scorecardresearch
 
डाउनलोड करें इंडिया टुडे हिंदी मैगजीन का लेटेस्ट इशू सिर्फ 25/- रुपये में

उतार-चढ़ाव भरे समय में निवेश

मिथ्याओं के आधार पर निवेश करना बंद न करें. मनगढ़ंत बातों से तथ्य चुनने के लिए जांचे-परखे तरीके सीखकर पूरे विश्वास के साथ निवेश करें.

X
स्मार्ट मनी स्मार्ट मनी

स्मार्ट मनी कवर स्टोरी

शेयर बाजार के धराशायी होने से निडर से निडर निवेशक की पेशानी पर बल पड़ सकते हैं. भारतीय शेयर बाजारों ने 2020 में करीब 40 फीसद की गिरावट देखी और उससे उबर आए. इस साल अभी तक हम 10 फीसद की गिरावट देख चुके हैं, उससे बाजार उबरे और फिर गिर गए. बढ़ती महंगाई और कर्ज की ब्याज दरें बाजार की इस अनिश्चितता को और बढ़ा रही हैं, जिससे निवेश पोर्टफोलियो के मूल्य में आ रहे जबरदस्त उतार-चढ़ावों को जज्ब कर पाना और भी मुश्किल होता जा रहा है.

जब शेयरों की कीमतें चढ़ती हैं तो बहुत-से निवेशकों को पैसा लगाए रखने के लिए ज्यादा भरोसा दिलाने की जरूरत नहीं पड़ती, पर जब बाजार धराशायी होते हैं तो निवेशक बेचैन हो जाते हैं. तपे-तपाए निवेशकों ने ऐसे हालात में प्रतिक्रिया करने के मुश्किल सबक सीख लिए हैं—शांत-संयत रहें और जज्बाती फैसले लेने से बचें.

यह कहना आसान है, करना नहीं, खासकर पहली बार निवेश करने वालों के लिए. उन्हें अभी यह समझना बाकी है कि बाजार के उतार-चढ़ावों पर उनका प्राय: कोई बस नहीं होता. उतार-चढ़ावों के वक्त अपनी प्रतिक्रिया को बस में रखना जरूरी है. चिंतित और बेचैन होना समझ में आता है पर निवेश के फैसलों को जज्बातों से तय न होने देना बेहद जरूरी है.

पिछले कुछ दशकों में शेयर बाजार का उतार-चढ़ाव बढ़ा है और ऐसा युद्ध, महामारी और वित्तीय संकट सरीखी घटनाओं के कारण होने लगा है जिनका उससे कोई लेना-देना दिखाई नहीं देता. मगर सावधानी से विश्लेषण करके निवेशक जोखिम के सही मायने समझ सकते हैं. 

मानो ये चिंताएं ही काफी न हों, शेयर बाजारों को लेकर कई मिथ या मनगढ़ंत बातें फैली हैं जो निवेशकों को चक्कर में डाल सकती हैं और संदेह पैदा कर सकती हैं. मिथकों से गुमराह होकर कई निवेशक हड़बड़ी में अक्सर निवेश निकाल लेते या पोर्टफोलिया के मूल्य पर असर डालने वाले खराब फैसले ले बैठते हैं. कामयाब निवेश की कुंजी आज भी वही है जो पहले थी—इन्हें सरल रखिए और योजना तैयार रखिए. वित्तीय योजना बनाकर और उस पर अडिग रहकर आप छोटे उतार-चढ़ाव से आगे देख पाएंगे और निवेश के अनूठे उद्देश्यों पर ध्यान लगा पाएंगे. 

इसे फिटनेस की व्यवस्था की तरह समझिए. निवेश का कोई अचूक वक्त नहीं होता, क्योंकि शेयर बाजार की हलचल के बारे में पहले से जानने का कोई तरीका नहीं है. शुरुआत करने के लिए पहले निवेश से जुड़े मिथों के बारे में जानिए, उनसे खुद को प्रभावित मत होने दीजिए और अपनी जरूरतों और जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से वित्तीय योजना तैयार कीजिए. कामयाब निवेशक बनने के लिए यहां 10 मिथ और उनसे उबरने के तरीके यहां दिए जा रहे हैं. 

