकता है. उन्हें कतई पता नहीं होगा कि उनकी खुदकुशी से और भी ज्यादा सवाल पैदा हो जाएंगे. उनके जवाब खोजना ही अकेला तरीका है जिससे हम अधबीच में ही खत्म हो गई एक मेधावी जिंदगी के सवालों का पटाक्षेप कर पाएंगे.  
—साथ में, अमिताभ श्रीवास्तव, सोनाली आचार्जी और दिव्येश सिंह

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