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भय की पराकाष्ठा

पंवार अब जमानत पर बाहर हैं और दावा करते हैं कि वह वीडियो फर्जी था. उनका कहना है कि हिंदू धर्म में मूर्तियों के पुराने होने पर उन्हें बदलने की एक परंपरा रही है.

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पुराना शिव मंदिर पुराना शिव मंदिर

पुराना शिव मंदिर

छह अप्रैल 2021 को, दिल्ली के शाहपुर जट इलाके में पुराना शिव मंदिर की प्रबंध समिति के एक सदस्य, 50 वर्षीय पदम पंवार को मंदिर में स्थापित साईं बाबा की मूर्ति को 'उखाड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. 25 मार्च को उस मूर्ति को हटाकर वहां गणेश प्रतिमा स्थापित की गई थी. बाद में एक वीडियो सामने आया जिसमें पंवार मूर्ति की ओर इशारा करते हुए कह रहे थे, ''वह कोई भगवान नहीं था, वह 1918 में मर गया, वह एक मुस्लिम था.’’ पीछे से एक और आवाज आती है, ''मुल्ला है.’’

पंवार अब जमानत पर बाहर हैं और दावा करते हैं कि वह वीडियो फर्जी था. उनका कहना है कि हिंदू धर्म में मूर्तियों के पुराने होने पर उन्हें बदलने की एक परंपरा रही है. लेकिन अन्य लोगों को उनकी बात पर यकीन नहीं है. साईं बाबा के नौ भक्तों ने पुलिस में शिकायत की थी. उसके बाद पंवार के खिलाफ एफआइआर दर्ज हुई.

एक और वीडियो वायरल हुआ है जिसमें पंवार उत्तर प्रदेश के भड़काऊ भाषण देने वाले महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के साथ बैठे दिख रहे हैं. वीडियो में सरस्वती उन्हें 'पाखंडी साईं’ की मूर्ति को 'तोड़ने और फेंकने’ का आशीर्वाद दे रहे हैं.

उसमें सरस्वती कहते हैं, ''मेरा वश चले तो साईं जैसे जेहादी कभी मंदिरों में प्रवेश नहीं कर पाएंगे.’’ प्रभावशाली डासना देवी मंदिर के प्रमुख सरस्वती को इस साल जनवरी में एक धर्म संसद में उनके भाषण के बाद गिरफ्तार किया गया था. भाषण में उन्होंने हिंदुओं से मुसलमानों के खिलाफ हथियार उठाने का आह्वान किया था. 

माना जाता है कि आध्यात्मिक गुरु साईं बाबा 19वीं शताब्दी में महाराष्ट्र के शिरडी में रहते थे. वे किस धर्म के अनुयायी थे, इसकी ज्यादा जानकारी नहीं है. शिरडी मंदिर का प्रबंधन करने वाले श्री साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट का कहना है कि साईं ने 'प्रेम को ही धर्म’ बताया और उनके उपदेश हिंदुओं तथा मुसलमानों में आपसी प्रेम और भाईचारा बढ़ाने वाले रहे हैं.

वैसे, कई हिंदू धर्मगुरुओं का मानना है कि साईं बाबा की पूजा से 'सनातन धर्म का मूल स्वरूप दूषित होता है.’ अगस्त 2014 में द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने इस आशय का प्रस्ताव भी पारित किया था. 
बहरहाल, शाहपुर जट मंदिर में 2009 में स्थापित साईं बाबा की मूर्ति अब तक नहीं मिली है. हालांकि, मंदिर की एक दीवार पर साईं बाबा का एक पोस्टर लगा हुआ है. पंवार अब भी मंदिर समिति के सदस्य हैं, पर कोई भी घटना के बारे में यह कहते हुए बात नहीं करना चाहता कि यह एक अनावश्यक विवाद था.

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