मिथ #1
निवेश की शुरूआत  करने के लिए मुझे बहुत सारा पैसा चाहिए

यह बात कई साल पहले सच थी जब खर्च के लिए हाथ में ज्यादा पैसा नहीं होता था. यही नहीं, ट्रेड ऑर्डर स्टॉक ब्रोकर के जरिए देना होता था और इसकी भी एक कीमत थी. साथ ही इस सबकी जानकारी भी कम होती थी, जिससे निवेश कई लोगों की पहुंच के बाहर था. आज आप मिनटों में ट्रेडिंग और डीमैट खाता खोलकर निवेश शुरू कर सकते हैं.

ट्रेडिंग ऐप के जरिए स्मार्टफोन से निवेश करना मुमकिन हो गया है. महज 500 रुपए से कम रकम के साथ भी आप न केवल सीधे शेयरों में बल्कि इक्विटी म्यूचुअल फंडों में भी निवेश शुरू कर सकते हैं. यही नहीं, इतने सालों के दौरान शेयर बाजार इतने सयाने और परिपक्व हो गए हैं कि धोखाधड़ी और घोटालों की संभावना भी कम हुई है और निवेशकों की सुरक्षा बढ़ी है. पेशेवर सलाहकार भी हैं जिनकी मदद से जानकार तरीके से निवेश शुरू किया जा सकता है. इस लिहाज से कहा जा सकता है कि निवेश अब महंगा सौदा नहीं रह गया है. लेकिन निवेश के लिए बुनियादी सावधानियां जरूर रखनी होती हैं.

मिथ #2
बाजार में कदम रखने के लिए मैं बेहतरीन वक्त का इंतजार कर सकता हूं

आदर्श रूप से निवेश का सबसे अच्छा दिन तो वही है जब बाजार निचले स्तर पर हो. मगर पता कैसे चले कि वह दिन कौन-सा है? पिछले दिनों की जानकारी हो तभी आप बता सकते हैं कि निवेश के लिए सबसे अच्छा दिन कौन-सा था, जो बाद में तय करना बड़ा आसान है. बाजार के वक्त की थाह लेना मुश्किल नहीं नामुमकिन है.

अनुभवी निवेशक बाजार के वक्त की थाह लेने के बजाए बाजार में बने रहने में यकीन करते हैं. निवेश की सही तारीख का इंतजार करने के बजाए निवेश शुरू कर देना ही बेहतर है, क्योंकि सही दिन का इंतजार करने के चक्कर में आप कई अच्छे मौके गंवा सकते हैं.

तत्काल निवेश करने की इस घबराहट से उबरने का एक तरीका है—आप 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग’ पर विचार करके थोड़े-थोड़े अंतराल पर एक निश्चित धनराशि निवेश कर सकते हैं. जो लोग नियमित रूप से निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए म्यूचुअल फंड में निवेश का सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआइपी या सिप) अचूक औजार बनकर उभरा है. 

एसआइपी या सिप लेने से निवेश के सही समय की उलझन से छुटकारा मिल जाता है और निवेश को एवरेज किया जा सकता हैं. निवेश की एवरेजिंग को एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स सरीखे सूचकांक के हर महीने की पहली तारीख को तीन साल तक नियमित खरीदने के उदाहरण से समझा जा सकता है. सूचकांक ऊपर-नीचे होता रहेगा, पर आप निश्चित रकम हर महीने लगाना जारी रखते हैं, तो उस की एवरेजिंग हो जाती है पर इंडेक्स पर निवेश की है.

