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पुरुष जो चमके

महिला एथलीटों की चमक से पीछे पुरुषों का प्रदर्शन ढंक गया लेकिन कुछ खिलाडिय़ों ने प्रभावशाली रिकॉर्ड कायम किए.

रवि कुमार दहिया रवि कुमार दहिया

नीरज चोपड़ा, 23 वर्ष
भाला फेंक
2018 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेता और पूर्व जूनियर विश्व चैंपियन क्वॉलिफिकेशन दौर तक पहले स्थान पर रहे, जहां उन्होंने स्वर्ण के सबसे बड़े दावेदार जर्मनी के जोहान्स वेटर को बाहर कर दिया.

पहले थ्रो में चोपड़ा ने 83.5 मीटर के क्वॉलिफिकेशन मार्क को पार कर लिया. शनिवार को नतीजा चाहे जो हो, वे फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय होने का इतिहास बना दिया है.  


रवि कुमार दहिया, 23 वर्ष
फ्रीस्टाइल कुश्ती (57 किग्रा)
ओलंपिक के फाइनल में पहुंचने वाले दहिया, सुशील कुमार के बाद महज दूसरे पहलवान हैं. दो बाउट को तकनीकी दक्षता से आराम से पार करने वाले दहिया ने सेमीफाइनल में कमाल का जोश और जज्बा दिखाया. उन्होंने एक मिनट से भी कम समय में पलटवार किया. फाइनल में उन्हें चांदी से संतोष करना पड़ा लेकिन कुश्ती का नया सितारा जन्म ले चुका है.

फवाद मिर्जा, 29 वर्ष
इक्वेस्ट्रियन (इवेंटिंग)
सिग्नूर मेडिकॉट के साथ स्पर्धा में जिस घोड़े के साथ उन्होंने 2018 एशियाई खेलों में दो रजत जीते, मिर्जा ने ड्रेसेज में अच्छी शुरुआत की, और वे शीर्ष 10 में शामिल रहे.

उनकी रैंकिंग क्रॉस कंट्री और जंपिंग जैसे बाद के राउंड में गिर गई, लेकिन दुनिया में 70वीं रैंकिंग के घुड़सवार ने 25 जोड़ियों के अंतिम दौर के लिए न्न्वालीफाइ करने के लिए एंप्लॉक्रब के साथ सवारी की. यह दुनिया भर से 63 सवारों के एलीट ग्रुप के बीच अविश्वसनीय उपलब्धि है.  

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