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आवरण कथाः कोविड-19  के म्यूटेट हुए स्ट्रेन

हरेक वायरस में म्यूटेशन होता है, लेकिन कोविड-19 की प्रोटीन में आ रहे बदलाव बेहद चिंता का कारण हैं, इनसानी कोशिका में यह इसी प्रोटीन के जरिए घुसता है.

भारत ‘डबल म्यूटेंट’ स्ट्रेन  भारत ‘डबल म्यूटेंट’ स्ट्रेन 

शुरुआती चीनी स्ट्रेन (डी614जी)
वुहान से निकले इस वायरस ने जनवरी 2020 में पहचाने गए पहले वायरस की जगह ली और जून आते-आते यह दुनिया भर में छा गया

इस म्यूटेशन से क्या होता है?
इनसान के एसीई2 रिसेप्टर से ज्यादा दक्षता से चिपकने में मदद करता है

यह कितना संक्रामक है? सेल जर्नल के जून 2020 के एक अध्ययन में यह 1 मार्च से पहले दुनिया भर के 997 जीनोम सीक्वेंस में 10 फीसद में, 1-31 मार्च के बीच 67 फीसद सीक्वेंस में, 1 अप्रैल-18 मई के बीच 78 फीसद सीक्वेंस में पाया गया

भारत में प्रकोप 1 अप्रैल और 18 मई 2020 के बीच सभी नमूनों में 78 फीसद में देखा गया

दक्षिणी अफ्रीकी स्ट्रेन (501वाइ.वी2)
दक्षिण अफ्रीका में पचास फीसद ज्यादा संक्रामक यह वायरस वहां सबसे प्रबल स्ट्रेन बन गया और अब करीब 40 देशों में फैल चुका है

इस म्यूटेशन से क्या होता है? ब्रिटिश रूप की तरह यह भी ज्यादा संक्रामक है. इसका एक और रूप ई484के वायरस को पिछले संक्रमणों से बने एंटी-बॉडी और कुछ वैक्सीन को चकमा देने में मदद करता है

दोबारा संक्रमण की संभावना ब्रिटिश रूप के विपरीत वायरस का यह दक्षिण अफ्रीकी रूप उन लोगों को शिकार बनाता है जिन्हें पहले ही कोविड हो चुका है
भारत में प्रकोप 34 मामले

ब्राजील स्ट्रेन (पी.1)
ब्राजील के मानौस में संक्रमण में उछाल से जुड़ा, उसके बाद 21 दूसरे देशों में फैला

इस म्यूटेशन से क्या होता है? कुछ म्यूटेशन से संक्रमण की रफ्तार तेज होती है, लेकिन दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन की तरह यह सामान्य संक्रमण या वैक्सीन से बनी एंटी-बॉडी को चकमा दे जाता है

दोबारा संक्रमण की संभावना ब्राजील-ब्रिटेन केड प्रोजेक्ट ने पाया कि मानौस में अक्तूबर 2020 तक 76 फीसद आबादी इसके संक्रमण का शिकार हो चुकी है, फिर भी इसके नए रूप की जानलेवा लहर उठी

भारत में प्रकोप अब तक सिर्फ 1 मामला दर्ज

ब्रिटिश स्ट्रेन (बी.1.1.7)
ब्रिटेन में सितंबर में पाया गया, वहां दूसरी घातक लहर के पीछे यही बताया जाता है. इसे डब्ल्यूएचओ ने ‘चिंताजनक वायरस’ कहा है

इस म्यूटेशन से क्या होता है? कैंब्रिज युनिवर्सिटी की एक रिसर्च के मुताबिक, वायरस में मोटे तौर पर 17 बदलाव थे. एक रूप को एन501वाइ कहा गया, कांटेदार नोक के ‘‘रिसेप्टर-बाइंडिग डोमैन’’ बदल देता है. एक और बदला हुआ रूप, एच69/वी70 में नुकीले नोक का छोटा-सा हिस्सा हट जाता है और एंडी-बॉडी से बचने में वायरस की मदद करता है

क्या यह ज्यादा संक्रामक है? इंपीरियल कॉलेज के एक अध्ययन ने इस वायरस को पिछले रूपों से 70 फीसद ज्यादा संक्रामक पाया, वहीं एनआइवी पुणे की तरफ से हफ्स्टर यानी चूहे जैसे जानवर पर किए गए एक अध्ययन ने इसे शुरुआती चीनी रूप जितना संक्रामक पाया. यह स्ट्रेन 50 देशों में फैल चुका है. सीडीसी ने मार्च 2021 में पूर्वानुमान जाहिर किया कि अमेरिका में यह सबसे प्रबल न्न्योंकि इसका फैलाव हर नौ दिनों में दोगुना हो रहा था. दूसरे तमाम स्ट्रेन से 35-40 फीसद ज्यादा संक्रामक

भारत में प्रकोप 737 नमूनों में यह रूप पॉजिटिव पाया गया, जिनमें सबसे ज्यादा पंजाब में थे जान का जोखिम युनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के एक अध्ययन के मुताबिक, ब्रिटेन में 64 फीसद ज्यादा मौत का कारण यह स्ट्रेन है. भारत में इस स्ट्रेन का ज्यादा संक्रमण पंजाब में और मृत्यु दर भी राष्ट्रीय औसत से करीब दोगुनी यानी 3 फीसद है

भारत ‘डबल म्यूटेंट’ स्ट्रेन 
देश में सबसे पहले दिसंबर 2020 में पाया गया लेकिन उसके बाद से ज्यादा फैल चुका है. महाराष्ट्र के बीस फीसद से ज्यादा नमूनों (या 230 मामलों) में यह पाया गया

क्या ‘डबल म्यूटेंट’ ज्यादा खतरनाक है? एक स्वतंत्र साझा डेटाबेस जीआइएसएआइडी ने 43 वायरसों की सूची तैयार की, जिनमें भारत के दोनों म्यूटेट रूप ई48ब्यू और एल452आर भी हैं. मृत्यु दर में कोई बढ़ोतरी इससे जुड़ी नहीं है

इस म्यूटेशन से क्या होता है? इस वाले स्ट्रेन में  ई484क्यू म्यूटेशन दक्षिण अफ्रीकी और ब्राजीली स्ट्रेन से मिलता-जुलता है. ‘एस्कैप म्यूटेशन’ के नाम से भी जाने जाना वाला यह रूप वायरस को पहले से निर्मित एंटी-बॉडी से बच निकलने में मदद करता है. एल452आर कैलिफोर्नियाई रूप में पाया गया है और वायरस की संक्रामकता बढ़ाने में मदद करता है. यह नवंबर 2020 से तेज रहा है और ज्यादा बढ़ गया है. इससे संकेत मिलता है कि यह कोविड-19 को इनसानी कोशिकाओं में ज्यादा आसानी से घुसने देकर इसके क्रमिक विकास में मदद कर सकता है

नोट: ब्रिटेन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन के भारत में प्रकोप का आधार हैं 18 राज्यों से सिर्फ 10,787 नमूने.

-सोनाली आचार्जी

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