म्यूचुअल फंड, रिटर्न

यह तरीका आपको बेहतरीन रिटर्न की गारंटी नहीं देता लेकिन आपके निवेशों के साथ कम तनाव की गारंटी जरूर देता है. ऐसे भी दौर आएंगे जब ऐसे निवेश के मूल्य में घाटा उठाना पड़े, खासकर  बाजार की गिरावट के समय, पर रुपी कॉस्ट इन्वेस्टिंग से जोखिम कम हो जाता है. इरादा निवेश के सही समय या निवेश के लिए बहुत सारी धनराशि का इंतजार किए बगैर नियमित निवेश करते रहने का है.

जितना ही आप उन दिनों का इंतजार करते हैं जब बाजार मंद होगा ताकि बाद की तेजी का फायदा उठा सकें, उतना ही यह भी संभव है कि इंतजार के दिनों में बाजार के बेहतरीन दिनों का फायदा गंवा बैठें, जिसका असर लंबे वक्त में आरओआइ (रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट) यानी निवेश पर वापसी पर पड़े.

मिथ #3
निवेश में जोखिम बहुत है

शेयर बाजारों के धराशायी होने के अनगिनत उदाहरण हैं. इससे यह धारणा बनती है कि निवेश जोखिम भरा सौदा हैं. हालांकि बाजार समय के साथ लंबे वक्त में अच्छी-बढ़त हासिल कर लेते हैं. शेयर बाजार के कई हिस्से हैं जिनमें जोखिम का स्तर अलग-अलग होता है और इक्विटी म्यूचुअल फंड के संसार में भी जोखिम के अलग-अलग स्तर वाले कई फंड हैं. व्यक्ति के जोखिम सहने की क्षमता के हिसाब से फंड की श्रेणियां और शेयर हैं, जिनमें वह निवेश कर सकता है.

यही नहीं, लोगों के अलग-अलग वित्तीय लक्ष्य होते हैं जो विभिन्न समयावधियों में फैले होते हैं, जैसे छोटे, मध्यम और लंबे वक्त के लक्ष्य. मसलन 20 के आसपास की उम्र के निवेशक के मामले में रिटायरमेंट सरीखे लंबे वक्त के लिए निवेश करते वक्त 20 से 30 साल की निवेश अवधि में जोखिम बराबर बंट जाता है. जैसा पहले देखा जा चुका है, पिछले 21 साल में कई गिरावटों के बावजूद सेंसेक्स 10 गुना ऊपर चढ़ा है.

ऐसे निवेश चुनिए जो आपके वित्तीय लक्ष्य और निवेश समयावधि से मेल खाते हों और पूरी संभावना है कि आप अपने निवेश जोखिम खासे कम कर लेंगे. शेयर बाजारों से पैसा बनाने की कुंजी डरने और पैसा निकाल लेने में नहीं है, बल्कि बाजार के उतार-चढ़ावों के दौरान लंबे वक्त के लिए पैसा लगाए रखने में है.

अनुभवी निवेशक बाजार के वक्त की थाह लेने के बजाए बाजार में बने रहने में यकीन करते हैं

मिथ #4
नकदी हाथ में होना ज्यादा सुरक्षित है

बैंक में धन सुरक्षित है. मगर इसका मूल्य बरकरार नहीं रहता, भले ही कोई कहे कि बचत या जमाराशि पर गारंटीशुदा ब्याज मिलता है. बैंक में नकदी रखने को लेकर बड़ी चिंता महंगाई है. छोटे वक्त की बचतें बैंक में रखना अच्छा है, पर मध्यम या लंबे वक्त के लिए धन को इस तरह निवेश करना सबसे अच्छा है जिससे उसका मूल्य इतना बढ़े कि महंगाई के असर को पीछे छोड़ दे.

हां, आपके माता-पिता या परिवार के बड़े सदस्य उन पुराने अच्छे दिनों की बात करते रहते होंगे जब बैंक दहाई की दरों में ब्याज देते थे और महंगाई कम थी. भारत में 3-4 फीसद तक कम महंगाई के दिनों को विदा हुए जमाना हुआ और बैंक में जमा राशियों पर ऊंचे रिटर्न के दिन भी कब के लद गए.

आज आपकी बचत का असल मूल्य (महंगाई से समायोजित) कायम रहे, इसके लिए उसे निवेश करना जरूरी है. यही नहीं, 60 की उम्र में काम बंद करने के बाद भी आपके 25-30 साल जीने की संभावना है. ऐसे में आपको अपनी बचत और निवेशों पर ही निर्भर रहना होगा, जिसके लिए जरूरी है कि उनका मूल्य बढ़े और नकदी के भरोसे रहने से तो मूल्य नहीं बढ़ेगा.

मिथ  #5
निवेश जटिल और समय-खाऊ मामला है

निवेश करना जटिल हो सकता है. मगर यह जटिलता अक्सर खुद ही अपने पर थोपी जाती है. होता यह है कि निवेशक अनुभव और विशेषज्ञता के बगैर खुद से निवेश करना शुरू कर देते हैं. वाहन चलाने के लिए आपको लाइसेंस चाहिए, पर लाइसेंस होना दुर्घटना नहीं होने की गारंटी नहीं है. निवेश के बारे में भी इसी तरह सोचिए. अक्सर लोगों को निवेश की कोई जानकारी नहीं होती और गलत तरीका अपनाकर वे पैसा गंवा बैठते हैं. स्ट्रक्चर्ड प्रोडक्ट और डेरिवैटिव जैसे निवेश के जटिल साधन मौजूद हैं, तो ब्लू-चिप स्टॉक, म्यूचुअल फंड, ईटीएफ और एनपीएस (राष्ट्रीय पेंशन व्यवस्था) सरीखे सरल साधन भी हैं.

फिर पेशेवर सलाहकार और विशेषज्ञ भी हैं जो निवेश में आपको रास्ता दिखा सकते हैं. आप उन्हें अपनी बीमारियों का इलाज करने वाले डॉक्टर की तरह देख सकते हैं या अपनी कार चलाने वाले उस ड्राइवर की तरह जो ट्रैफिक की भीड़-भाड़ के बीच कार चलाने का सिरदर्द अपने ऊपर ले लेता है ताकि आप शांति से सफर करें. पते की बात यह कि समझने में आसान वित्तीय साधन चुनें या अपने श्रेष्ठतम हित में काम कर सकने वाले विशेषज्ञों की सेवा लें. निवेश के बारे में जानते-समझते रहें ताकि पता हो कि आपके धन का क्या हो रहा है.

निवेश के बुनियादी सिद्धांत एसेट एलोकेशन और विविधता का पालन करें, जो प्रोटीन, विटामिन, वसा और कार्बोहाइड्रेट के संतुलित आहार की तरह है. मूलत: आप इक्विटी, डेट, रियल एस्टेट, गोल्ड और कैश के मिश्रण में निवेश करते हैं.

निवेश को लेकर चिंतित होना लाजिमी है पर निवेश का फैसला करते समय भावनाओं को काबू में रखना भी उतना ही महत्वूर्ण है

मिथ  #6
बाजार की खबरों पर नजर रखने के लिए बहुत ज्यादा वक्त देना पड़ता है

यह आप पर है कि अपने निवेश पर नजर रखने और उनका मूल्यांकन करने के लिए कितना वक्त देते हैं. सामान्यत: बीज बोने के बाद आप रोज पौधे की बढ़ोतरी नहीं नापते. पौधे की तेज और स्वस्थ वृद्धि के लिए बस इतना ख्याल रखते हैं कि पौधे को धूप मिले, पानी नियमित दें और खाद डालें. समय के साथ आप समझ जाते हैं कि जब तक आप उसका ख्याल रखते हैं, पौधा अपनी स्वाभाविक रफ्तार से बढ़ता रहता है.

बाजार में आपके निवेश भी इसी तरह हैं. आपको बस इतना पता होना चाहिए कि क्या हो रहा है और आपके निवेश पर उसका क्या असर पड़ रहा है. विशेषज्ञ सलाहकार की सेवाएं लेना आपको चिंता मुक्त रखने में मददगार हो सकता है या आप अपने लक्ष्य के अनुरूप निश्चित समयावधि के लिए और उपयुक्त निवेश उपकरण में पैसा लगा सकते हैं. मसलन, छह महीनों के लिए निवेश करते वक्त आप शेयर या इक्यिटी म्यूचुअल फंड के बजाए डेट फंड सरीखे गैर-उतार-चढ़ाव वाले वित्तीय उपकरण की तलाश करना चाहिए. ठ्ठ

मिथ  #7
निवेश केवल विशेषज्ञों के लिए है

शेयर बाजार आजकल बहुत विकसित और आपस में जुड़े हैं. हरेक के लिए निवेश या शेयर बाजारों पर आर्थिक, भूराजनैतिक और अन्य कारकों के असर के बारे में सब कुछ जानना संभव नहीं है. मसलन, भारतीय बाजारों में विकसित अर्थव्यवस्थाओं के निवेशकों ने पैसा लगा रखा है, जो ऐसे कारणों से भारत से पैसा निकाल सकते हैं जिनका भारत से कोई लेना-देना न हो, बल्कि उनके अपने देशों की नीतिगत या आर्थिक स्थिति से हो.

ऐसे निवेशकों के लिए जो 'कम विशेषज्ञ’ हैं, निवेश महज खरीद-बिक्री नहीं, बल्कि यह जानना भी है कि कब और कितने लंबे वक्त तक होल्ड रखना है. इंडेक्स फंड या ईटीएफ में निवेश के लिए विशेषज्ञता की जरूरत नहीं होती, तो लंबे वक्त के विविध म्यूचुअल फंडों के लिए भी इसकी जरूरत नहीं है. किसी कंपनी के शेयर खरीदने के मुकाबले फंड कम जोखिम भरे हैं, क्योंकि अगर फंड में एक निवेश से घाटा होता है तो दूसरे निवेश से उसे बराबर किया जा सकता है. ठ्ठ

मिथ  #8
आपका पैसा बंध जाता है

अक्सर कहा जाता है कि निवेश बस लंबे वक्त के लिए ठीक है. मगर इसका यह मतलब नहीं कि आपकी निवेशित रकम 20 या ज्यादा सालों के लिए बंध जाए. शेयर और म्यूचुअल फंड अपने ढांचे से ही तरल हैं, जिसका मतलब है कि आप जब चाहें बाहर आ सकते हैं.

आप जितने लंबे वक्त तक निवेश रखते हैं, बाजार के कार्य प्रदर्शन के धक्कों को सुचारु बनाने और अच्छे रिटर्न हासिल करने की संभावना उतनी ही ज्यादा होती है. हालांकि आप किसी भी वक्त अपनी रकम निकाल सकते हैं, पर ऐसा तभी करें जब जरूरी हो या आपके निवेश के वित्तीय लक्ष्य पूरे होने के करीब हों. निवेश जल्द निकाल लेने का असर आपके संभावित रिटर्न पर पड़ सकता है. याद रखिए, कम कीमत पर खरीदना और ऊंची कीमत पर बेच देना शेयरों में पैसा बनाने का मंत्र है. ठ्ठ

मिथ #9
सोने और जमीन-जायदाद में निवेश ही सबसे अच्छा है

कोई भी परिसंपत्ति वर्ग हमेशा शिखर पर नहीं रहता. हो सकता है कि सोना कुछ साल शीर्ष पर हो तो कुछ साल किसी गिनती में ही न हो. एक वक्त था जब सोना अनमोल था और कई मुद्राओं का दारोमदार उसके कंधों पर था. अब ऐसा नहीं है. फिर सोना और रियल एस्टेट खुशहाल वक्त में ऊपर चढ़ते हैं जब कर्ज आसान और खरीदारों की भीड़ हो.

इन दोनों परिसंपत्ति वर्गों के साथ मूर्त और असल होने का एक तत्व जुडा है जो इन्हें बहुतेरे निवेशकों का पसंदीदा बना देता है. हालांकि किसी के लिए भी केवल इन्हीं में निवेश करने का अकेला कारण नहीं होता. विविधता की आदर्श रणनीति यही है कि तमाम परिसंपत्ति वर्गों में निवेश फैलाएं और छोटे वक्त के फायदे हासिल करने के लिए उनमें रणनीतिक फेरबदल करते रहें. अन्य परिसंपत्ति वर्गों के विपरीत, शेयरों ने लंबे वक्त में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है.

मिथ #10
बाजारों में पैसा बनाना बड़ा आसान है

फ्री लंच जैसी कोई चीज नहीं होती. बाजार से आनन-फानन पैसा बनाने के किस्से हम सुनते रहते हैं और वे सच भी हो सकते हैं. 'चुटकी बजाते अमीर बनो’ योजनाएं और निवेश विकल्प हमेशा होते हैं. इन दिनों अगर क्रिप्टोकरेंसी और एनएफटी का बोलबाला है, तो कभी दूसरे बाजार में आइपीओ और स्मॉल कैप स्टॉक का बोलबाला था.

याद रखिए कि रातो-रात अमीर बनने के लिए किए निवेश का हश्र ज्यादातर लोगों के लिए अच्छा नहीं हुआ. बाजार लंबे वक्त के निवेशकों को जरूर पुरस्कृत करते हैं. जरूरत के अनुरूप निवेश समयावधि के लिए पैसा लगाए रखिए. अच्छा निवेश वह है, जो ऊबाऊ है, जिसमें आप इस वक्त पैसा अलग रखते और बाद में उसे दोनों हाथों से बटोर लेते हैं.

उतार-चढ़ाव निवेश की शब्दावली है जिसका असर शेयर की कीमत या बाजार के सूचकांक पर पड़ता है. उतार-चढ़ाव कई आर्थिक और राजनैतिक कारकों की वजह से आते हैं, जिनमें एक औद्योगिक क्षेत्र विशेष पर असर डालने वाली खबरों से लेकर सरकारी नीतियों में बदलाव और राजनैतिक तनाव या उथल-पुथल तक शामिल हैं. अस्थिरता को बाजार में गिरावट भर समझने की गलती निवेशकों को नहीं करनी चाहिए. इसका अर्थ अचानक तेजी आना भी हो सकता है. अस्थिर बाजार में कीमतें वास्तविक मूल्य की सटीक झलक नहीं होतीं. बाजार में निवेश करते वक्त उसके बदलावों को सहजता से लेने में ही समझदारी है.

इसी तरह, यह भी बेहद अहम है कि बाजार अपनी फितरत से ही प्रतिकूल खबरों पर तत्काल बढ़-चढ़कर अतिशय प्रतिक्रिया कर बैठते हैं और फिर उस घटनाक्रम के असर को हिसाब में लेते हैं. छोटे वक्त में शेयर बाजार बेतहाशा हिचकोले खा सकते हैं. उत्साही निवेशक ऊंची कीमत पर खरीदकर कम कीमत पर बेच सकते हैं.

मगर सयाने निवेशक तब भी शांत रहते हैं जब दूसरे डर जाते हैं, और नुक्सान से बचने या उसे कम करने में सफल रहते हैं. शेयर बाजारों को व्यापक तौर पर देखने और समझने के बाद आप निवेश अपेक्षाओं का अंदाजा लगाकर स्मार्ट निवेशक बन सकते हैं. निवेश यात्रा का अहम पहलू लंबे वक्त के लक्ष्यों का ध्यान रखना और बाजार के इर्द-गिर्द मंडराते अपुष्ट मिथों से गुमराह न होना है. योजना बनाकर और शांत मन-मस्तिष्क से यह हासिल किया जा सकता है.

निवेश महज खरीदना और बेचना नहीं बल्कि यह समझना भी है कि कितने समय तक होल्ड किया जाए.

-नारायण कृष्णमूर्ति

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें